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लेख@ प्राकृतिक संसाधन की सुरक्षा हमारी नैतिक जिम्मेदारी

धरा में नदियों को स्वर्ग के समान आनंद प्रदाता समझा जाता है,और वास्तव में प्रकृति ने पूरे जैव समुदाय को एक अनुपम उपहार नदी भेंट किया है। नदी की पवित्र बहती कल-कल जल धारा धरती की सुंदरता पर चार चांद लगाता है। जहां जहां से होकर नदी गुजरती है उस स्थान को हर दृष्टि कोण से समृद्ध करती है,और वहां …

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लेख@ जल संकट पर सोचने का वक्त

विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के अनुसार,वर्ष 2025 से 2027 के बीच जल आपूर्ति की कमी भारत के लिए सबसे गंभीर जोखिम के रूप में उभर सकती है। इससे पहले नीति आयोग ने चेतावनी दी थी कि देश की लगभग 60 करोड़ आबादी उच्च जल तनाव का सामना कर रही है। वास्तव में भारत गंभीर जल संकट की ओर बढ़ …

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लेख@ रंगमंच पर जाति का खेल:कितना जायज़?

कला का काम समाज को जागरूक करना है, उसकी विविधताओं को सम्मान देना है,और उस आईने की तरह बनना है जिसमें हर वर्ग खुद को देख सके। लेकिन जब कला सिर्फ कुछ खास वर्गों या समूहों की महिमा गाने लगे, और बाकी समाज की पीड़ा, संघर्ष और उपस्थिति को नज़रअंदाज़ कर दे, तो वह कला नहीं रहती — वह प्रचार …

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