- सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त,जिम्मेदार मौन और सवालों के घेरे में पूरा तंत्र…
- फरवरी में 15 बालक भागे थे,जून में 11 फिर फरार,आखिर कब जागेगा बाल संरक्षण विभाग?
- जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद…फिर भी मीडिया के सामने बयान देने भेज दिया गया हाउस फादर
- 31 अपचारी बालकों में से 11 खिड़की तोड़कर फरार…पूरे परिसर में सीसीटीवी व्यवस्था तक नहीं…


-संवाददाता-
अंबिकापुर,24 जून 2026 (घटती-घटना)। अंबिकापुर के संप्रेक्षण गृह से 11 अपचारी बालकों के फरार होने की घटना ने एक बार फिर बाल संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है,फरवरी में प्लेस ऑफ सेफ्टी से 15 बालकों के फरार होने की घटना के बाद भी यदि सुरक्षा व्यवस्था नहीं सुधरी और अब फिर 11 अपचारी बालक फरार हो गए,तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरे तंत्र की विफलता का प्रमाण माना जा रहा है, जानकारी के अनुसार घटना के समय संप्रेक्षण गृह में कुल 31 अपचारी बालक मौजूद थे,जिनमें से 11 बालक खिड़की के रास्ते फरार हो गए। अब तक केवल एक बालक के वापस आने की जानकारी सामने आई है, जबकि 10 अन्य बालकों की तलाश जारी है।
वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे,फिर मीडिया से बात करने क्यों भेजा गया हाउस फादर?
घटना के बाद पत्रकारों से चर्चा करने और आधिकारिक जानकारी देने के लिए जिस व्यक्ति को सामने लाया गया, वह हाउस फादर था, हैरानी की बात यह है कि उस दौरान मौके पर जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल संरक्षण अधिकारी सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद बताए जा रहे थे,ऐसे में सवाल उठता है कि जब जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद थे तो उन्होंने स्वयं सामने आकर मीडिया के सवालों का जवाब क्यों नहीं दिया? क्या विभाग के पास घटना को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं था? क्या जिम्मेदारी तय होने के डर से वरिष्ठ अधिकारी मीडिया से दूरी बनाते रहे? या फिर विभाग केवल निचले कर्मचारियों को आगे कर अपनी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रहा है? यह प्रश्न इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला सामान्य नहीं बल्कि बाल सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चूक का है।
सभी बालक खिड़की के रास्ते भागे…तो खिड़की ही सबसे कमजोर कड़ी थी?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सभी 11 अपचारी बालक खिड़की के रास्ते फरार हुए, अब सवाल यह है कि खिड़की की सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी? क्या उसमें मजबूत ग्रिल लगी थी? क्या नियमित निरीक्षण होता था? खिड़की तोड़ने या खोलने के लिए आवश्यक साधन बालकों तक कैसे पहुंचे? एक साथ 11 बालकों का खिड़की के रास्ते निकल जाना यह संकेत देता है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी का लाभ उठाकर की गई सुनियोजित फरारी हो सकती है।
फरवरी की घटना से
क्या सीखा गया था?
फरवरी में प्लेस ऑफ सेफ्टी से 15 बालकों के फरार होने के बाद विभाग ने क्या कदम उठाए थे? क्या सुरक्षा ऑडिट हुआ था? क्या अतिरिक्त स्टाफ की नियुक्ति की गई? क्या सुरक्षा उपकरणों को दुरुस्त किया गया? क्या जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई? यदि यह सब हुआ था तो फिर जून में वही कहानी दोबारा कैसे दोहराई गई? और यदि नहीं हुआ था, तो क्या यह मान लिया जाए कि विभाग ने पहली घटना को गंभीरता से लिया ही नहीं?
लाखों का बजट,लेकिन सुरक्षा भगवान भरोसे-बाल संरक्षण संस्थानों के संचालन,सुरक्षा,निगरानी और रखरखाव पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जब न पर्याप्त सीसीटीवी व्यवस्था हो,न मजबूत सुरक्षा तंत्र,न प्रभावी निगरानी और न जवाबदेही, तब यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह धन खर्च कहां हो रहा है? कागजों में सुरक्षा और जमीनी हकीकत में लापरवाही का यह अंतर अब जांच का विषय बनना चाहिए।
जनता पूछ रही है…
– फरवरी में 15 और जून में 11 बालक फरार, आखिर जिम्मेदार कौन?
– पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं हैं?
– वरिष्ठ अधिकारी मौजूद होने के बावजूद मीडिया से बात करने हाउस फादर को क्यों भेजा गया?
– खिड़की के रास्ते फरारी कैसे संभव हुई?
– खिड़की तोड़ने के लिए साधन कहां से आए?
– सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा क्यों नहीं हुई?
– फरवरी की घटना में किस पर कार्रवाई हुई थी?
– क्या इस बार भी मामला जांच समिति तक सीमित रहेगा?
यह केवल फरारी नहीं, व्यवस्था पर अविश्वास का मामला है- अंबिकापुर की यह घटना केवल 11 अपचारी बालकों के फरार होने की खबर नहीं है, यह उस व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाई गई है, लेकिन बार-बार उन्हीं बच्चों को सुरक्षित रखने में असफल साबित हो रही है, जब कुछ ही महीनों में दो बड़े फरारी कांड सामने आ जाएं, वरिष्ठ अधिकारी जवाब देने से बचते दिखें,पूरे परिसर में सीसीटीवी जैसी मूलभूत व्यवस्था तक न हो और सुरक्षा की कमियां लगातार उजागर होती रहें, तब सवाल केवल फरार बालकों का नहीं रहता, बल्कि पूरे प्रशासनिक और बाल संरक्षण तंत्र की जवाबदेही का बन जाता है,अब देखना यह है कि इस बार भी जांच, निरीक्षण और बैठकों तक मामला सीमित रहता है या फिर वास्तव में जिम्मेदारी तय कर व्यवस्था में सुधार के ठोस कदम उठाए जाते हैं।
पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे
तक नहीं,फिर सुरक्षा के दावे किस आधार पर?-
घटना के बाद सामने आई सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह है कि संप्रेक्षण गृह के पूरे परिसर में पर्याप्त सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था तो है पर कुछ जगह, जहा होना चाहिए वह नहीं है, आज जब छोटे-छोटे कार्यालयों, दुकानों और निजी संस्थानों तक में सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य मानी जाती है, तब कानून के संरक्षण में रखे गए अपचारी बालकों के संस्थान में निगरानी व्यवस्था का अभाव कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है, यदि पुरे परिसर कैमरे नहीं हैं तो—गतिविधियों की निगरानी कैसे होती है? रात्रिकालीन सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है? किसी घटना की जांच किस आधार पर की जाएगी? फरार होने की पूरी प्रक्रिया का सत्यापन कैसे होगा? यह स्थिति सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने रखती है।
कलेक्टर,एसडीएम सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने किया निरीक्षण
घटना के बाद कलेक्टर, एसडीएम तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने संप्रेक्षण गृह पहुंचकर निरीक्षण किया,निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था,परिसर की संरचना और घटना की परिस्थितियों की जानकारी ली गई, लेकिन जनता अब यह जानना चाहती है कि निरीक्षण के बाद क्या केवल रिपोर्ट बनेगी या वास्तव में जिम्मेदारी भी तय होगी? क्योंकि फरवरी की घटना के बाद भी निरीक्षण और समीक्षा की बातें हुई थीं, लेकिन परिणाम क्या निकला, यह आज दूसरी घटना के रूप में सामने है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur