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लेख@ वाल्मीकि कृत,राम दर्शन का जीवंतमान

आश्विन माह में शरद पूर्णिमा के दिन महर्षि वाल्मीकि प्रगट हुए। वाल्मीकि वैदिक काल के महान गुरु, यथार्थवादी और चतुर्दशी ऋषि हैं। महर्षि वाल्मीकि को कई भाषाओं का ज्ञान था। संसार का पहला महाग्रंथ श्री रामायण रचकर आदि कवि होने का गौरव पाया। वाल्मीकि ने कठोर तप के पश्चात महर्षि की उपाधि प्राप्त की। उनके द्वारा रचित रामायण को पढ़ें …

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लेख@ सप्त सुवासित धाराएँ सहेजे नदी बहने लगी है…

नदियाँ जीवन का आधार हैं। सुखद शुभ स्रोत हैं, जीवन का उत्स हैं। नदियों के निकट ही मानव सभ्यता जन्मी, पल्लवित पुष्पित हो विकसित हुई। बस्तियां बसीं। नदियों ने ही प्राणिमात्र में जीवन का संचार किया। कहीं हरित कानन विकसित हुए तो कहीं सुरभित सुमनों के महकते उपवन मुसकाए। पशु-पक्षियों ने नदी नीर से जीवन रस लिया। नदी की जलधार …

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बाल कहानी@ मन्नत के पौधे

शिशिर नदी के किनारे बैठा था। आज उसका मन हमेशा की तरह बहुत विचलित था। थोड़ी देर बाद उसे एक संत नदी की ओर आते हुए दिखाई दिया। वे शिशिर के पास आ कर बैठे।शिशिर संत को बड़ी अचरज भरी निगाहों से देखने लगा। संत समझ गए कि यह बालक कुछ परेशान है।संत ने शिशिर से पूछा- बालक ! तुम …

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