मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और कोरिया जिले में निजी बस संचालन को लेकर उठा बड़ा सवाल,यात्रियों की सुरक्षा से कथित खिलवाड़ की आशंका
–राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां/मनेंद्रगढ़,06 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) एवं कोरिया जिले में निजी बसों के संचालन को लेकर ऐसे सवाल सामने आ रहे हैं,जिनका जवाब परिवहन विभाग के पास होना चाहिए, स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि कुछ बस संचालक जिस मार्ग (रूट) के लिए परमिट प्राप्त किए हुए हैं,उसी मार्ग पर बस नहीं चला रहे, बल्कि दूसरे मार्गों पर अन्य वाहनों का संचालन कर रहे हैं,इससे भी गंभीर आरोप यह है कि जिस बस के नाम और नंबर पर परमिट जारी है,वह कथित रूप से वर्षों से गैरेज या कबाड़ में खड़ी है,जबकि उसी परमिट अथवा नंबर का उपयोग किसी अन्य बस के संचालन में किया जा रहा है,यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल मोटरयान नियमों का उल्लंघन भर नहीं,बल्कि यात्रियों की सुरक्षा,बीमा दावों और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
परमिट एक मार्ग का संचालन दूसरे मार्ग पर!
क्षेत्र में चर्चा है कि कुछ बसों को जिन मार्गों के लिए विधिवत परमिट मिला है,वे उन मार्गों पर नियमित संचालन नहीं कर रही हैं,आरोप है कि उनकी जगह दूसरे मार्गों पर बसें चलाई जा रही हैं,बताया जा रहा है कि मनेंद्रगढ़-उधनापुर-जरौधा,बैकुंठपुर-पोड़ी-बचरा तथा चिरमिरी-प्रेमनगर-खड़गवां-मनेंद्रगढ़ सहित कई मार्गों पर बस संचालन को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं,स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी रूट के लिए जारी परमिट का उपयोग दूसरे रूट पर किया जा रहा है तो इससे पूरी परिवहन व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
परिवहन विभाग की निगरानी पर उठ रहे सवाल-पूरा मामला परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है, यदि विभाग नियमित रूप से बसों की जांच करता है तो—परमिट किस वाहन के नाम पर है? सड़क पर वास्तव में कौन-सा वाहन चल रहा है? वाहन स्वीकृत मार्ग पर संचालित हो रहा है या नहीं? जैसे बुनियादी तथ्यों की पुष्टि अब तक क्यों नहीं हुई? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण प्रभावी ढंग से हो रहे होते तो ऐसी शिकायतें वर्षों तक चर्चा का विषय नहीं बनतीं।
क्या केवल कागजों में हो रही निगरानी?
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि विभागीय निरीक्षण अधिकतर दस्तावेजी औपचारिकताओं तक सीमित रह जाते हैं,जबकि वास्तविक संचालन की भौतिक जांच बहुत कम होती है,हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
कबाड़ में खड़ी बस,सड़क पर दौड़ रहा दूसरा वाहन?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिस वाहन के नाम पर परमिट जारी है, वह कथित रूप से संचालन में ही नहीं है,चर्चा है कि वह वाहन लंबे समय से गैरेज अथवा कबाड़ में खड़ा है,जबकि उसी परमिट अथवा नंबर के सहारे दूसरा वाहन यात्रियों को लेकर सड़क पर दौड़ रहा है,यदि ऐसा हो रहा है तो कई गंभीर कानूनी प्रश्न खड़े होते हैं सड़क पर चल रही बस की वास्तविक पहचान क्या है? फिटनेस प्रमाणपत्र किस वाहन का है? बीमा किस वाहन के नाम पर प्रभावी है? दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी किसकी तय होगी? इन सवालों के जवाब केवल जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकते हैं।
यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला…
प्रतिदिन सैकड़ों यात्री इन बसों से सफर करते हैं,अधिकांश यात्रियों को यह जानकारी ही नहीं होती कि जिस बस में वे बैठे हैं,वह वास्तव में उसी वाहन का संचालन है जिसके नाम पर परमिट जारी हुआ है या नहीं,यदि किसी अन्य वाहन का संचालन किया जा रहा है और दस्तावेज किसी दूसरे वाहन के हैं,तो दुर्घटना की स्थिति में बीमा दावे,कानूनी दायित्व और यात्रियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन होगा?-यदि किसी कथित अनियमित बस का दुर्घटना में उपयोग होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? बस संचालक? वाहन मालिक? चालक? या वह अधिकारी जिसने कथित अनियमितता के बावजूद समय रहते जांच नहीं की? विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि उससे पहले नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
नियम केवल औपचारिकता नहीं, यात्रियों की सुरक्षा का आधार- परिवहन व्यवस्था में परमिट,फिटनेस, बीमा और वाहन की वास्तविक पहचान केवल कागजी प्रक्रिया नहीं बल्कि यात्रियों की सुरक्षा का आधार होती है,यदि किसी वाहन का परमिट,फिटनेस और बीमा एक बस के नाम पर हो तथा सड़क पर दूसरी बस चल रही हो,तो यह स्थिति गंभीर जांच का विषय बन सकती है।
स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें…
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि जिले में संचालित सभी निजी बसों की विशेष जांच कराई जाए, जांच में विशेष रूप से यह देखा जाए—परमिट किस वाहन के नाम और नंबर पर जारी है,सड़क पर वास्तव में कौन-सा वाहन संचालित हो रहा है,बस स्वीकृत मार्ग पर चल रही है या नहीं, फिटनेस प्रमाणपत्र वैध है या नहीं, बीमा की स्थिति क्या है,नंबर प्लेट और दस्तावेजों में कोई विसंगति तो नहीं,परमिटधारी बस के स्थान पर किसी अन्य वाहन का संचालन तो नहीं किया जा रहा।
जांच से ही सामने आएगा सच…
वर्तमान में लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए आवश्यक है कि परिवहन विभाग एवं सक्षम प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले की भौतिक एवं दस्तावेजी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें,यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित बस संचालकों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए,क्योंकि यह मामला केवल परमिट या दस्तावेजों का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा का है जो प्रतिदिन इन बसों में सफर करते हैं।
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