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लेख@आधुनिक दुनिया और इंसानियत की पुकार

कभी-कभी बैठकर मैं सोचती हूँ कि वक्त के साथ यह दुनिया कितनी बदल सी गई है। बाहर से देखें तो सब कुछ आधुनिक सा हो गया है — ऊँची इमारतें, तेज इंटरनेट,चाँद-मंगल तक पहुँचने के सपने। लेकिन इंसान के अंदर की सोच? वो अब भी पुरानी जंजीरों में जकड़ी हुई है,आज भी एक इंसान की पहचान जाति-धर्म,रंग-रूप, ऊंच-नीचे से किया …

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लेख@कॉकरोच जनता पार्टी का बिगुल जंतर मंतर का आंदोलन

भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है। जिसमें जनता द्वारा चुने गए जनता के प्रतिनिधि जनता के लिए काम करते हैं। लोकतंत्र के अंतर्गत देश के प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्र रूप से अभि व्यक्ति,अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का अधिकार है। ये अधिकार और प्रणाली देश की जनता को सशक्त करती है । सुप्रीम कोर्ट के जज द्वारा की गई एक टिप्पणी …

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लेख@किधर जाएं बेचारे बूढ़े मां-बाप

हमारे शास्त्रों में माता-पिता को परमात्मा से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है। कोई जमाना था जब लोग श्री रामचंद्र जी द्वारा पिता दशरथ की आज्ञा मानकर 14 वर्ष बनवास जाने की बात कह कर गर्व महसूस किया करते थे। और वह भी क्या जमाना था जब श्रवण कुमार द्वारा अपने अंधे माता-पिता को कावड़ में बिठाकर तीर्थ स्थानों‌ …

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