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वाड्रफनगर (बलरामपुर)@फर्जी अंकसूची के सहारे 28 साल नौकरी? आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पर गंभीर आरोप,जांच नहीं हुई तो प्रशासन पर उठेंगे सवाल…

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जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और एफआईआर की मांग,शिकायतकर्ता ने उम्र,अंकसूची और शासकीय अभिलेखों में विरोधाभास का लगाया आरोप
-सुदामा राजवाड़े-
वाड्रफनगर (बलरामपुर),06 अगस्त 2026 (घटती-घटना)
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटराही खास की एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पर कथित रूप से फर्जी अंकसूची और गलत जन्मतिथि के आधार पर नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप लगा है। मामले में ग्राम कोटराही निवासी धनराज पण्डो ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में दावा किया गया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विद्यावती यादव ने वर्ष 1999 में कथित रूप से फर्जी अंकसूची और गलत जन्मतिथि का उपयोग कर नौकरी प्राप्त की। शिकायतकर्ता के अनुसार नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि 12 मई 1968 दर्ज है, जबकि उपलब्ध अन्य अभिलेख इस जानकारी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
शिकायत में कई दस्तावेजों का हवाला,उम्र को लेकर विरोधाभास का दावा : शिकायतकर्ता का दावा है कि विद्यावती यादव की पहली पुत्री की जन्मतिथि 24 अप्रैल 1975 दर्ज है। यदि यह तथ्य सही है तो नियुक्ति के समय प्रस्तुत जन्मतिथि पर स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होते हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में विद्यावती यादव की आयु 72 वर्ष अंकित है। वहीं वर्ष 2007 के राजस्व अभिलेख में उनकी आयु 52 वर्ष दर्ज बताई गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि वर्तमान आयु 72 वर्ष सही है तो वह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु से लगभग 10 वर्ष अधिक हो चुकी हैं। ऐसे में लंबे समय से सेवा जारी रहने पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
यदि आरोप सही हैं तो यह केवल अनियमितता नहीं,गंभीर अपराध का विषय : मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि किसी सरकारी सेवा में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की गई है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी? शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और आरोप प्रमाणित होने की स्थिति में संबंधित के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। साथ ही कथित रूप से पिछले 28 वर्षों में प्राप्त शासकीय वेतन-भत्तों की वसूली भी की जाए।
प्रशासनिक जांच अब परीक्षा की घड़ी : यह मामला केवल एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और सरकारी अभिलेखों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप निराधार हैं तो जांच से सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करता है।
परियोजना अधिकारी से पक्ष नहीं मिल सका
समाचार के संबंध में वाड्रफनगर परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क कर पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं होने के कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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