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कविता@बूढ़ी घोड़ी…

बूढी घोडी लाल लगाममां समझे बेटी से जवान!हराम की कमाई खाकरअफसर बना गामा पहलवान।खादी के कपड़े पहन कर नेतासमझे जैसे मार लिया मैदान।इस बेचारे को पता ही नहीं कियह है कुछ दिन की ही शान।शराब पीकर नेता दे रहा हैशराब बंदी पर ही व्याख्यान।जब तक ना पी ले पूरी बोतलउसकी जान में नहीं आती जान।आज के जेंटलमैन की पहचानउल्टा बोले …

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लेख@शायरी साहित्य और संस्कृति की धरोहर है…

डॉ. मुश्ताक अहमद शाह की शायरी और कविताएं लोगों के दिलों को इसलिए छू रही हैं क्योंकि वे गहरी भावनाओं,जीवन के अनुभवों और मानवीय संवेदनाओं को सरल,सच्चे शब्दों में व्यक्त करते हैं। ऐसी शायरी और कविताएं अकेलेपन, दिल के दर्द, प्रेम, दोस्ती और जीवन की जटिलताओं को इस तरह उजागर करती हैं कि पाठक अपनी भावनाओं को उनमें महसूस कर …

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लेख@कागज-पत्तर ढीले और पहुंच का रुतबा

अपने यहां ऐसे भी दीवाने हैं जो कलाई पर घड़ी नहीं हेलमेट बांधते हैं। भारत में ट्रैफिक नियम उस प्रेमिका की तरह हैं जिनसे सब वादा करते हैं पर निभाता कोई नहीं। ट्रैफिक सिग्नल उस बुजुर्ग की तरह होता है जिसे सब सम्मान से देखते हैं, पर जिसकी मानता कोई नहीं। यहां सड़कों पर सबसे विश्वसनीय सहारा न तो हेलमेट …

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