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लेख @ शरद पूर्णिमा की रात है अमृत की बरसात

शरद पूर्णिमा आश्विन शुक्ल की पूर्णिमा को ही मनाया जाता है।इस दिन चन्द्रमा का स्वरूप बहुत ही अद्भुत और सौंदर्य से युक्त सोलह कलाओं से दैदीप्यमान होता है।चन्द्रमा की दूधिया आभा पूरी प्रकृति जल-थल-नभ को प्रकाशवान कर देती है।सारा कण-कण और जड़,चैतन्य सा जान पड़ता है।धरती में एक नई ऊर्जा,चेतना,उत्साह,उमंग,और उल्लास छा जाता है।पूरी धरती जीवंत हो जाती है।ऐसे पावन …

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लघुकथा@ समझाइश

इतने दिनों से मैं तुम्हें समझा रही थी; बात समझ नहीं आ रही थी ? मेरे तन को खोखला तो कर डाला। मैंने तुम्हारे लिए कितना कष्ट सहा ! दुःख सहा ! कितनी पीड़ा हुई है मुझे ! मैं ही जानता हूँ।लेकिन आपने मुझे कभी क्यों नहीं दुत्कारा ? क्यों नहीं भगाया मुझे ? मेरे प्रति स्नेह व अपनतत्व क्यों …

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लेख@ मानवता के निरंतर विकास में सत्य की आधारभूत भूमिका

मानव सभ्यता का सतत विकास उसकी अदम्य जिज्ञासा, उत्कट उत्साह, जिजीविषा, निरंतर उन्नति की भूख और आशावादिता का प्रतिफल है। सभ्यता और संस्कृति की सुविधा के विभिन्न सोपानो में समय-समय पर नवीन मूल्यों की स्थापना और पुराने मूल्यों का विस्थापन एक सास्वत सत्य की तरह है। परिवर्तन और प्रगति प्रकृति का आधारभूत नियम है। विकास में धन की आवश्यकता अवश्य …

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