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कविता@ ठंडी की धूप

मास है शरद ऋतु, सिहराती ठंडी हैरोम-रोम सिहरन,तन को कँपाती है।धूप है सुनहरी ये,मन को लुभाती हैठंड की है धूप,तन-मन को भाती है।धूप है सलौनी और बड़ी मस्तानी हैबाग में बहार आई लगती सुहानी है।फूल हैं खिलते अब कली मुस्काई हैठंड की धूप में रौनकता भर आई है।शीतल सुगन्ध ठंडी हवा चली आई हैतरु-तृण धरा सभी ओस से नहाई है।मोतियों …

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लेख@ दिशाहीन रूढि़वादिता और अंधविश्वास की डगर हेतु वैज्ञानिक शिक्षा ज्ञान का नवीन स्वरूप

भारतीय समाज एक बहुभाषी, बहु सांस्कृतिक,बहुजातीय,बहु धार्मिक समाज है। एक नजर में इसकी प्रगाढ़ता और इसके विराट स्वरूप को समझना अत्यंत कठिन है। भारतीय समाज की गहरी और विशाल संरचना को, उसके विभिन्न आयामों को समझना हमारे लिए अत्यंत आवश्यक भी है और अनिवार्य भी। हमारा समाज एक विशिष्ट और उत्कृष्ट समाज है, जो अनेक संस्कृतियों,रीति-रिवाजों, धार्मिक विश्वासों और जीवन …

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लेख@ अपराधियों का महिमामंडन एक चिंताजनक प्रवृत्ति

जब अपराध को ग्लैमराइज़ किया जाता है, तो यह एक मिसाल क¸ायम करता है जहाँ युवा अवैध गतिविधियों को सफलता और मान्यता के मार्ग के रूप में देखते हैं, जिससे सामाजिक नैतिकता प्रभावित होती है। ऐसी फç¸ल्में जो अपराधियों को प्रसिद्धि या विलासिता प्राप्त करते हुए दिखाती हैं, युवाओं को अपराध को एक व्यवहार्य जीवन शैली के रूप में देखने …

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