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महापुरुषों,स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और अमर शहीदों की चित्र प्रदर्शनी ने बच्चों में जगाया राष्ट्रभक्ति का भाव
शहीद परिजन,भूतपूर्व सैनिक, समाजसेवी और विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से किया संवाद, पेंटिंग प्रतियोगिता और न्योता भोजन भी बना आकर्षण
-संवाददाता-
सूरजपुर,01 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मकता, राष्ट्रभक्ति,सामाजिक सरोकार और नैतिक मूल्यों का भी विकास हो—इसी उद्देश्य के साथ जिले के सभी प्राथमिक,माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में शनिवार को ‘बैगलेस डे’ उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालयों में महापुरुषों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों,वीर शहीदों और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली विभूतियों के जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी, पेंटिंग प्रतियोगिता, प्रेरक व्याख्यान,संवाद कार्यक्रम तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया,कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर श्रीमती रेना जमील एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत विजेंद्र सिंह पाटले के मार्गदर्शन,जिला शिक्षा अधिकारी लता बेक तथा जिला मिशन समन्वयक मनोज कुमार साहू के निर्देशन में जिले के सभी शासकीय विद्यालयों में एक साथ किया गया।
किताबों की जगह रंगों से सीखा इतिहास–बैगलेस डे के तहत इस बार विद्यार्थियों ने पुस्तकों के बजाय रंगों और
कल्पनाशीलता के माध्यम से इतिहास को समझने का प्रयास किया,बच्चों ने स्वयं महात्मा गांधी,नेताजी सुभाष चंद्र बोस,भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद,रानी लक्ष्मीबाई,डॉ. भीमराव अंबेडकर,बिरसा मुंडा,स्वामी विवेकानंद,डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम सहित अनेक महापुरुषों और अमर शहीदों के चित्र बनाए,स्क्रैच आर्ट,रंगोली शैली,पेंटिंग एवं हस्तनिर्मित पोस्टरों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी कला का परिचय देते हुए स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। विद्यालय परिसर देशभक्ति के रंगों से सराबोर दिखाई दिए।
स्वतंत्रता सेनानी गोकुल प्रसाद के संघर्ष का किया स्मरण कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी गोकुल प्रसाद के जीवन पर भी प्रकाश डाला, बताया गया कि वर्ष 1925 में वे दुर्ग से उदयपुर पहुंचे और बाद में सूरजपुर क्षेत्र आए,हरिद्वार में आर्य समाज के संपर्क में आने के बाद वे वंदे मातरम आंदोलन से जुड़े,हैदराबाद में आयोजित आंदोलन के दौरान अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया,जहां अमानवीय यातनाएं सहते हुए 1 अप्रैल 1939 को उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, वक्ताओं ने कहा कि ऐसे महान बलिदानों की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने साझा किए सफलता के अनुभव-भैयाथान विकासखंड के हायर सेकेंडरी स्कूल गंगोटी में अधिवक्ता अनिल गोयल,पूर्व एसडीओ जल संसाधन एस.के. तिवारी,सेवानिवृत्त शिक्षक रविशंकर मिश्रा,समाजसेवी लालचंद अग्रवाल तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन,परिश्रम और नैतिकता का महत्व बताया,वहीं रामानुजनगर विकासखंड के बालक माध्यमिक शाला रामानुजनगर में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय साहू,चार्टर्ड अकाउंटेंट स्वयं गोयल तथा जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा ने विद्यार्थियों से संवाद किया,उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों और सफलता की कहानियां साझा करते हुए बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें मेहनत से पूरा करने की प्रेरणा दी, विद्यार्थियों ने भी अपने भविष्य के लक्ष्य बताते हुए डॉक्टर, इंजीनियर, सैनिक,शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी बनने की इच्छा व्यक्त की।
प्रतियोगिताओं में दिखी रचनात्मकता-बैगलेस डे के दौरान विभिन्न विद्यालयों में चित्रकला एवं पेंटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम,द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया, इससे बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिला।
पोषण वाटिका और न्योता भोजन भी बना आकर्षण-शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ विद्यालयों में पोषण वाटिका का विस्तार भी किया गया,इसके अलावा न्योता भोजन कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित की गई,इससे विद्यालय और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया गया।
प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
विद्यालयों में लगाई गई चित्र प्रदर्शनी का शिक्षकों,अभिभावकों,जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने भी अवलोकन किया,प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों को महापुरुषों के जीवन,उनके संघर्ष,त्याग और राष्ट्र निर्माण में योगदान की जानकारी दी गई, बच्चों ने स्वयं अपने चित्रों का परिचय देते हुए बताया कि वे किस महापुरुष से प्रेरणा लेते हैं और क्यों।
शहीद परिवारों ने सुनाई बलिदान की गाथा
प्रतापपुर विकासखंड के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सरहरी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू परमानंद कोसरिया के पुत्र कमलेश कोसरिया तथा सीमा पर देश सेवा कर चुके भूतपूर्व सैनिक शिवचरण नापित विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित हुए,उन्होंने विद्यार्थियों को स्वतंत्रता आंदोलन,देशभक्ति और राष्ट्रसेवा के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी,इसी प्रकार सूरजपुर विकासखंड के माध्यमिक शाला रुनियाडीह में शहीद परिवार के प्रतिनिधि अंकित कोसरिया ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की प्रेरक कहानियां साझा कीं।
हर शनिवार होगा सीखने का नया अनुभव
जिला मिशन समन्वयक मनोज कुमार साहू ने बताया कि ‘बैगलेस डे’ स्कूल शिक्षा विभाग एवं राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा की पहल है,यह प्रत्येक शनिवार आयोजित होने वाला सतत कार्यक्रम है,जिसका उद्देश्य बच्चों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ व्यवहारिक,रचनात्मक एवं अनुभवात्मक शिक्षा प्रदान करना है,उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से जनप्रतिनिधियों, सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों, समाजसेवियों,सफल व्यक्तियों, पालकों एवं स्कूल प्रबंधन समितियों को विद्यालयों से जोड़कर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षा के साथ संस्कारों का भी हुआ समावेश
कार्यक्रम में सहायक संचालक शिक्षा अजय सिंह, विकासखंड शिक्षा अधिकारी,विकासखंड स्त्रोत समन्वयक, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी, संकुल प्राचार्य एवं संकुल समन्वयकों सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विभिन्न विद्यालयों में पहुंचकर गतिविधियों का अवलोकन किया, बैगलेस डे के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में देशभक्ति, संस्कार,सामाजिक उत्तरदायित्व,रचनात्मकता और व्यक्तित्व विकास के अवसर भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से प्रेरणा लेकर विद्यार्थी न केवल अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं,बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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