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कविता @मीडिया वालों को मैने देखा है…

मीडिया वालों को लहंगा उठाकर नाचते हुएतो किसी को घाघरा पहनकरठुमका लगाते हुए सत्ता के दरबारों मेंशासन की नजरिया को पेश करते हुएआगे-आगे चलकरअपने ही बिरादरी वालों से रेस करते हुएकोई इशारों ही इशारों में नाच रहा हैतो कोई उनकी भाव को बढ़-चढ़के बाँच रहा हैकोई मदमस्त होकर झूम रहा हैतो कोई लेटकर चरण को चूम रहा हैकोई सत्यवादी का …

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कविता@तालमेल नहीं कर सकता …

कोठी बंगला झोंपड़ छप्पर से तालमेल नहीं कर सकता।शाने अमीरी प्यार गरीब से तालमेल नहीं कर सकता।पतझड़ में बहार का खिलना तालमेल नहीं कर सकता।बुढ़ापे में जवानी का आना तालमेल नहीं कर सकता।मधुपान जायका कड़वाहट तालमेल नहीं कर सकता।सज्जन से दुर्जन का संगत तालमेल नहीं कर सकता।मेहनती जोश आलस्य से तालमेल नहीं कर सकता।साधक राह बाधा मंजिल से तालमेल नहीं …

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लेख@ शांति से काम लें और असलियत को समझें

आज विज्ञान का युग इतना बढ़ गया है कि हर तरफ विज्ञान का डंका बजाने वाले देश अब विज्ञान से विनाश की ओर जा रहे हैं। आदमी सुबह उठता है रात में आराम करता है। बाद में जब घर आता है तो हर तरफ युद्ध का समाचार सुन-सुन कर बोर होने लगता है। इससे पहले था ब्लैक एंड वाइट टीवी …

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