
- जामा मस्जिद चुनाव निरस्त…अब नए सिरे से होगा चुनाव…वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कलेक्टर-एसडीएम को दिया निर्देश
- विवादों के बीच जामा मस्जिद चुनाव पर लगा ब्रेक,नई चुनाव समिति करेगी प्रक्रिया तय,इश्तियाक अहमद संभालेंगे अंतरिम जिम्मेदारी
- नए सिरे से बनेगी चुनाव समिति, 1 लाख तक खर्च कर सकेंगे कार्यवाहक सदर इश्तियाक अहमद
- आपत्तियों के बाद जामा मस्जिद चुनाव निरस्त,वक्फ बोर्ड का फैसला,निष्पक्ष चुनाव के लिए नई समिति का होगा गठन
- चुनाव रद्द,अब नई समिति और नई चुनाव प्रक्रिया,जामा मस्जिद की अंतरिम कमान इश्तियाक अहमद के हाथ,1 लाख से अधिक खर्च पर बोर्ड की अनुमति जरूरी
- दैनिक घटती-घटना का बड़ा असर… जामा मस्जिद चुनाव प्रक्रिया निरस्त
- वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने माना प्रक्रिया पर उठे सवाल,नए सिरे से चुनाव कराने के निर्देश
-शमरोज खान-
सूरजपुर,16 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। शहर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के मुतवल्ली/सदर पद को लेकर चल रही चुनावी प्रक्रिया पर आखिरकार विराम लग गया है, चुनाव को लेकर लगातार सामने आ रही आपत्तियों और प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों के बीच छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ.सलीम राज सूरजपुर पहुंचे और वर्तमान चुनाव प्रक्रिया को निरस्त कर दिया, उन्होंने स्पष्ट किया कि अब चुनाव नए सिरे से कराया जाएगा और इसके लिए नई चुनाव समिति गठित की जाएगी।
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कलेक्टर एवं एसडीएम को नए सिरे से चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं,नई चुनाव समिति ही चुनाव की पूरी रूपरेखा तैयार करेगी और उसी के आधार पर मतदाता सूची,सदस्यता,नामांकन,आपत्ति, स्क्रूटनी,प्रचार,मतदान एवं परिणाम की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी,इस पूरे घटनाक्रम के बाद जामा मस्जिद चुनाव को लेकर चल रहा विवाद एक नए चरण में पहुंच गया है। अब सवाल यह नहीं रह गया कि पुरानी प्रक्रिया के तहत चुनाव कब होगा,बल्कि मुख्य सवाल यह है कि नई चुनाव समिति कौन होगी,मतदाता सूची कैसे तैयार होगी और निष्पक्ष चुनाव के लिए क्या नए नियम लागू किए जाएंगे।
जामा मस्जिद चुनाव तक इश्तियाक अहमद संभालेंगे कार्यवाहक सदर की जिम्मेदारी-शहर की पुरानी एवं प्रमुख जामा मस्जिद के चुनाव को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब अंतरिम व्यवस्था भी स्पष्ट हो गई है, वर्तमान चुनाव प्रक्रिया निरस्त किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया है कि जब तक जामा मस्जिद में नए सिरे से चुनाव संपन्न नहीं हो जाता,तब तक इश्तियाक अहमद कार्यवाहक सदर के रूप में मस्जिद की जिम्मेदारी संभालेंगे,वक्फ बोर्ड की ओर से तय इस व्यवस्था के तहत इश्तियाक अहमद चुनाव होने तक जामा मस्जिद की नियमित व्यवस्थाओं और आवश्यक संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे,उन्हें 1 लाख तक खर्च करने का अधिकार रहेगा,वहीं,इस निर्धारित सीमा से अधिक राशि खर्च करने की स्थिति में वक्फ बोर्ड से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा,जामा मस्जिद चुनाव की प्रक्रिया को लेकर मतदाता सूची,चुनाव समिति और निष्पक्षता जैसे मुद्दों पर उठी आपत्तियों के बीच कार्य वाहक सदर की जिम्मेदारी स्पष्ट किए जाने को अंतरिम व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
चुनाव निरस्त होने के बाद सामने आई अंतरिम व्यवस्था-जामा मस्जिद के सदर/मुतवल्ली चुनाव को लेकर पहले से निर्धारित प्रक्रिया पर अलग-अलग स्तर पर आपत्तियां सामने आई थीं। मतदाता सूची, चुनाव समिति की भूमिका और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए गए थे,विवाद बढ़ने के बाद वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने सूरजपुर पहुंचकर मामले की जानकारी ली और वर्तमान चुनाव प्रक्रिया को निरस्त करने का निर्णय लिया,इसके साथ ही अब चुनाव नए सिरे से कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी,नई चुनाव समिति गठित होगी और वही आगे की चुनावी रूपरेखा तय करेगी,लेकिन जब तक नई प्रक्रिया पूरी होकर निर्वाचित सदर की नियुक्ति नहीं हो जाती,तब तक मस्जिद की रोजमर्रा की व्यवस्था प्रभावित न हो,इसके लिए कार्यवाहक व्यवस्था लागू की गई है।
दैनिक घटती-घटना ने उठाए थे चुनाव प्रक्रिया पर सवाल-जामा मस्जिद चुनाव को लेकर दैनिक घटती-घटना ने चुनाव प्रक्रिया में सामने आ रही आपत्तियों और चुनाव समिति की भूमिका से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया था, रिपोर्ट में मतदाता सूची, सदस्यता,चुनाव समिति की निष्पक्षता और कथित विवादों को लेकर सवाल सामने रखे गए थे,इसी दौरान चुनाव समिति से संबंधित बताए जा रहे एक कथित ऑडियो को लेकर भी चर्चा तेज हुई थी,हालांकि किसी कथित ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी और उस आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाना उचित नहीं है,लेकिन इन विवादों ने चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए थे, अब वक्फ बोर्ड द्वारा चुनाव प्रक्रिया निरस्त किए जाने के बाद पूरे मामले में नई प्रक्रिया शुरू होगी।
पुराना चुनाव कार्यक्रम अब प्रभावी नहीं-जामा मस्जिद चुनाव के लिए पहले जारी समय-सारणी के अनुसार मतदान 10 अक्टूबर 2026 को कराया जाना प्रस्तावित था, उससे पहले दावा-आपत्ति,नामांकन, स्क्रूटनी और प्रचार की तिथियां भी निर्धारित की गई थीं, लेकिन वर्तमान चुनाव प्रक्रिया निरस्त किए जाने के बाद पुराना चुनाव कार्यक्रम प्रभावी नहीं रहेगा,अब नई चुनाव समिति के गठन के बाद नई समय-सारणी जारी होने की संभावना है, इसका अर्थ यह है कि पहले की मतदाता सूची, नामांकन प्रक्रिया और चुनाव कार्यक्रम को लेकर भी नई समिति को स्पष्ट निर्णय लेना होगा।
नई चुनाव समिति तय करेगी पूरी चुनावी रूपरेखा-वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने स्पष्ट किया है कि आगामी चुनाव के लिए नई चुनाव समिति गठित की जाएगी। यही समिति चुनाव की रूपरेखा तैयार करेगी, नई समिति के सामने सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पात्र मतदाताओं की पहचान और मतदाता सूची को लेकर स्पष्टता स्थापित करना होगा, इसके साथ ही सदस्यता की पात्रता, मतदाता सूची तैयार करने का आधार,नामांकन की शर्तें,प्रत्याशियों की पात्रता,दावा-आपत्ति की प्रक्रिया,स्क्रूटनी,मतदान की व्यवस्था,मतगणना और परिणाम घोषणा जैसे विषयों को स्पष्ट नियमों के साथ तय करना होगा।
जामा मस्जिद के सदस्यों को लेकर भी होगा स्पष्ट नियम-सूरजपुर में अलग-अलग क्षेत्रों में मस्जिदें हैं और स्थानीय लोगों के अनुसार प्रत्येक मस्जिद से जुड़े सदस्यों की अपनी व्यवस्था है,जामा मस्जिद शहर की प्रमुख एवं पुरानी मस्जिद होने के कारण यहां सदस्यता और सहभागिता का दायरा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है,वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने संकेत दिया है कि जामा मस्जिद में व्यापक सहभागिता रहेगी, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में कौन व्यक्ति मतदाता होगा और कौन प्रत्याशी बन सकेगा, इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएंगे, यही विषय पिछले चुनाव विवाद में भी महत्वपूर्ण रहा था,नई चुनाव समिति को इस विषय पर स्पष्टता लानी होगी ताकि चुनाव के दौरान किसी व्यक्ति की सदस्यता अथवा मतदान के अधिकार को लेकर विवाद न हो।
मुख्य मस्जिद है,इसलिए सहभागिता रहेगी-वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज के अनुसार जामा मस्जिद शहर की मुख्य मस्जिद है। इसलिए इसमें व्यापक स्तर पर सहभागिता की बात कही गई है,हालांकि इसका अर्थ यह नहीं होगा कि बिना निर्धारित पात्रता के कोई भी व्यक्ति मतदान अथवा चुनाव लड़ सकेगा। पात्रता और सदस्यता के नियम नई चुनाव समिति द्वारा तय किए जाएंगे और उसी के अनुसार चुनाव कराया जाएगा,यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि पिछले चुनाव को लेकर कुछ लोगों ने दूसरे क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों के हस्तक्षेप का आरोप लगाया था।
चुनाव समिति निष्पक्ष होगी…बोर्ड अध्यक्ष-वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि नई चुनाव समिति को निष्पक्ष रखा जाएगा,उनके अनुसार चुनाव समिति का उद्देश्य किसी पक्ष विशेष को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराना होगा, समिति को इस तरह गठित किए जाने की बात कही गई है जिससे किसी भी पक्ष को यह शिकायत न रहे कि चुनाव प्रक्रिया में भेदभाव किया गया है,नई समिति द्वारा तैयार की जाने वाली रूपरेखा ही आगे के चुनाव की आधारशिला होगी।
चुनाव तक वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारी का सवाल हुआ स्पष्ट- कार्यवाहक सदर के रूप में इश्तियाक अहमद की जिम्मेदारी तय किए जाने से अब चुनाव तक जामा मस्जिद के प्रशासनिक संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है,एक ओर कार्यवाहक सदर नियमित व्यवस्था संभालेंगे, वहीं दूसरी ओर बड़े वित्तीय निर्णयों पर वक्फ बोर्ड की अनुमति आवश्यक रहेगी,इससे चुनाव के बीच मस्जिद की व्यवस्था चलाने और बड़े खर्चों पर निगरानी रखने के लिए एक अंतरिम ढांचा तैयार हो गया है।
विवाद के बीच अब भरोसा कायम करना होगी नई समिति की चुनौती-जामा मस्जिद चुनाव को लेकर सामने आए विवाद के बाद अब नई चुनाव समिति के सामने केवल चुनाव कराने की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों का विश्वास कायम करना भी महत्वपूर्ण होगा, मतदाता सूची और सदस्यता को लेकर स्पष्ट नियम,सभी पात्र सदस्यों को समान अवसर तथा चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता इस पूरे चुनाव की अहम कड़ी होगी,वहीं,कार्यवाहक सदर की वित्तीय सीमा तय होने के बाद चुनाव तक होने वाले बड़े खर्चों पर वक्फ बोर्ड की निगरानी बनी रहेगी।
अब जामा मस्जिद में नई व्यवस्था के साथ नए चुनाव का इंतजार-वर्तमान चुनाव प्रक्रिया निरस्त होने के बाद अब जामा मस्जिद का चुनाव नए सिरे से होगा,इश्तियाक अहमद तब तक कार्यवाहक सदर की जिम्मेदारी संभालेंगे, जब तक नई चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो जातीवहीं ?1 लाख तक के खर्च की अनुमति और इससे अधिक खर्च के लिए वक्फ बोर्ड की पूर्व स्वीकृति की व्यवस्था के बीच अब अगली बड़ी कार्रवाई नई चुनाव समिति के गठन की होगी, पुराना चुनाव निरस्त, कार्यवाहक सदर की जिम्मेदारी तय—अब नई समिति, नई रूपरेखा और नए चुनाव पर टिकी सूरजपुर की नजर।
अब निगाहें वक्फ बोर्ड और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर-वर्तमान चुनाव प्रक्रिया निरस्त किए जाने के बाद अब अगला चरण नई चुनाव समिति के गठन का होगा, इसके बाद समिति चुनाव की नई रूपरेखा तैयार करेगी और उसी के आधार पर नई समय-सारणी जारी की जाएगी,कलेक्टर एवं एसडीएम को नए सिरे से चुनाव कराने के निर्देश दिए जाने के बाद प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है, पुरानी प्रक्रिया पर लगा विराम, अब नई समिति और नए नियमों के साथ जामा मस्जिद के सदर का चुनाव होगा, एक लाख रुपये तक कार्यवाहक सदर के खर्च अधिकार और उससे अधिक राशि के लिए वक्फ बोर्ड की अनुमति की व्यवस्था के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई चुनाव समिति कितनी पारदर्शी होगी और नई चुनाव प्रक्रिया पर सभी पक्ष कितना भरोसा कर पाएंगे।
इश्तियाक अहमद को मिली अंतरिम जिम्मेदारी
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के अनुसार इश्तियाक अहमद नए चुनाव होने तक कार्यवाहक सदर के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे,इस दौरान उनका दायित्व जामा मस्जिद की नियमित व्यवस्था और आवश्यक कार्यों को संचालित करना होगा,चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचित पदाधिकारी जिम्मेदारी संभालेंगे,इस अंतरिम व्यवस्था से यह भी स्पष्ट हो गया है कि चुनाव तक जामा मस्जिद के संचालन में प्रशासनिक शून्यता की स्थिति नहीं रहेगी।
आपत्तियों के बीच बोर्ड अध्यक्ष का सूरजपुर दौरा
जामा मस्जिद चुनाव को लेकर पिछले कई सप्ताह से विवाद की स्थिति बनी हुई थी, चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची,सदस्यता,चुनाव समिति की भूमिका और कुछ प्रत्याशियों को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं,कुछ सदस्यों ने चुनाव समिति के सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए वक्फ बोर्ड के समक्ष शिकायत की थी,शिकायत में चुनाव समिति के कुछ सदस्यों को हटाकर नई एवं निष्पक्ष समिति गठित करने की मांग की गई थी,मामला लगातार चर्चा में आने के बाद वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज सूरजपुर पहुंचे,उन्होंने संबंधित पक्षों से चर्चा की और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विषयों की जानकारी ली, इसके बाद वर्तमान चुनाव प्रक्रिया को ही निरस्त करने का निर्णय लिया गया।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur