दीपावली पर स्व-सहायता समूहों और कुम्हार परिवारों के उत्पाद अपनाने की अपील,स्थानीय खरीदारी से मजबूत होगी छोटे कारोबारियों की आजीविका
-संवाददाता-
बैकुंठपुर (कोरिया),07 नवम्बर 2026 (घटती-घटना)। दीपावली का पर्व केवल घरों को रोशनी से सजाने और खुशियां मनाने का अवसर नहीं, बल्कि उन हाथों को सम्मान देने का भी समय है, जिनकी मेहनत से हमारी परंपराएं और स्थानीय हुनर जीवित हैं,इसी संदेश के साथ कोरिया कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने दीपावली की तैयारियों के बीच स्व-सहायता समूह द्वारा लगाए गए स्टॉल से मिट्टी के दीये और आकर्षक झालर खरीदकर स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित किया। समाज कल्याण विभाग, बैकुंठपुर के सामने लगाए गए स्टॉल पर पहुंचकर उन्होंने खरीदारी की और जिलेवासियों से भी इस दीपावली स्थानीय कारीगरों तथा स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। कलेक्टर यादव की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब दीपावली के अवसर पर बाजारों में सजावटी सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक झालर और अन्य आधुनिक उत्पादों की मांग बढ़ जाती है, इस प्रतिस्पर्धा के बीच मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हार परिवारों और स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाले स्व-सहायता समूहों के सामने अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की चुनौती रहती है,ऐसे में स्थानीय स्तर पर तैयार सामग्री की खरीदारी को बढ़ावा देना इन परिवारों की मेहनत को आर्थिक संबल देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
जिलेवासियों को दी दीपावली की शुभकामनाएं-कलेक्टर श्रीमती यादव ने जिलेवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की, उन्होंने किसानों, ग्रामीणों और समस्त नागरिकों से इस पर्व पर जिले के विकास में अपनी भागीदारी निभाने का संकल्प लेने की अपील की, उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग और सहभागिता से कोरिया जिले को विकास की हर दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है, दीपावली पर कलेक्टर की इस पहल का संदेश स्पष्ट है कि त्योहार की असली खुशियां तभी व्यापक होंगी,जब उनकी रोशनी स्थानीय कारीगरों और मेहनतकश परिवारों के घरों तक भी पहुंचेगी, घरों में मिट्टी के दीये जलाने के साथ यदि स्थानीय उत्पादों को खरीदने की परंपरा भी मजबूत होती है, तो यह दीपावली छोटे कारोबारियों और स्व-सहायता समूहों के लिए भी खुशहाली का अवसर बन सकती है।
स्थानीय खरीदारी से कारीगरों की मेहनत को मिलेगा सम्मान
कलेक्टर श्रीमती यादव ने जिले एवं नगरवासियों से अपील की कि दीपावली पर स्व-सहायता समूहों और स्थानीय कुम्हार परिवारों द्वारा तैयार मिट्टी के दीये खरीदें,उन्होंने स्थानीय उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इससे इन परिवारों की मेहनत को सम्मान मिलेगा और उनकी आजीविका को सहयोग प्राप्त होगा, मिट्टी के दीये केवल दीपावली की परंपरा का हिस्सा नहीं हैं,बल्कि इनके निर्माण के पीछे कुम्हार परिवारों की पीढि़यों से चली आ रही कला और मेहनत जुड़ी होती है,मिट्टी जुटाने से लेकर उसे आकार देने,सुखाने और पकाने तक की पूरी प्रक्रिया में समय और श्रम लगता है,त्योहार के मौसम में दीयों की बिक्री से इन परिवारों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलता है,वहीं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से तैयार सजावटी सामग्री और झालर महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का जरिया बनती हैं।
आधुनिक बाजार में परंपरागत उत्पादों को बनाए रखने की जरूरत
बदलते समय के साथ दीपावली की सजावट के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है, बाजार में बिजली से चलने वाली झालरों और आकर्षक सजावटी सामानों की भरमार है,लेकिन पारंपरिक मिट्टी के दीयों का अपना सांस्कृतिक महत्व आज भी कायम है, ऐसे में स्थानीय उत्पादों को अपनाने की अपील केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक कारीगरी को जीवित रखने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का संदेश भी देती है,यदि त्योहारों के दौरान उपभोक्ता स्थानीय कुम्हारों और स्व-सहायता समूहों से सीधे उत्पाद खरीदते हैं,तो इसका लाभ स्थानीय स्तर पर ही पहुंचता है, इससे छोटे उत्पादकों को बाजार मिलता है और उनकी मेहनत का प्रतिफल भी सीधे उनके परिवारों तक पहुंचता है, स्थानीय खरीदारी की यह भावना ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच एक मजबूत संबंध स्थापित कर सकती है।
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