

क्या भ्रष्टाचार का नया कॉरिडोर बन रही है 7.18 करोड़ की गंगोटी-शिवपुर सड़क?
5 महीने की समय-सीमा,एक साल बाद भी अधूरी 7.18 करोड़ की सड़क! पीडब्ल्यूडी की मजबूत सड़क बन रही है या ठेकेदार की मनचाही कमाई का रास्ता?
18.18′ कम दर पर मिला ठेका, गुणवत्ता पर उठे सवाल, एस्टीमेट से अलग निर्माण का आरोप, विभाग की चुप्पी से बढ़ी शंकाएं
30 जून 2025 को जारी हुआ था कार्यादेश, नवंबर 2025 तक पूरा होना था कार्य, अब एक साल से अधिक समय बाद भी लगभग 40 प्रतिशत निर्माण ही दिखाई देने का दावा
ओंकार पाण्डेय
सूरजपुर,05 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क सुविधा देने का दावा कर रही है, लेकिन सूरजपुर जिले की गंगोटी से शिवपुर नवापारा तक 5.10 किलोमीटर सड़क निर्माण परियोजना अब विकास से ज्यादा सवालों का विषय बन गई है, लगभग 7.18 करोड़ रुपये की इस परियोजना में देरी, निर्माण की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी तीनों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 30 जून 2025 को इस सड़क का कार्यादेश जारी किया, कार्य मे. जवाहरलाल गुप्ता को दिया गया, अनुबंध के अनुसार कार्य 5 माह में पूरा होना था तथा कार्य अवधि में वर्षा ऋतु भी शामिल थी, अर्थात सामान्य परिस्थितियों में यह सड़क नवंबर 2025 तक तैयार हो जानी चाहिए थी, लेकिन आज, कार्यादेश जारी होने के एक वर्ष से अधिक समय बाद भी सड़क पूर्ण नहीं हो सकी, स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य अभी भी लगभग 40 प्रतिशत के आसपास ही दिखाई देता है, यदि यह स्थिति वास्तविक है, तो यह केवल निर्माण में देरी नहीं बल्कि अनुबंध की शर्तों के पालन पर भी गंभीर प्रश्न है।
18.18 प्रतिशत कम दर पर ठेका,क्या यहीं से शुरू हुई गुणवत्ता की कहानी?-
इस कार्य की कुल स्वीकृत लागत 7.1842 करोड़ है, दस्तावेजों के अनुसार ठेका एसओआर से 18.18 प्रतिशत कम दर पर स्वीकृत किया गया, जिसके कारण अनुबंध राशि घटकर लगभग 5.8781 करोड़ रह गई, कम दर पर कार्य लेना सरकारी निविदा प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन जब वही कार्य निर्धारित समय पर पूरा न हो, निर्माण की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठने लगें और जमीनी स्थिति एस्टीमेट से मेल न खाती दिखाई दे, तब यह जांच का विषय बन जाता है, स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में कई स्थानों पर बेस कमजोर दिखाई दे रही है, कहीं मोटाई कम नजर आती है तो कहीं निर्माण की गति इतनी धीमी है कि पूरी परियोजना पर ही प्रश्नचिह्न लग गया है।
कछुए की चाल से निर्माण, आखिर जिम्मेदार कौन?-
निर्माण कार्य में सबसे बड़ी जिम्मेदारी केवल ठेकेदार की नहीं होती, उप अभियंता, सहायक अभियंता,कार्यपालन अभियंता सहित पूरा तकनीकी अमला गुणवत्ता की निगरानी के लिए जिम्मेदार होता है, यदि सड़क समय पर नहीं बन रही, यदि गुणवत्ता पर सवाल हैं और यदि निर्माण धीमी गति से चल रहा है, तो फिर विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
क्या ठेकेदार इतना ‘चहेता’ है कि विभाग ने आंखें मूंद ली हैं?-
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि समय-सीमा समाप्त होने के महीनों बाद भी न तो कोई कठोर कार्रवाई दिखाई देती है और न ही सार्वजनिक रूप से किसी प्रकार की जवाबदेही तय होती है, यही वजह है कि लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या विभाग ने गुणवत्ता देखने वाला चश्मा उतार दिया है? क्या अधिकारियों ने केवल प्रगति रिपोर्ट पर भरोसा कर लिया है? या फिर सब कुछ ठीक मान लिया गया है? इन सवालों के ठोस उत्तर केवल विभाग ही दे सकता है।
वर्क ऑर्डर क्या कहता है?
कार्यादेश के अनुसार यह केवल डामरीकरण का काम नहीं है बल्कि संपूर्ण सड़क अवसंरचना विकसित की जानी है, दस्तावेजों में शामिल प्रमुख कार्यों में—5.10 किलोमीटर सड़क निर्माण, भूमि समतलीकरण एवं एम्बैंकमेंट, प्राइम कोट, टैक कोट, बिटुमिनस मैकडम, दोनों ओर शोल्डर, लगभग 2182 मीटर आरसीसी नाली, पुलिया एवं कलवर्ट निर्माण, 600 मिमी व्यास के 110 मीटर आरसीसी पाइप कलवर्ट, आरसीसी संरचनाएं एवं अन्य तकनीकी कार्य शामिल हैं, यानी यह केवल सड़क नहीं बल्कि पूर्ण सड़क परियोजना है।
क्या एस्टीमेट के अनुसार हो रहा है निर्माण?
यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है, ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं दिख रहा, यदि ऐसा है तो विभाग को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि क्या सड़क की प्रत्येक लेयर निर्धारित मोटाई के अनुसार बिछाई जा रही है? क्या निर्धारित गुणवत्ता की गिट्टी और सामग्री का उपयोग हो रहा है? क्या रोलिंग निर्धारित मानकों के अनुसार की जा रही है? क्या आरसीसी नालियां एवं पुलिया स्वीकृत ड्राइंग के अनुरूप बन रही हैं? इन सवालों का उत्तर अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
60 महीने की वारंटी का मतलब क्या खराब गुणवत्ता की छूट है?
कार्यादेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि कार्य पूर्ण होने के बाद 60 माह की परफॉर्मेंस गारंटी रहेगी, लेकिन क्या इस वारंटी का अर्थ यह है कि निर्माण के समय गुणवत्ता से समझौता कर लिया जाए? बिल्कुल नहीं, परफॉर्मेंस गारंटी का उद्देश्य यह है कि यदि बाद में कोई तकनीकी दोष सामने आए तो ठेकेदार उसे अपने खर्च पर सुधारे। इसका अर्थ यह नहीं कि निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों को नजरअंदाज किया जाए, यदि बेस कमजोर होगी, यदि मोटाई कम होगी, यदि सामग्री मानक से कम होगी, तो सड़क की आयु प्रारंभ से ही प्रभावित होगी।
दो बार खबर प्रकाशित हुई, फिर भी व्यवस्था क्यों नहीं जागी?
इस सड़क निर्माण को लेकर पहले भी समाचार प्रकाशित किए जा चुके हैं। निर्माण की धीमी गति, गुणवत्ता पर उठते सवाल और जमीनी तस्वीरें लगातार सामने आती रही हैं, इसके बावजूद यदि कार्य की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देता, तो यह भी सवाल उठना स्वाभाविक है कि—क्या विभाग ने गुणवत्ता परीक्षण कराया? क्या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई गई? क्या विलंब पर नोटिस जारी किया गया? क्या अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर कोई कार्रवाई हुई? यदि हुई तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं है?
क्या पीडब्ल्यूडी ने तकनीकी जांच कराई?- इतने बड़े कार्य में सामान्यत…
फील्ड टेस्ट, डेंसिटी टेस्ट,सामग्री परीक्षण,मोटाई की जांच,लेयर माप,क्यूब टेस्ट,बिटुमिनस गुणवत्ता परीक्षण जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं,यदि ये परीक्षण हुए हैं तो उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि लोगों के मन में उठ रहे संदेह समाप्त हो सकें।
करोड़ों की सड़क,लेकिन जनता अब जवाब चाहती है…
यह सड़क केवल गंगोटी और शिवपुर नवापारा को जोड़ने वाली सड़क नहीं है,यह ग्रामीणों की उम्मीदों, सरकारी धन और विभागीय जवाबदेही की परीक्षा भी है,करीब 7.18 करोड़ रुपये खर्च होने हैं,इसलिए जनता यह जानना चाहती है सड़क समय पर क्यों नहीं बनी? निर्माण की गति इतनी धीमी क्यों है? क्या एस्टीमेट के अनुसार कार्य हो रहा है? गुणवत्ता की जांच किसने की? विलंब के लिए जिम्मेदार कौन है? यदि अनुबंध का उल्लंघन हुआ है तो क्या कार्रवाई की गई?
अब विभाग को देना होगा स्पष्ट जवाब…
जब करोड़ों रुपये जनता के कर से खर्च हो रहे हों,तब केवल यह कहना पर्याप्त नहीं कि ‘60 महीने की वारंटी है,बाद में ठीक करा देंगे,जनता की अपेक्षा यह है कि सड़क पहली बार में ही तकनीकी मानकों के अनुरूप बने,समय पर बने और वर्षों तक टिकाऊ रहे,अब आवश्यकता है कि पीडब्ल्यूडी इस पूरे मामले में स्वतंत्र तकनीकी गुणवत्ता परीक्षण,एस्टीमेट के अनुरूप कार्य का सत्यापन,विलंब की जवाबदेही तय करने तथा पूरी परियोजना की सार्वजनिक समीक्षा कराए,यदि सब कुछ मानकों के अनुरूप है तो विभाग को प्रमाण प्रस्तुत कर जनता का विश्वास मजबूत करना चाहिए, और यदि कहीं कमी है तो उसे स्वीकार कर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि विकास केवल भूमिपूजन, नारियल फोड़ने और उद्घाटन की तस्वीरों से नहीं, बल्कि समय पर बनी टिकाऊ सड़क से साबित होता है।
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