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कविता@नोहय नारी अब तो अबला…

नोहय नारी अब तो अबलाबनगे हावे अब ए ह सबला।नारी बिना हे ए जग ह सुन्नातारय इही हर इही जग ला।।तहीं हर लक्ष्मी तहीं हर दुर्गातहीं ऋषिनारी बने अहिल्या।ज्ञान देवइया तहीं ह सरसतीराम के माई तहीं ह कौसल्या।।तय हरस दाई तय हर दीदीतहीं ह बहिनी जीवन साथी।तहीं ह शक्ति तहीं हर श्रद्धाघर-परिवार के बने सारथी।।सृष्टि के तहीं ह बने रचइयाए …

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कविता@मया लागे …

मया पिरित के नाता जोड़केसंग रहिबो के रद्दा देखाएसजिनगी जिबो जियत मरत लेकिरिया कसम मोला खवाएसमिले के आस म बाट जोहतरद्दा निहारत सांझ ले पहाएसमोर खातिर तैंय आस लगाकेसुसक सुसक के आंसू बोहाएसजियत भर ले मोला मया करबेदगा देके अपन ले झन अलगाबेसोनु सरिक मयारु नई मिलहीअईसन युवा कवि कहां पाबे!!

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लेख@चमचों जैसे इंसानी शक्ल के कागजी शेर

आजकल जहाँ देखो वहां हरेक नेता,विभाग प्रमुख, समाज प्रमुख,घर प्रमुख से लेकर हर मुख को चम्मच की आवश्यकता होती है,और बिना चम्मच के सब अधूरे है। चम्मच असल में सामान्य से लेकर बहुमूल्य धातु की हुआ करती थी जिसमें राजे महाराजे पूंजीपति सोने-चांदी की चम्मच से सामान्य व्यक्ति तांबे-पीतल की चम्मच से और गरीब व्यक्ति लोहे स्टील की चम्मच से …

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