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कोरबा@बंद पत्थर खदान में फ्लाई ऐश डंपिंग बंद कराने की मांग,विधायक तुलेश्वर मरकाम ने पर्यावरण मंडल को लिखा पत्र

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कोरबा,14 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बंद पत्थर खदान में फ्लाई ऐश (राख) की डंपिंग को लेकर विवाद गहरा गया है। कटघोरा क्षेत्र के विधायक तुलेश्वर मरकाम ने ग्राम कोनकोना स्थित बंद साधारण पत्थर खदान में बालको ताप विद्युत संयंत्रों द्वारा की जा रही फ्लाई ऐश की डंपिंग पर आपत्ति जताई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय कोरबा के अधिकारी को पत्र लिखकर राख भराव तत्काल बंद कराने और 20 मार्च 2026 को दी गई अनुमति निरस्त करने की मांग की है। विधायक ने आशंका जताई है कि खदान में फ्लाई ऐश भरने से तान नदी और भूजल प्रदूषित हो सकता है। उन्होंने जलाशय में पहले से भरी राख को हटवाने, पानी निकालने की प्रक्रिया रोकने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग भी की है। विधायक तुलेश्वर मरकाम ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि कोनकोना की बंद पत्थर खदान के गड्ढे हसदेव नदी की सहायक तान नदी से लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित है। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के 28 अगस्त 2019 के कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि बंद खदानों में फ्लाई ऐश के निपटान के दौरान नदी और जल स्रोतों से कम से कम 500 मीटर की सुरक्षित दूरी रखने का प्रावधान है। उनका कहना है कि यदि खदान और नदी के बीच की दूरी लगभग 150 मीटर है,तो यहां राख भराव की अनुमति दिए जाने पर पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन की जांच आवश्यक है। विधायक ने इस संबंध में गूगल अर्थ के मानचित्र और जीपीएस टैग तस्वीरों का भी उल्लेख किया है। पत्र के मुताबिक, वर्ष 2016-17 में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए ग्राम कोनकोना में पत्थर खनन की अनुमति दी गई थी। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद खदान बंद हो गई और वहां दो गड्ढे रह गए। विधायक का दावा है कि खनन एवं पर्यावरणीय योजनाओं में इन गड्ढों को जलाशय के रूप में विकसित करने का प्रावधान था। उन्होंने बताया कि मई-जून 2025 में बालको ताप विद्युत संयंत्रों को इन गड्ढों में फ्लाई ऐश डालने की अनुमति दी गई थी। बाद में शिकायतों के बाद अनुमतियां निरस्त कर दी गईं।
इसके बावजूद 20 मार्च 2026 को दोबारा अनुमति दिए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं। विधायक ने पूछा है कि जब पहले की अनुमतियां निरस्त हो चुकी थी और खदान तथा नदी की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ तो दोबारा अनुमति किन आधारों पर दी गई।
नदी को नाला बताने वाले निरीक्षण प्रतिवेदनों पर भी आपत्ति
विधायक तुलेश्वर मरकाम ने अपने पत्र में अलग-अलग विभागों के निरीक्षण प्रतिवेदनों में विरोधाभास होने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, वर्ष 2016 के राजस्व एवं वन विभाग के प्रतिवेदनों में नदी को स्थल के पास बहता हुआ दर्शाया गया था, जबकि बाद के कुछ प्रतिवेदनों में उसी जलधारा को ड्रेन या नाला बताया गया। विधायक ने इस अंतर की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि तान नदी की वास्तविक स्थिति और खदान से उसकी दूरी निर्धारित करने के लिए राजस्व, वन, खनिज विभाग तथा पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों से संयुक्त स्थल निरीक्षण कराया जाना चाहिए।
भूजल और जनस्वास्थ्य पर खतरे की आशंका
विधायक ने फ्लाई ऐश में मौजूद भारी धातुओं के रिसाव को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि राख से निकलने वाले हानिकारक तत्व मिट्टी और पानी में मिल सकते हैं, जिससे नदी, भूजल, कृषि और जैव विविधता पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 21, जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण को संबंधित विभाग की जिम्मेदारी बताया है।


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