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कविता@मया लागे …

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मया पिरित के नाता जोड़के
संग रहिबो के रद्दा देखाएस
जिनगी जिबो जियत मरत ले
किरिया कसम मोला खवाएस
मिले के आस म बाट जोहत
रद्दा निहारत सांझ ले पहाएस
मोर खातिर तैंय आस लगाके
सुसक सुसक के आंसू बोहाएस
जियत भर ले मोला मया करबे
दगा देके अपन ले झन अलगाबे
सोनु सरिक मयारु नई मिलही
अईसन युवा कवि कहां पाबे!!


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