Breaking News

नई दिल्ली@जेन जी पर हमें भरोसा,वे स्मार्ट हैं….हमें उनकी बात समझनी चाहिए,उनसे बात नहीं हुई तभी तो आंदोलन हुआ : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

Share

नई दिल्ली,06 अगस्त 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भगवत ने गुरुवार को युवा पीढ़ी पर भरोसा जताते हुए कहा कि जेनरेशन जी और जेनरेशन अल्फा ईमानदार पीढिय़ां हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नीट परीक्षा के पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर पेलेट गन के इस्तेमाल के कारणों का अध्ययन किया जाना चाहिए। जंतर-मंतर पर पेलेट गन के इस्तेमाल के बारे में बात करते हुए भगवत ने कहा, लाठी हमला क्यों हुआ? पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, और हमें इसके पीछे का कारण जानना होगा।भगवत ने यह भी कहा कि जब उनकी पीढ़ी आज की पीढ़ी की उम्र की थी,तब लोग बड़ों की बात सीधे-सीधे सुन लेते थे। उन्होंने कहा…जब हम पीढ़ी की उम्र के थे,तब हम बड़ों की बात सुनते थे। हम कभी सवाल नहीं करते थे। अब पीढ़ी को तार्किक जवाब चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जेन जी और अल्फा ईमानदार पीढिय़ां हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, नियम बनाना ठीक है,लेकिन वे तभी सफल होते हैं जब लोगों का नजरिया बदले। वरना, पहले से ही बहुत सारे कानून मौजूद हैं। कानून तभी असरदार होते हैं जब समाज उन्हें अपनाए। सोशल मीडिया पर आप क्या हैं, इस बारे में सोचना जरूरी है क्योंकि लोग आपके काम को ही फॉलो करते हैं। इसलिए, यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप यह देखें कि आपके फॉलोअर्स आपके काम (सोशल मीडिया पर) को फॉलो करके किसी गलत रास्ते पर न चले जाएं। आजकल टेक्नोलॉजी ऐसी है कि नकली वीडियो बनाए जा सकते हैं और आपके या मेरे नाम से झूठे बयान फैलाए जा सकते हैं। इसलिए,सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय किसी भी कंटेंट पर तब तक भरोसा न करें जब तक कि उसे किसी भरोसेमंद स्रोत से वेरिफाई न कर लिया जाए। हमें सोशल मीडिया के मामले में खुद पर अनुशासन रखना होगा। वरना,अगर आप किसी चीज पर बैन लगाते हैं, तो वह धोखाधड़ी वाले बाजार में चली जाती है। ऐसा नहीं होना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा में शास्त्रार्थ की समृद्ध परंपरा रही है, जिसमें केवल वाद-विवाद नहीं, बल्कि पूर्वपक्ष और उत्तरपक्ष के माध्यम से किसी विषय के सभी पक्षों पर विचार किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब विभिन्न और परस्पर विरोधी मत भी सामने आते हैं,तभी किसी विषय की समग्र समझ विकसित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में आंदोलन का भी महत्वपूर्ण स्थान है। यह कहना उचित नहीं होगा कि लोगों को आंदोलन नहीं करना चाहिए,बल्कि आंदोलन संविधान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डॉ। भीमराव आंबेडकर के विचारों में भी लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखने के स्पष्ट संकेत मिलते हैं। मोहन भागवत ने कहा कि यदि दिल्ली के लोग अपनी आवाज उठा रहे हैं तो वे केवल विरोध करने के लिए ऐसा नहीं कर रहे, बल्कि इसके पीछे कोई न कोई वास्तविक चिंता या समस्या अवश्य होगी। उन्होंने कहा कि वे कोई अलग लोग नहीं हैं,बल्कि हमारे अपने और हमारी अगली पीढ़ी हैं। इसलिए उनके साथ अपनत्व, विश्वास और संवाद का संबंध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब संबंधों में विश्वास होता है, तभी सार्थक संवाद संभव होता है और दोनों पक्ष एक-दूसरे की बात को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
संघ प्रमुख ने कहा कि पीढ़ी ज़ेड के बारे में नकारात्मक धारणा बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उनसे जब भी इस विषय पर प्रश्न पूछा गया,उन्होंने हमेशा यही कहा कि वर्तमान पीढ़ी की तुलना में नई पीढ़ी अधिक ईमानदार प्रतीत होती है।


Share

Check Also

झांसी@अतीक अहमद के छोटे बेटे की मौत…झांसी जेल

Share में बंद भाई अली से मिलने जा रहा था आबानझांसी,06 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश …

Leave a Reply