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अम्बिकापुर@ निधन के बाद भी दो लोगों की जिंदगी में जगा सकते हैं रोशनी की उम्मीद

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ओमप्रकाश अग्रवाल के नेत्रदान से पेश की मानवता की मिसाल,बेटे और परिजनों की सहमति से पूरी हुई प्रक्रिया
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,26 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
अपनों को खोने के गम के बीच भी दूसरों के जीवन में उजाला लाने की पहल मानवता की मिसाल बन गई। अंबिकापुर निवासी स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल के निधन के बाद उनके पुत्र कृष्ण कुमार अग्रवाल और परिवारजनों ने नेत्रदान का निर्णय लिया। परिजनों की संवेदनशील पहल से कॉर्निया संबंधी दृष्टिहीनता से जूझ रहे जरूरतमंद लोगों के लिए नई उम्मीद जगी है। 25 अक्टूबर 2026 को रात 9.45 बजे ओमप्रकाश अग्रवाल का निधन हुआ। परिजनों की सहमति और नेत्रदान दल की तत्परता से रात करीब 11.38 बजे नेत्र ऊतक प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद ऊतकों को सिम्स, बिलासपुर पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
डॉ. अभिजीत जैन के नेतृत्व में पूरी हुई प्रक्रिया : नेत्रदान दल के टीम लीडर डॉ. अभिजीत जैन के नेतृत्व में डॉ. अभिषेक, डॉ. कंचन, नेत्र सहायक अधिकारी एवं सहायक नेत्रदान अधिकारी रमेश घृतकर ने प्रक्रिया संपन्न की। नेत्र ऊतकों को बिलासपुर पहुंचाने में जयप्रकाश विश्वकर्मा ने सहयोग किया। इस कार्य में राजमाता देवेंद्रकुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर के अधिष्ठाता डॉ. अविनाश मेश्राम, सिविल सर्जन डॉ. जे.के. रेलवानी और नोडल अधिकारी डॉ. रजत टोप्पो का भी सहयोग रहा। परिजनों, चिकित्सकों और कर्मचारियों के समन्वित प्रयास से समय पर नेत्र ऊतक प्राप्त किए जा सके।
मृत्यु के छह घंटे के भीतर सूचना देना जरूरी
नेत्रदान के लिए मृत्यु के बाद जल्द से जल्द निकटतम आई बैंक या नेत्र विभाग से संपर्क करना चाहिए। सामान्यतः मृत्यु के छह घंटे के भीतर नेत्र ऊतक प्राप्त किए जाते हैं। यदि किसी व्यक्ति ने जीवनकाल में नेत्रदान का संकल्प नहीं लिया हो, तब भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत परिजन लिखित सहमति देकर नेत्रदान करा सकते हैं। पहले से संकल्प लेने की स्थिति में भी परिवार की जानकारी और सहमति महत्वपूर्ण होती है।
उम्र या चश्मा नेत्रदान में बाधा नहीं…
वृद्ध व्यक्ति, चश्मा पहनने वाले और मोतियाबिंद से प्रभावित व्यक्ति भी संभावित नेत्रदाता हो सकते हैं। दान किए गए ऊतकों की जांच के बाद विशेषज्ञ प्रत्यारोपण के लिए उनकी उपयुक्तता तय करते हैं। नेत्रदान में आंख के पारदर्शी हिस्से कॉर्निया का उपयोग किया जाता है, जिससे कॉर्निया संबंधी दृष्टिहीनता से प्रभावित उपयुक्त मरीजों को लाभ मिल सकता है। प्रशिक्षित दल द्वारा पूरी प्रक्रिया सम्मानपूर्वक की जाती है। इससे चेहरे की सामान्य बनावट प्रभावित नहीं होती और आम तौर पर अंतिम संस्कार की परंपराओं में भी बाधा नहीं आती। नेत्रदान स्वैच्छिक है और मानव नेत्रों व ऊतकों की खरीद-बिक्री प्रतिबंधित है।
नेत्रदान दल के आने तक बरतें सावधानी…
मृत्यु के बाद नेत्रदान कराने की स्थिति में मृतक की पलकों को धीरे से बंद रखें। बंद पलकों पर साफ नम रुई या गॉज रखें, सिर को थोड़ा ऊंचा रखें और आंखों को सूखने से बचाने के लिए पंखा बंद कर दें। इसके बाद आई बैंक या चिकित्सकीय दल के निर्देशों का पालन करें। स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल के परिवार का यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायी है। नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भ्रांतियां दूर करने के लिए नागरिकों को अपने परिवार के साथ इस विषय पर चर्चा करनी चाहिए। मृत्यु के बाद लिया गया एक संवेदनशील निर्णय किसी जरूरतमंद को फिर से दुनिया देखने का अवसर दे सकता है।


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