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बैकुण्ठपुर@ कोरिया की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा कोसम : प्रभात मिश्रा

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कविता,संस्कृति और सम्मान का संगम बना कोरिया साहित्य महोत्सव,163 विभूतियां सम्मानित
कोसम के मंच पर साहित्य का सम्मान, दो दिनों में 147 कलाकार-साहित्यकार और 16 समाजसेवी सम्मानित
दिल्ली के मुरारी मंडल के काव्यपाठ ने बांधा समां,प्रभात मिश्रा ने सराही कोरिया की साहित्यिक विरासत
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,26 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
लोककला,संस्कृति,साहित्य और वैचारिक विमर्श के अनूठे संगम के रूप में पहचान बना रहा कोरिया साहित्य महोत्सव अपने चतुर्थ संस्करण के साथ एक बार फिर जिले की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देता नजर आया,झुमका ओपन थिएटर में आयोजित दो दिवसीय कोरिया साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा की गरिमामय उपस्थिति में साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ,इस दौरान साहित्यकारों,कवियों,कलाकारों,समाज सेवियों और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय लोगों को मंच से सम्मानित किया गया, आयोजकों के अनुसार,दो दिनों में कुल 147 कलाकारों एवं साहित्यकारों तथा 16 समाजसेवियों का सम्मान किया गया। दूसरे दिन के कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया,इस अवसर पर एसईसीएल बैकुण्ठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक नरेश प्रसाद,जिला पंचायत उपाध्यक्ष वंदना राजवाड़े,जिला पंचायत सदस्य गीता राजवाड़े और क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव मंच पर उपस्थित रहे,साहित्य और लोकसंस्कृति के इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों और कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को जोड़े रखा,महोत्सव के प्रथम दिन छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने चतुर्थ संस्करण का शुभारंभ किया था,दूसरे दिन राजभाषा आयोग के अध्यक्ष की सहभागिता ने आयोजन को साहित्यिक विमर्श और रचनात्मक संवाद का एक और महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
कोरिया की साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ा रहा कोसम-कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने कहा कि कोरिया जिले के पास समृद्ध साहित्यिक और वैचारिक विरासत है,यहां की धरती ने लंबे समय तक साहित्यिक सृजन को ऊर्जा प्रदान की है और इस क्षेत्र का साहित्यिक इतिहास गौरवशाली रहा है,उन्होंने कहा कि कोरिया साहित्य महोत्सव इस विरासत को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को साहित्य तथा संस्कृति से जोड़ने की दिशा में शानदार पहल है,अपने संबोधन में उन्होंने भवानीप्रसाद मिश्र,आचार्य रामचंद्र शुक्ल और विमल मित्र जैसे साहित्यकारों के कोरिया क्षेत्र से जुड़ाव और प्रेरणा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र साहित्य की सृजनात्मक परंपरा को पोषित करता रहा है,ऐसे आयोजनों से साहित्यिक गतिविधियों को नया मंच मिलता है और स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त होता है,प्रभात मिश्रा ने साहित्य की सामाजिक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन या शब्दों की अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है,यह समाज की लोकसंस्कृति में मौजूद विकृतियों को पहचानने,जनचेतना विकसित करने और लोकहित के पक्ष में विचार प्रस्तुत करने का माध्यम भी है,सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में जब भी कोई विकृति आती है,तो साहित्यकार अपनी संवेदनशील दृष्टि से उसे पहचानकर समाज के सामने रखता है, इसीलिए एक सभ्य,जागरूक और संवेदनशील समाज के निर्माण में साहित्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है,उन्होंने कोरिया साहित्य महोत्सव की विविधता की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य, लोककला और संस्कृति को एक मंच पर लाने वाले ऐसे आयोजन क्षेत्र की पहचान को मजबूत करते हैं,यह मंच स्थापित साहित्यकारों के साथ नवोदित रचनाकारों और स्थानीय कलाकारों को भी आगे बढ़ने का अवसर देता है।
कोसम का चौथा संस्करण क्षेत्र के लिए उपलब्धि-कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित एसईसीएल बैकुण्ठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक नरेश प्रसाद, जिला पंचायत उपाध्यक्ष वंदना राजवाड़े और जिला पंचायत सदस्य गीता राजवाड़े ने भी आयोजन की सराहना की,उन्होंने कोरिया साहित्य महोत्सव के चतुर्थ संस्करण को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं, अतिथियों ने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्य और संस्कृति के प्रति रुचि रखने वाले लोगों को एक साझा मंच प्रदान करते हैं,यहां स्थापित साहित्यकारों और कलाकारों की प्रस्तुतियों को देखने-सुनने के साथ नई पीढ़ी को सीखने का अवसर मिलता है,स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलने से उनमें आगे बढ़ने और अपनी कला को बेहतर बनाने की प्रेरणा पैदा होती है,कोरिया साहित्य महोत्सव की विशेषता यह रही कि इसमें साहित्यिक गतिविधियों के साथ लोककला,संगीत, कविता और सामाजिक विषयों को भी स्थान दिया गया,इस विविधता ने आयोजन को केवल साहित्यिक सम्मेलन तक सीमित न रखकर व्यापक सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप दिया।
दिल्ली के मुरारी मंडल के काव्यपाठ ने जीता श्रोताओं का दिल- महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित काव्य त्रिवेणी कार्यक्रम में दिल्ली से आए प्रख्यात रचनाकार मुरारी मंडल ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा, उनकी सहज और सरल प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा,उनकी रचनाओं के दौरान श्रोताओं की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया,मुरारी मंडल के साथ मुंगेली से आए देवेंद्र परिहार और घरघोड़ा से पहुंचे हर्षराज हर्ष ने भी काव्यपाठ किया,तीनों रचनाकारों की प्रस्तुतियों ने साहित्यप्रेमियों को कविता के अलग-अलग रंगों से परिचित कराया,देर रात तक चले काव्यपाठ में श्रोताओं की रुचि बनी रही और कवियों को भरपूर सराहना मिली,इसके पहले युवाओं के कवि सम्मेलन और सियाधेश म्यूजिक बैंड की प्रस्तुति ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया,कविता और संगीत के इस मेल ने आयोजन को विविधतापूर्ण बनाया, स्थानीय दर्शकों की भागीदारी ने यह भी दिखाया कि साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए जिले में उत्साहजनक माहौल मौजूद है।
लोककला और संस्कृति को मिला साझा मंच-कोरिया साहित्य महोत्सव का आयोजन साहित्यिक अभिव्यक्ति के साथ लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया, इसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए साहित्यकारों और कलाकारों ने सहभागिता की, सरगुजा, सूरजपुर और मनेंद्रगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे रचनाकारों ने कविता पाठ और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, आयोजन में विद्यालयीन विद्यार्थियों की भागीदारी भी रही। इससे नई पीढ़ी को साहित्य और संस्कृति से जोड़ने का अवसर मिला,वरिष्ठ रचनाकारों के अनुभव, युवाओं की प्रस्तुतियां और विभिन्न विधाओं के कलाकारों की सहभागिता ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप दिया,संस्कृति विभाग, स्काईहाइट्स, साईनाथ फाउंडेशन और एसईसीएल के विशेष सहयोग से टीम अभिव्यक्ति द्वारा आयोजित इस महोत्सव ने स्थानीय और बाहरी प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया,चार संस्करण पूरे कर चुका यह आयोजन क्षेत्र में साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में सामने आया है।
साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति-कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डीके उपाध्याय,रमेश गुप्ता,सुंदरलाल तिवारी,सूरजपुर से डॉ. ओंकार साहू,बैकुण्ठपुर तहसीलदार प्रांजल मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता,राजेश तिवारी, शैलेश तिवारी,सिद्धार्थ खैरवार,चंद्रा चर्चित,राजेंद्र सोनी, योगेंद्र मिश्रा,शैलेश शिवहरे,भानू पाल,अमित श्रीवास्तव और अनूप बड़ेरिया सहित अनेक साहित्यकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, रायपुर से आशीष राज सिंघानिया, हर्षराज हर्ष, सुनील शर्मा,आयुष नामदेव,तारा पाण्डे, अलीशा शेख, योगेश गुप्ता,हरिकांत अग्निहोत्री, विनय तिवारी और मिराज अली सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए रचनाकारों ने भी सहभागिता की,आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय कलाकार,साहित्यप्रेमी और संस्कृति से जुड़े लोग मौजूद रहे,पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन सुनील शर्मा ने किया,जबकि अंत में रुद्र मिश्रा ने उपस्थित अतिथियों,साहित्यकारों, कलाकारों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
नई पीढ़ी तक पहुंचे साहित्य और संस्कृति का संदेश-कोरिया साहित्य महोत्सव का चतुर्थ संस्करण साहित्यिक विरासत,वैचारिक संवाद, कविता,संगीत और सामाजिक सम्मान के विविध पहलुओं को एक मंच पर लेकर आया,राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने कोरिया की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया,वहीं अन्य वक्ताओं ने समाज निर्माण और राष्ट्रहित में साहित्य की भूमिका को रेखांकित किया,दो दिनों में 147 कलाकारों एवं साहित्यकारों और 16 समाजसेवियों का सम्मान,विभिन्न जिलों से आए रचनाकारों की सहभागिता तथा देर रात तक चले काव्यपाठ ने आयोजन को व्यापक पहचान दी, महोत्सव ने स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और साहित्य-संस्कृति के प्रति नई पीढ़ी की रुचि बढ़ाने का संदेश दिया।
विचारों से तय होती है समाज के विकास की दिशा…
महोत्सव में शामिल वरिष्ठ विचारक नागेन्द्र वशिष्ठ ने भी साहित्यप्रेमियों और कलाकारों को संबोधित किया, देश के विभिन्न राज्यों में भ्रमण कर वैचारिक संवाद के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने वाले वशिष्ठ ने राष्ट्र निर्माण में साहित्य और कला की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया,उन्होंने रचनाकारों से आह्वान किया कि वे अपनी रचनाधर्मिता में राष्ट्रहित और सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता दें,उनके अनुसार,साहित्य समाज को सोचने, समझने और अपने आसपास की परिस्थितियों का मूल्यांकन करने की दृष्टि प्रदान करता है,समाज के गठन और उसके सर्वांगीण विकास में विचारों की भूमिका अहम होती है,इसलिए साहित्यकारों और कलाकारों को अपनी रचनाओं के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक चेतना के विस्तार का प्रयास करना चाहिए,उनके संबोधन ने आयोजन में मौजूद साहित्यप्रेमियों के सामने साहित्य की सामाजिक जिम्मेदारी और रचनात्मक अभिव्यक्ति के उद्देश्य पर विचार करने का अवसर प्रस्तुत किया।
147 कलाकारों और साहित्यकारों का सम्मान, 16 समाजसेवी भी हुए सम्मानित
कोरिया साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन विद्यालयीन बच्चों और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले कलाकारों ने विभिन्न प्रस्तुतियां दीं,कार्यक्रम के दौरान राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने विशिष्ट अतिथियों और संस्था के संरक्षक नरेश सोनी की उपस्थिति में कोरिया के 38 नवोदित रचनाकारों तथा विभिन्न जिलों से आए 41 कलाकारों को मंच से सम्मानित किया,इसके अतिरिक्त क्षेत्र में सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ पत्रकारों,श्रमिक नेताओं और समाजसेवियों को भी सम्मान प्रदान किया गया,आयोजकों के अनुसार, दो दिवसीय महोत्सव में कुल 147 कलाकारों एवं साहित्यकारों और 16 समाजसेवियों का सम्मान किया गया,यह सम्मान समारोह आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा,साहित्य और कला के क्षेत्र में काम करने वालों के साथ समाज के अन्य वर्गों में सक्रिय योगदान देने वाले लोगों को मंच पर स्थान देकर आयोजन ने रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक सहभागिता के महत्व को रेखांकित किया, सम्मान समारोह का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों के योगदान को पहचान देना और उन्हें आगे भी अपने कार्यों के प्रति प्रेरित करना रहा, ऐसे मंच स्थानीय प्रतिभाओं को सार्वजनिक पहचान देने के साथ उन्हें प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों से आए साहित्यकारों और कलाकारों के संपर्क में आने का अवसर भी प्रदान करते हैं।


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