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कविता @ आओ इनसे सीखें…

पहले शिक्षक हैं हमारे मात पिताजिन्होंने अच्छे हमें संस्कार सिखाए।दूसरी शिक्षक है यह दुनिया सारीजो रोज़ हमें कुछ नया सिखाए।क्या कहना है गुलाब के फूलों काजो कांटों में रहकर भी सदा मुस्काए।छोटी सी कीड़ी है हमारी बड़ी शिक्षकजो रात दिन कुछ ना कुछ करती जाए।क्या कहना है इस छोटी सी मधुमक्खीका जो हमें मीठा मीठा शहद खिलाए।कमाल है इस ऊंचे …

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लेख @ स्ति्रयों की अस्मिता के प्रति पुरुष समाज का नैतिक स्खलन

किसी भी राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं का महत्व इसलिए भी सर्वोपरि है कि महिलाएं बच्चों को जन्म देकर उनका पालन पोषण करते हुए उनमें संस्कार एवं सद्गुणों का सर्वोत्तम विकास करती हैं,और राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी को सुनिश्चित करती है। जिससे ाष्ट्र निर्माण और विकास निर्बाध गति से होता रहे और वही पुरुष समाज स्ति्रयों का अनादर कर …

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लेख@ कायनात के संकेत और मेरा विश्वास

सुनो दिकु,तुमसे कोई बात नहीं हुई, न कोई खबर आई है, न ही किसी ने कुछ बताया, पर फिर भी मेरे दिल के किसी कोने में एक अजीब-सा यकीन घर कर गया है कि तुम लौटने वाली हो। मुझे लगता है, जैसे कायनात मुझे संकेत दे रही है, जैसे हर तरफ से मुझे यह आवाज़ सुनाई दे रही है कि …

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