Breaking News

कविता@बूढ़ी घोड़ी…

Share


बूढी घोडी लाल लगाम
मां समझे बेटी से जवान!
हराम की कमाई खाकर
अफसर बना गामा पहलवान।
खादी के कपड़े पहन कर नेता
समझे जैसे मार लिया मैदान।
इस बेचारे को पता ही नहीं कि
यह है कुछ दिन की ही शान।
शराब पीकर नेता दे रहा है
शराब बंदी पर ही व्याख्यान।
जब तक ना पी ले पूरी बोतल
उसकी जान में नहीं आती जान।
आज के जेंटलमैन की पहचान
उल्टा बोले और लंबी है जुबान।
रात दिन तो करता है हेरा फेरी
और दिखलाइए जैसे हो नादान।
मुंह में इसके दांत ही नहीं बेचारे के
और टांगों में नहीं चलने की जान
ब्याह कराने के लिए चल पड़ा है
देखो इस बुड्ढे मियां की शान।
मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारे जाकर
करता नहीं है उस प्रभु का गुणगान
पता नहीं कब आए रब का बुलावा
उठकर चलना पड़ेगा उसे शमशान।
दुनिया का यह देख कर तमाशा
मैं तो दोस्तों हो रहा बहुत हैरान।


Share

Check Also

संपादकीय@ विरासत का गौरव,विकास का उत्सव… लेकिन मंजिल अभी बाकी है!

Share 01 नवंबर 2000 को देश के नक्शे पर छत्तीसगढ़ के रूप में एक नए …

Leave a Reply