मुंबई,24 जून 2026। लोकसभा सांसदों की बगावत के झटके से उबर रही शिवसेना (उद्धव) को एक और बड़ा झटका लगने जा रहा है। सांसदों की संख्या में कमी के बाद अब संसद भवन परिसर में पार्टी को मिले कार्यालय पर खतरा मंडरा रहा है। बागी सांसदों के औपचारिक विलय के बाद शिवसेना (उद्धव) के पास सिर्फ 4 सांसद ही बचेंगे। ऐसे में अब संसद भवन परिसर में पार्टी के कार्यालय के आवंटन पर संकट मंडराने लगा है। संसदीय नियमों के तहत, संसद भवन परिसर के भीतर अलग कार्यालय आमतौर पर केवल 5 या इससे ज्यादा सांसदों वाली पार्टियों को ही आवंटित किया जाता है। उद्धव की शिवसेना के पास अब 4 ही सांसद रह जाएंगे, ऐसे में आशंका है कि उसे आवंटित किया गया कार्यालय वापस लिया जा सकता है। पार्टी के संसदीय दल का कार्यालय फिलहाल पुराने संसद भवन भवन के संविधान सदन के कमरा नंबर 128ए से संचालित होता है। सांसदों की बगावत के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उद्धव की शिवसेना को बैठक के लिए बुलाया है। ठाकरे गुट का कहना है कि बागी सांसदों को अलग गुट के तौर पर मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। दोनों नेता स्पीकर से अनुरोध करेंगे कि पार्टी की आधिकारिक पहचान और अधिकार उद्धव गुट के पास ही रहें।
22 जून को शिवसेना (उद्धव) के 6 सांसद- संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमप्रकाश निंबालकर, संजय पाटिल, संजय देशमुख और नागेश पाटिल अष्टीकर औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे। उद्धव के लिए पार्टी पर नियंत्रण को लेकर ये बड़ा झटका था, क्योंकि 2022 में शिंदे ने विधायकों को तोड़कर अलग गुट बना लिया था। अब आधे से ज्यादा सांसद भी उद्धव के हाथ से निकल गए हैं। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र के गद्दारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लिखा कि उनकी हिम्मत अभी भी बुलंद है और महाराष्ट्र की राजनीति में यह संघर्ष आगे भी चलता रहेगा। वहीं, शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हास्के ने कहा कि उद्धव गुट के पतन के लिए राउत जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि राउत की कार्यशैली से नाराज हैं और सहयोग नहीं मिलने के कारण कई नेता नया रास्ता चुन रहे हैं।
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