रायपुर,16 जून 2026। छत्तीसगढ़ में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए एक जरूरी खबर है। अब प्रदेश के अस्पतालों में दूसरे राज्यों के डॉक्टर भी बिना किसी रोक-टोक के प्रैक्टिस कर सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा आदेश जारी किया है, जिससे अब डॉक्टरों को छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के नाम से जारी हुई यह अधिसूचना अब प्रदेश के नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ पर भी लागू होगी। यानी अब बाहर से आने वाले डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ को यहां काम करने के लिए अलग से फाइलें नहीं दौड़ानी होंगी। अभी तक नियम यह था कि किसी भी राज्य के डॉक्टर अगर छत्तीसगढ़ में नौकरी या प्राइवेट प्रैक्टिस करना चाहते हैं, तो उन्हें छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराना अनिवार्य था। लेकिन, अब नर्सिंग होम अधिनियम 2010 के तहत इसे बदल दिया गया है। अब अगर किसी डॉक्टर, नर्स या पैरामेडिकल स्टाफ के पास भारत के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का रजिस्ट्रेशन है, तो वे छत्तीसगढ़ में काम करने के पूरी तरह से पात्र होंगे। इसके लिए छत्तीसगढ़ चिकित्सा परिषद से किसी तरह के अतिरिक्त अप्रूवल की जरूरत अब नहीं पड़ेगी। जानकारों का कहना है कि सरकार का सीधा मकसद प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को जल्द से जल्द पूरा करना है। इससे पहले छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल ने सभी सीएमएचओ को निर्देश दिए थे कि दूसरे राज्यों से आने वाले डॉक्टरों का पंजीयन अनिवार्य रूप से कराया जाए। लेकिन अब सरकार की इस नई अधिसूचना के बाद वह पुराना आदेश पूरी तरह से खत्म हो गया है। निजी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में काम कर रहे दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को अब बड़ी राहत मिली है। सरकार के इस फैसले के साथ एक बड़ा रिस्क भी जुड़ा है। सवाल ये है कि अगर डॉक्टर का यहां कोई रजिस्ट्रेशन ही नहीं होगा, तो उनकी डिग्री की असलियत कैसे पता चलेगी? दूसरे राज्यों में फर्जी डिग्री के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। स्थानीय काउंसिल से कोई लेना-देना न रहने पर वेरिफिकेशन कौन करेगा? बिना जांच के क्लीनिक और अस्पताल खोलने की छूट से मरीज भ्रमित हो सकते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर सेंट्रल रजिस्ट्रेशन की तैयारी चल रही है। इसके अलावा, डॉक्टरों का हर 5 साल में रिनुअल कराने की योजना है, जिससे फर्जीवाड़ा रुक सके। फिलहाल, इस आदेश के बाद रायपुर से लेकर बस्तर तक के सरकारी और निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती आसान हो जाएगी।
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