बिलासपुर,24 जून 2026। शिक्षक एलबी संवर्ग की पेंशन पात्रता से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकार द्वारा दायर रिट अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के उस आदेश को यथावत रखा, जिसमें शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना के मुद्दे पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले को राज्य के हजारों एलबी शिक्षकों के लिए अहम माना जा रहा है।
डिवीजन बेंच ने खारिज की सरकार की अपील : चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार की रिट अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सिंगल बेंच द्वारा दिए गए निर्देश न्यायिक दायरे के भीतर थे और उनमें किसी प्रकार का न्यायिक अतिक्रमण नहीं था।
क्या है पूरा मामला? मामले में याचिकाकर्ता सहित अन्य शिक्षकों ने मांग की थी कि पेंशन पात्रता निर्धारित करते समय उनकी शिक्षाकर्मी के रूप में दी गई पूर्व सेवा को भी गणना में शामिल किया जाए। शिक्षकों का तर्क था कि उन्होंने वर्षों तक शिक्षाकर्मी के रूप में कार्य किया और बाद में उन्हें नियमित शासकीय सेवा में समाहित किया गया। वर्तमान व्यवस्था में सरकार शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना केवल 1 जुलाई 2018 से कर रही है, जब उन्हें नियमित शासकीय सेवा में शामिल किया गया था। जबकि पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की शासकीय सेवा आवश्यक है। इस वजह से कई शिक्षक अपनी लंबी सेवा के बावजूद पेंशन पात्रता से वंचित हो रहे हैं।
हाईकोर्ट ने क्या कहा? अदालत ने स्पष्ट किया कि सिंगल बेंच ने सरकार को कोई नई नीति लागू करने का निर्देश नहीं दिया था। आदेश में केवल इस विषय पर पुनर्विचार करने और उचित निर्णय लेने की बात कही गई थी। डिवीजन बेंच के अनुसार यह निर्देश पूरी तरह न्यायिक अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा केवल कुछ शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के बड़े कर्मचारी वर्ग को प्रभावित करता है। इस विषय को लेकर लगातार विवाद और मुकदमे सामने आ रहे हैं। ऐसे में सरकार को एक स्पष्ट, तर्कसंगत और पारदर्शी नीति बनानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे विवादों की पुनरावृत्ति न हो।
बड़ी संख्या में शिक्षकों को मिल सकता है लाभ : अदालत के फैसले के बाद अब सरकार के स्तर पर पेंशन पात्रता और सेवा अवधि की गणना को लेकर नए सिरे से विचार किए जाने की संभावना बढ़ गई है। यदि इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो राज्य के बड़ी संख्या में शिक्षक इससे लाभान्वित हो सकते हैं।
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