Breaking News

बैकुंठपुर/रायपुर@फीता काटकर छोड़ दिया या पर्यटन को सच में दौड़ाया?

Share

  • लोकार्पण के बाद पहिए चले या सिर्फ कैमरा? पर्यटक वाहन को लेकर कोरिया जन सहयोग समिति ने मांगा पूरा हिसाब
  • वाहन लोकार्पित हुआ था या सिर्फ लोकार्पण निभाया गया था? खरीद से लेकर वर्तमान ठिकाने तक जांच की मांग…
  • फीता कटा,फोटो खिंची…
  • फिर कहां गया पर्यटक वाहन?
  • पांच साल पुराना सवाल फिर सामने… कहां है वह पर्यटक वाहन? कोरिया जन सहयोग समिति ने पीसीसीएफ और वन विभाग के सचिव को सौंपा ज्ञापन
  • गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में 2022 के लोकार्पित वाहन पर सवाल,खरीद, क्रष्ट,संचालन,ईंधन और आय-व्यय की जांच की मांग,10 दिन का अल्टीमेटम


राजन पाण्डेय

बैकुंठपुर/रायपुर,21 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में वर्ष 2022 में हुए एक हाईप्रोफाइल कार्यक्रम के दौरान लोकार्पित किए गए कथित पर्यटक वाहन को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं,कोरिया जन सहयोग समिति ने दावा किया है कि कार्यक्रम के दौरान जिस वाहन को पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जनता को समर्पित किए जाने की बात सामने आई थी,वह वर्तमान में कहां है,इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसी मामले को लेकर समिति ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक रायपुर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।समिति ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि जून 2022 में आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृह मंत्री,प्रभारी सचिव,जिला प्रशासन तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में वाहन का लोकार्पण किया गया था,समिति का सवाल है कि यदि वाहन वास्तव में सरकारी योजना के तहत खरीदा गया था और पर्यटन के लिए उपलब्ध कराया गया था,तो लोकार्पण के बाद उसका संचालन कहां हुआ,उसका रिकॉर्ड किसके पास है और वर्तमान में वाहन की वास्तविक स्थिति क्या है।
लोकार्पण के बाद वाहन का रिकॉर्ड कहां?-समिति के अनुसार पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जिस वाहन को सार्वजनिक रूप से लोकार्पित किया गया, उसके बाद उसके उपयोग और संचालन से संबंधित जानकारी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है,समिति ने वन विभाग से वाहन की खरीद,पंजीयन,बीमा,संचालन,ईंधन,चालक, रखरखाव तथा राजस्व से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है,समिति का कहना है कि यदि वाहन सरकारी राशि से खरीदा गया था तो उसकी खरीद से संबंधित प्रत्येक दस्तावेज विभागीय रिकॉर्ड में होना चाहिए। वहीं यदि वाहन किराये पर लिया गया था तो उसके लिए स्वीकृति,भुगतान,अनुबंध और निविदा अथवा निर्धारित प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए,इन दस्तावेजों की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लोकार्पित वाहन वास्तव में किस उद्देश्य और किस प्रक्रिया के तहत कार्यक्रम में लाया गया था।
ईको विकास समिति को मिला था वाहन या नहीं?-ज्ञापन में ईको विकास समिति की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाया गया है,समिति ने पूछा है कि यदि वाहन का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देना और ग्रामीणों के लिए रोजगार का अवसर उपलब्ध कराना था,तो क्या वाहन को संबंधित ईको विकास समिति को विधिवत सुपुर्द किया गया था,इसके लिए समिति ने सुपुर्दगी पत्र, बैठक की कार्यवाही,वाहन संचालन संबंधी आदेश तथा संबंधित समिति के अभिलेखों की जांच की मांग की है, सरकारी स्तर पर भी गुरु घासीदास-तमोर पिंगला क्षेत्र में ईको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए गाइड,पर्यटक वाहन और अन्य पर्यटन गतिविधियों में रोजगार सृजन की बात कही गई है।
पर्यटकों से हुई आय और खर्च का भी हिसाब मांगा-समिति ने जून 2022 से अब तक यदि संबंधित वाहन का उपयोग पर्यटकों के लिए किया गया है तो उससे प्राप्त आय का पूरा हिसाब सामने लाने की मांग की है,ज्ञापन में पूछा गया है कि पर्यटकों से प्राप्त राशि किस बैंक खाते में जमा की गई, उसकी रसीदें कहां हैं और उस राशि का उपयोग किस मद में किया गया,इसी तरह चालक के मानदेय या वेतन,ईंधन, मरम्मत,सर्विसिंग तथा अन्य संचालन खर्च का भी विवरण मांगा गया है। समिति का कहना है कि वाहन के वास्तविक संचालन की पुष्टि उसके लॉगबुक,ईंधन पर्चियों,भुगतान वाउचर और बैंक रिकॉर्ड से की जा सकती है।
भौतिक सत्यापन की मांग-मामले में समिति ने वाहन के भौतिक सत्यापन की मांग को भी प्रमुखता से उठाया है, समिति का सवाल है कि यदि वाहन विभागीय दस्तावेजों में मौजूद है तो वर्तमान में वह किस स्थान पर खड़ा है और किसके कब्जे अथवा नियंत्रण में है, समिति ने मांग की है कि वाहन की मौके पर जांच कर उसके चेसिस और इंजन नंबर का मिलान विभागीय दस्तावेजों से कराया जाए, इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि लोकार्पण के दौरान दिखाया गया वाहन और वर्तमान में उपलब्ध वाहन एक ही है या नहीं।
अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग-ज्ञापन में समिति ने पूरे मामले की जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करने की मांग की है,समिति ने कहा है कि यदि जांच में रिकॉर्ड में किसी प्रकार की गड़बड़ी,वित्तीय अनियमितता अथवा सरकारी संपत्ति के संचालन में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए,हालांकि, समिति द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए मामले में वन विभाग और संबंधित अधिकारियों का पक्ष तथा मूल विभागीय दस्तावेज जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
10 दिन का अल्टीमेटम,न्यायालय जाने की बात-कोरिया जन सहयोग समिति ने ज्ञापन में मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, समिति ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान,लॉगबुक, स्टॉक रजिस्टर,खरीद अथवा किराया संबंधी फाइल,निविदा दस्तावेज,भुगतान अभिलेख तथा ईको विकास समिति के बैंक खातों की जांच कराने की मांग की है,समिति ने शासन और वन विभाग को 10 दिनों का समय देते हुए कहा है कि इस अवधि में यदि निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच शुरू नहीं की गई तो वह जनहित के मुद्दे को लेकर उच्च न्यायालय की शरण लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
समिति पदाधिकारियों ने कहा-रिकॉर्ड सामने आना जरूरी-समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र रजवाड़े, कार्यकारी अध्यक्ष एवं अधिवक्ता जय चंद सोनपाकर,उपाध्यक्ष राजू साहू,कानूनी सलाहकार अधिवक्ता रज़ा अली अंसारी तथा अधिवक्ता संजय साहू ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों और सार्वजनिक धन से जुड़े मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है,पदाधिकारियों का कहना है कि यदि वाहन नियमानुसार खरीदा गया,विधिवत दर्ज हुआ और उसका उपयोग पर्यटन के लिए किया गया है तो विभाग को इससे संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, अब पूरे मामले में वन विभाग और शासन की ओर से क्या जवाब सामने आता है और वर्ष 2022 में लोकार्पित बताए जा रहे इस पर्यटक वाहन की वर्तमान स्थिति क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। समिति की 10 दिन की समय-सीमा के बाद मामले की अगली कार्रवाई पर भी क्षेत्र की नजर रहेगी।
खरीदी हुई या केवल कार्यक्रम के लिए किराये पर?
ज्ञापन में समिति ने वन विभाग से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि संबंधित वाहन वास्तव में विभाग द्वारा खरीदा गया था अथवा कार्यक्रम के दौरान केवल प्रदर्शन या लोकार्पण के लिए किराये पर लाया गया था, यदि वाहन खरीदा गया था तो उसकी कुल लागत कितनी थी,किस योजना या बजट मद से राशि खर्च की गई और किस एजेंसी से वाहन खरीदा गया…इन सभी बिंदुओं की जानकारी मांगी गई है, समिति ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि वाहन की खरीद की गई थी तो उसकी निविदा प्रक्रिया क्या थी और क्या नियमानुसार टेंडर या अन्य निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई थी,समिति के मुताबिक इन सवालों का जवाब संबंधित खरीद फाइल और भुगतान अभिलेखों से स्पष्ट हो सकता है।
आरसी, चेसिस नंबर और इंजन नंबर की भी मांगी जानकारी
समिति ने वाहन के पंजीयन को लेकर भी सवाल उठाया है, ज्ञापन में वाहन का आरसी, चेसिस नंबर,इंजन नंबर और पंजीयन किसके नाम पर है,इसकी जानकारी मांगी गई है, इसके साथ ही वाहन की विभागीय संपत्ति के रूप में स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि,बीमा, फिटनेस तथा प्रदूषण प्रमाण पत्र की स्थिति भी स्पष्ट करने की मांग की गई है, समिति का तर्क है कि किसी सरकारी वाहन की वास्तविक स्थिति की पुष्टि केवल मौखिक जानकारी से नहीं,बल्कि उसके पंजीयन और विभागीय अभिलेखों से की जा सकती है। ऐसे में इन दस्तावेजों की जांच को मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


Share

Check Also

रायपुर@ महादेव बेटिंग की रकम शेयर बाजार में लगाने का आरोप

Share EaseMyTrip प्रमोटर निशांत पिट्टी पर ईडी की चार्जशीट,59.60 करोड़ के शेयर अटैचरायपुर,२1 सितम्बर 2026। …

Leave a Reply