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अम्बिकापुर@मोदी सरकार के 12 साल पूरेः भाजपा ने लगाई उपलब्धियों की प्रदर्शनी

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सेवा,सुशासन और विकास के दावों के बीच रोजगार,महंगाई और जमीनी समस्याओं पर भी चर्चा जरूरी…

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,17 जून 2026 (घटती-घटना)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भाजपा सरगुजा द्वारा ‘12 साल विश्वास के, विकास के,जनकल्याण के’ अभियान के तहत अंबिकापुर के कला केंद्र मैदान में तीन दिवसीय प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। 18 जून तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों को चित्रों एवं जानकारी के माध्यम से प्रदर्शित किया जा रहा है। प्रदर्शनी का उद्घाटन सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज,भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया, महापौर मंजूषा भगत, युवा आयोग के प्रदेश अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर तथा जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह ने फीता काटकर किया। उद्घाटन अवसर पर सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन, गरीब कल्याण, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में प्रदर्शित चित्र और जानकारियां केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा देश की विकास यात्रा को दर्शाती हैं और यह प्रदर्शनी आम जनता को सरकार की उपलब्धियों से अवगत कराने का प्रभावी माध्यम बनेगी। भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार के 12 वर्ष सेवा, सुशासन और जनकल्याण के स्वर्णिम काल के रूप में याद किए जाएंगे। उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। यह प्रदर्शनी इन उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और विकसित भारत के संकल्प को मजबूत करने का कार्य करेगी।
जश्न और प्रदर्शनी के बीच कुछ सवाल भी हैं : किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखती है और जनता उसका मूल्यांकन करती है। ऐसे में भाजपा की यह प्रदर्शनी स्वाभाविक राजनीतिक गतिविधि है,लेकिन इसके साथ यह सवाल भी उठना लाजिमी है कि क्या केवल उपलब्धियों की तस्वीर दिखाने से विकास का पूरा मूल्यांकन हो सकता है? पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने सड़क,रेलवे,हवाई अड्डों,डिजिटल सेवाओं,आधारभूत संरचना, गरीब कल्याण योजनाओं और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को मजबूत करने के अनेक दावे किए हैं। वहीं दूसरी ओर विपक्ष लगातार महंगाई,बेरोजगारी,किसानों की आय,छोटे व्यापारियों की समस्याओं और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं जैसे मुद्दों को उठाता रहा है। जनता के बीच चर्चा का विषय यह भी है कि विकास के दावों के साथ इन चुनौतियों पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
सरगुजा को क्या मिला,जनता जानना चाहती है : सरगुजा जैसे आदिवासी और पिछड़े अंचल में रहने वाले लोग यह भी जानना चाहते हैं कि केंद्र सरकार की योजनाओं से क्षेत्र को वास्तविक रूप से कितना लाभ मिला है…
कितने युवाओं को रोजगार मिला?
– स्वास्थ्य सुविधाओं में कितना सुधार हुआ?
– शिक्षा के क्षेत्र में क्या बदलाव आया?
– ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति क्या है?
– किसानों की आय बढ़ाने के लिए कौन से ठोस परिणाम सामने आए?
इन सवालों के जवाब भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि उपलब्धियों के दावे।
महंगाई और रोजगार
का मुद्दा अब भी चर्चा में…

देश की अर्थव्यवस्था दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो रही है,लेकिन आम परिवारों के सामने महंगाई की चुनौती अभी भी बनी हुई है। रसोई गैस, खाद्य पदार्थों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतें आम लोगों की चिंता का विषय हैं। इसी तरह बड़ी संख्या में शिक्षित युवा रोजगार के अवसरों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में विकास की चर्चा तभी पूरी मानी जाएगी जब इन मुद्दों पर भी संतोषजनक उत्तर सामने आएं।
प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ता : कार्यक्रम में पूर्व सांसद कमल भान सिंह, नगर निगम अध्यक्ष हरमिंदर सिंह टिन्नी, जिला महामंत्री अरुणा सिंह, कार्यक्रम संयोजक विकास पांडेय, मनीष सिंह, मधु चौधरी, निश्चल सिंह, आलोक दुबे, जन्मेजय मिश्रा, मनोज कंसारी, कमलेश तिवारी, रिंकू वर्मा, सावित्री जायसवाल, किरण मिश्रा, शकुंतला पांडेय, देवकी त्रिपाठी, सुभांगी बिहाड़े, निरंजन राय, दीपक सिंह तोमर, प्रयाग साहू, संजीव वर्मा, अभिषेक सिंह देव, निशांत सिंह सोलू, अजय सोनी, विकास शुक्ला, दीपक यादव, सुनीत मिश्रा, सत्यम सिंह, गीता यादव एवं अभिषेक सिंह सहित भाजपा के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
जनता की सोच…ः मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर भाजपा द्वारा उपलब्धियों की प्रदर्शनी लगाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आयोजन है। लेकिन लोकतंत्र में केवल उपलब्धियों का उत्सव ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जनता के उन सवालों का जवाब भी जरूरी होता है जो महंगाई,रोजगार, किसानों की आय,स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं। सरकार की उपलब्धियां जितनी महत्वपूर्ण हैं, उतना ही जरूरी है यह बताना कि जिन समस्याओं को समाप्त करने का वादा किया गया था, उनमें कितना सुधार हुआ और कितनी चुनौतियां अब भी बाकी हैं।


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