
आज विज्ञान का युग इतना बढ़ गया है कि हर तरफ विज्ञान का डंका बजाने वाले देश अब विज्ञान से विनाश की ओर जा रहे हैं। आदमी सुबह उठता है रात में आराम करता है। बाद में जब घर आता है तो हर तरफ युद्ध का समाचार सुन-सुन कर बोर होने लगता है। इससे पहले था ब्लैक एंड वाइट टीवी का जिसमें लोग एक चैनल देख्ग्ते थे और टीवी से ख़ुशी मिलती थी। टीवी मनोरंजन हेतु होता है। दूसरे देश का युद्ध से हमारा क़ोई लेना-देना नहीं है इससे लोग उब चुके है और जब वही चीज बार-बार सुनने क़ो मिलता है तो और भी गुस्सा आता है और टीवी क़ो बन्द कर देते है। हैरानी की बात यह है कि सभी में एक ही चीज चलता है ख़ासकर इजराइल और ईरान का युद्ध जो यहाँ से बहुत दूर है । अब तो छोटे देश अर्मेनीया और रूस का भी समाचार मिल रहा है जबकी बीते 3 साल से रूस और यूक्रेन का लागातार युद्ध देख-देख कर लोग उब चुके है और देश में चुनाव से लेकर 15 साल पूरानी गाड़ी क़ो दिल्ली में पेट्रोल नहीं मिलेगा। रेल में किराया बढ़ गया। मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाकर मोबाइल पर सुने आजान ये सब तमाम खबरें बकबास नजर आती है क्योंकि उससे आपको क्या मिला। हाँ ये दिखाया जाए पढ़ाई कैसे की जाए रोजगार कैसे मिले तो सभी के लिए लाभकारी होगा। भगवान राम के बारे में कुछ दिखा दो लोगों क़ो शौक नहीं है। पुरानी गाड़ी पर चलने का लेकिन उनकी इनकम और खर्च देखिए और गाड़ी फ्री में तो नहीं मिल रही है धर्म में कौन क्या कर रहा है इससे क्या लेना। डेन्स धर्म वास्तव में सही ज्ञान धारण करना है। अपने आप क़ो पहचानने का सही संदेश है लोगों का अपना-अपना धर्म है और वो कर्म करने का रास्ता बतलाता है और जैसा कर्म करोगे वैसा फल देगा भगवान। ये गाना भी सुना होगा भगवान श्री राम के बारे में कुछ लोग समझना पसंद करते हैं कुछ नही।ं कहते हैं ऐ नया जमाना है। समय अब बदल गया है और आज तो न्यूज में ये सुनाई देती है कि पति ने पत्नी से तंग आकर आत्महत्या कर लिया और नबी किया है तो हत्या कर दिया गया। आदमी की भावना समझना चाहिए। एक पैसा कितनी मेहनत से कमाता है और जब पानी में बहता देखता है तो स्वभाविक है कि वह तंग हो जायेगा। अतः हमें बच्चों में अच्छा संस्कार देना चाहिए टीवी से दूर रख कर पढ़ाई में मेहनत करोगे तभी सफलता हासिल होगी और आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और वही देश की सेवा में काम आएगा। भगवान राम जैसे पहले दिखते थे वैसे आज भी दिखते हैं लेकिन पहले लोगों में आस्था प्रबल थी इसलिए जब रामानन्द सागर की çफ़ल्म रामायण टीवी पर आयी तो पूरा दुकान बन्द और रोड पर रामायण देखने के लिए सब दुकान बन्द कर देते थे जैसे मानी कर्फू लगा है। समय भी वही है पहले भी घंटा में 60 मिनट होते थे वो आज भी उतना ही हैं कुछ बदला है तो समय का चक्र। और वह किसी का इंतज़ार नहीं करता इसलिए समय नहीं लोग बदल गए हैं जिसे सुधारने की आवश्यकता है पढ़ाई करना साथ-साथ मानवता की रक्षा लोगों क़ो मदद करना गरीबों की सेवा करना माता-पिता की सेवा करना ही हमारा धर्म है। भगवान श्री राम भी यही संदेश दिए हैं और आप इस दुनिया से आखिर लेकर क्या करने जा सकते हैं। अपना कर्म माता-पिता की सेवा मानवता की रक्षा करना ही आपकी असली पूंजी है जो स्पस्ट रूप से दिखाई तो नहीं देती लेकिन यही सत्य है। अतः धन-दौलत हीरा-जवाहरात ये सब आकर्षित करते हैं और समय पर काम भी आते हैं लेकिन कुछ समय के लिए बाद में नस्ट होना तय है। लेकिन जो गरीब है उसे भी ईश्वर उसको बचाता है और समय पर काम आता है शरीर क़ो बनाने वाला ही शरीर क़ो ठीक करना जानता है और असंभव क़ो संभव बनाता है। प्रभु राम के चरण के
स्पर्श मात्र से अहिल्या क्यों जीवित हो गई क्योंकि भगवान राम इतने पवित्र थे और 14 साल पैदल चलने के कारण उनके चरणों में सकारात्मक ऊर्जा निकलती है जो हर दोष क़ो दूर करती है । इसलिए अपने क़ो समझने की कोशिश करें। भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति और धर्म के आधार स्तंभ माने जाते हैं। उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने पूरे जीवन में धर्म, सत्य, कर्तव्य और मर्यादा का पालन किया। श्रीराम का जीवन केवल एक कथा नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है, जिससे हम जीवन में आदर्श व्यवहार, संयम, और सत्य की राह पर चलने की सीख ले सकते हैं। श्रीराम त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र थे। वे विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं, जिनका जन्म पृथ्वी से अधर्म और असत्य को समाप्त करने के लिए हुआ था। रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने उनके जीवन का विस्तार से वर्णन किया है। राम का जीवन आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श भाई, और आदर्श राजा का उदाहरण है। श्रीराम के जीवन से हमें कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं। उन्होंने हर परिस्थिति में अपने कर्तव्यों का पालन किया और धर्म के मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए। जब पिता दशरथ ने उन्हें 14 वर्षों के लिए वनवास जाने का आदेश दिया, तब उन्होंने बिना किसी प्रश्न के आज्ञा का पालन किया। इससे हमें सिखने को मिलता है कि माता-पिता की आज्ञा का पालन करना हमारे कर्तव्य में शामिल है। वनवास के दौरान उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया,लेकिन कभी भी धैर्य नहीं खोया। माता सीता के हरण के बाद भी उन्होंने क्रोध में आकर अनुचित मार्ग नहीं अपनाया, बल्कि धैर्य और रणनीति से कार्य किया। इससे हमें धैर्य और संयम का मूल्य समझने को मिलता है।
संजय गोस्वामी
मुंबई,महाराष्ट्र
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