- कोरिया तिहरा हत्याकांड: ‘लाल रेत’ के खूनी खेल में तीन मौतें, जलती फॉर्च्यूनर ने खोली अवैध साम्राज्य की परतें, सवालों के घेरे में पूरा सिस्टम
- नौगई से बैकुंठपुर तक पसरा सन्नाटा, फरार आरोपियों की तलाश में युद्धस्तर पर पुलिस कार्रवाई, खनिज विभाग और प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल
- रेत माफिया की जंग या प्रशासनिक नाकामी? कोरिया तिहरा हत्याकांड ने खड़े किए बड़े सवाल…
- तीन मौतें,एक जलती फॉर्च्यूनर और कई राज : कोरिया के ‘लाल रेत कांड’ की परतें खुलनी बाकी…
- जब रेत से ज्यादा कीमती हो गया वर्चस्व : नौगई में तीन जानें गईं, प्रशासन देखता रह गया!
- कोरिया का ‘लाल रेत कांड’ : तीन हत्याओं से दहला जिला,फरार आरोपियों की तलाश में युद्धस्तर पर कार्रवाई

रवि सिंह
कोरिया/सोनहत,18 जून 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड स्थित ग्राम नौगई में घटित तिहरे हत्याकांड ने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर कर रख दिया है,भाजपा नेता एवं व्यवसायी लल्ला सिंह उर्फ भरत सिंह समेत तीन लोगों की दर्दनाक मौत के बाद पूरा क्षेत्र तनाव,भय और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है,एक तरफ पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में दिन-रात जुटी हुई है,तो दूसरी तरफ आम जनता यह सवाल पूछ रही है कि आखिर ऐसी नौबत आई ही क्यों? क्या यह केवल दो गुटों का विवाद था या फिर रेत कारोबार के उस समानांतर साम्राज्य का परिणाम,जिसकी जानकारी प्रशासन और खनिज विभाग को पहले से थी लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई? नौगई में हुई इस वारदात ने सिर्फ तीन लोगों की जान नहीं ली,बल्कि सुशासन, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जिस तरह दिनदहाड़े नहीं तो खुलेआम रास्ते में घेरकर हमला किया गया,वाहन को आग के हवाले कर दिया गया और तीन लोगों की मौत हो गई,उससे साफ संकेत मिलता है कि विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ था बल्कि इसके पीछे लंबे समय से सुलग रही प्रतिद्वंद्विता थी।
शांत वनांचल में खून
और आग का तांडव…
सोनहत क्षेत्र लंबे समय से अपने प्राकृतिक संसाधनों और रेत खदानों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में रेत कारोबार को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा, प्रभाव और आर्थिक हितों ने कई बार विवादों को जन्म दिया है, नौगई में हुई यह घटना उसी संघर्ष का सबसे भयावह रूप मानी जा रही है,प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सामने आ रही जानकारियों के अनुसार घटना के दौरान ऐसा हिंसक टकराव हुआ जिसमें लल्ला सिंह उर्फ भरत सिंह सहित तीन लोगों की जान चली गई,घटना के बाद जिस प्रकार फॉर्च्यूनर वाहन जलता हुआ मिला,उसने पूरे प्रदेश का ध्यान इस मामले की ओर खींच लिया, घटनास्थल के दृश्य इतने भयावह बताए जा रहे हैं कि वहां मौजूद लोग आज भी उस मंजर को याद कर सिहर उठते हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने पहले कभी इस प्रकार की हिंसक घटना नहीं देखी थी।
घटनास्थल पर ले
जाकर कराई गई पूछताछ…
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को नौगई स्थित घटनास्थल पर ले जाकर पूछताछ की है,इस प्रक्रिया का उद्देश्य वारदात के क्रम को समझना और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का मिलान करना था,सूत्रों के अनुसार आरोपियों से यह पूछा गया कि हमले की शुरुआत कैसे हुई, किसने किस पर हमला किया,कौन-कौन मौके पर मौजूद था और वाहन में आग कैसे लगी, बताया जा रहा है कि पुलिस ने घटनास्थल पर पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया,जांच अधिकारी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या हमले की पूर्व योजना बनाई गई थी या विवाद अचानक हिंसक हो गया, घटनास्थल पर पूछताछ के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने।
खौफ ऐसा कि कोई बोलने को तैयार नहीं-घटना के बाद नौगई और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है, लोग बातचीत तो कर रहे हैं,लेकिन सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं, ग्रामीणों का कहना है कि जिस प्रकार की हिंसा हुई है,उससे हर व्यक्ति भयभीत है,कई लोग यह मान रहे हैं कि मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है और आगे भी तनाव बना रह सकता है,चश्मदीदों की चुप्पी भी जांच के लिए चुनौती बन रही है। पुलिस को उम्मीद है कि समय के साथ लोग आगे आएंगे और घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य साझा करेंगे, गांव में पसरा सन्नाटा इस बात का संकेत है कि लोग अभी भी सदमे में हैं। हर घर में इस घटना की चर्चा है,लेकिन खुलकर कोई कुछ कहने को तैयार नहीं।
फरार आरोपी खुलवा सकते हैं कई बड़े राज…
जांच से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इस मामले की पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है,पुलिस को उम्मीद है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी, यह भी जांच का विषय है कि क्या इस विवाद के पीछे केवल व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता थी या फिर रेत कारोबार से जुड़े आर्थिक हितों का बड़ा टकराव था,स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि पूरे घटनाक्रम में कुछ ऐसे चेहरे भी हो सकते हैं जो सीधे तौर पर सामने नहीं आए हैं लेकिन पर्दे के पीछे से सक्रिय थे। पुलिस अभी इस दिशा में भी जानकारी जुटा रही है।
फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस का बड़ा अभियान…
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है, सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा और एडिशनल एसपी सुरेशा चौबे स्वयं पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं,पुलिस ने इस मामले में कुल सात लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, इनमें से चार आरोपियों अक्षय त्रिपाठी,विशाल त्रिपाठी,सत्यप्रकाश त्रिपाठी और मुन्नू त्रिपाठी को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि तीन आरोपी अब भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं, सूत्रों के अनुसार फरार आरोपियों के मोबाइल फोन बंद हैं और वे लगातार अपने ठिकाने बदल रहे हैं,पुलिस साइबर सेल की मदद से उनकी अंतिम लोकेशन,कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है,कई जिलों में दबिश दी जा रही है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही शेष आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा,हत्या,हत्या के प्रयास, आगजनी और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है,जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या घटना में और लोग भी शामिल थे या नहीं।
सियासत में भी मचा भूचाल
यह मामला अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है। राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है, आरोपी पक्ष को स्थानीय क्षेत्रीय विधायक का करीबी बताया जा रहा है, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटना के बाद विधायक की चुप्पी राजनीतिक चर्चाओं का विषय बनी हुई है,वहीं बैकुंठपुर विधायक भैयालाल राजवाड़े लगातार इस मामले में कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं,उनके बयानों ने प्रशासन पर दबाव बढ़ाया है और राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है,सियासी विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच में किसी प्रकार के राजनीतिक संरक्षण या प्रभाव के संकेत मिलते हैं तो मामला और अधिक गंभीर हो सकता है।
धारा 163 लागू…संवेदनशील क्षेत्र बने सुरक्षा छावनी
घटना के बाद उत्पन्न तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए हैं,कलेक्टर रोक्तिमा यादव द्वारा जारी आदेश के अनुसार महलपारा बैकुंठपुर,नौगई गांव तथा कटगोड़ी स्थित क्रेशर क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया गया है, इन क्षेत्रों के 300 मीटर दायरे में किसी भी प्रकार की सभा,धरना, प्रदर्शन अथवा जुलूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है,हथियार लेकर चलने पर रोक लगाई गई है और सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री के प्रसार पर भी निगरानी रखी जा रही है, प्रशासन का कहना है कि यह कदम शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
सबसे बड़ा सवाल : क्या प्रशासन पहले से जानता था?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रश्न प्रशासनिक भूमिका को लेकर उठ रहा है, स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय से यह चर्चा रही है कि रेत कारोबार को लेकर क्षेत्र में तनाव बना हुआ था। यदि ऐसा था तो संबंधित विभागों ने समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया? कहा जा रहा है कि दो दिन पहले भी दोनों पक्षों के बीच विवाद थाने तक पहुंचा था,यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि आखिर उस समय प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई, क्या पुलिस को संभावित हिंसा की आशंका नहीं थी? क्या खनिज विभाग को क्षेत्र में चल रहे विवादों की जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ये प्रश्न अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुके हैं।
खनिज विभाग की भूमिका पर उठ रही उंगलियां…
इस तिहरे हत्याकांड के बाद सबसे ज्यादा आलोचना खनिज विभाग की हो रही है,स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत कारोबार को लेकर लंबे समय से कई प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं,लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई,यदि क्षेत्र में अवैध वसूली,दबाव और वर्चस्व की लड़ाई जैसी गतिविधियां चल रही थीं तो विभाग ने उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए? जनता पूछ रही है कि क्या संबंधित अधिकारियों को वास्तव में कुछ पता नहीं था या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद कर ली गई थीं? इसी वजह से अब यह हत्याकांड केवल अपराध की घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है।
जलती फॉर्च्यूनर और सुशासन पर उठते सवाल…
नौगई में जलती हुई फॉर्च्यूनर की तस्वीरें पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं, यह केवल एक वाहन नहीं था,बल्कि उस व्यवस्था का प्रतीक बन गया है जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं, जब तीन लोगों की जान चली जाए,गांव दहशत में डूब जाए,पुलिस को संभागभर की फोर्स लगानी पड़े और प्रशासन को धारा 163 लागू करनी पड़े,तब यह मान लेना कठिन हो जाता है कि सब कुछ सामान्य था,यह घटना बता रही है कि यदि छोटे विवादों को समय रहते नहीं रोका गया तो वे किस प्रकार बड़े रक्तपात में बदल सकते हैं।
अब पूरी नजर जांच पर…
फिलहाल पूरे जिले की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हुई हैं,लोग जानना चाहते हैं कि आखिर इस खूनी संघर्ष की असली वजह क्या थी,किसने क्या भूमिका निभाई और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था,फरार आरोपियों की गिरफ्तारी,कॉल डिटेल रिकॉर्ड,डिजिटल साक्ष्य, घटनास्थल से मिले प्रमाण और पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं, लेकिन एक बात तय है कि नौगई का यह तिहरा हत्याकांड कोरिया जिले के इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। तीन मौतों, जलती फॉर्च्यूनर और रेत कारोबार के खूनी संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि जब प्रशासनिक निगरानी कमजोर पड़ती है और विवादों को समय रहते नहीं सुलझाया जाता,तब उसका परिणाम केवल कानून-व्यवस्था का संकट नहीं बल्कि मानव जीवन की अपूरणीय क्षति के रूप में सामने आता है।
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