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कविता@ठंडी-ठंडी चीजें…

गर्मी आई,सूरज गरम,हर कोई बोले — हाय राम!ऐसे में जो साथ निभाए,ठंडी-ठंडी चीज़ें भाए।नींबू पानी,जलजीरा प्यारा,पीते ही मन हो जाये हारा।छाछ,लस्सी,आम का पना,इनसे भागे गर्मी का ग़म सारा।तरबूज,खीरा,और खरबूजा,थाली में दिखे जैसे कोई पूजा।आइसक्रीम और कुल्फ़ी आई,मीठी ठंडक साथ में लाई।घर में दादी बनाएँ शरबत,रंग-बिरंगे, खुशबू में भरकत।साफ पानी खूब पिएँ,धूप में कम ही बाहर जाएँ।गर्मी में ये दोस्त हमारे,ठंडी-ठंडी …

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कविता@शरारती चूहा …

चूहा बिल्ली खेल निराला।बिल्ली गोरी चूहा काला।।बिल्ली चूहे को दौड़ाए।चूहा झट बिल में घुस जाए।।खूब करे पकड़म–पकड़ाई।छिप कर चूहा ले अँगड़ाई।।पर बिल्ली के हाथ न आता।झाँक–झाँक कर खूब चिढ़ाता।।चिढ़ जाती खिसियानी बिल्ली।चूहा रोज उड़ाता खिल्ली।।

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लेख@पुण्यश्लोकःन्यायमूर्ति, लोकमाता अहिल्याबाई होलकर

महारानी,इंसाफ की देवी, जनसरोकारी,अहिल्याबाई होलकर मराठा साम्राज्य की एक प्रसिद्ध शासिका और मालवा क्षेत्र में होलकर राजवंश की संस्थापक थीं। अहिल्याबाई होलकर का जन्म 31 मई, 1725 को चौंडी गांव, अहिल्यानगर जिला,महाराष्ट्र में हुआ था। उनका विवाह मल्हार राव होलकर के पुत्र खंडेराव होलकर से हुआ था। खंडेराव की मृत्यु के बाद, अहिल्याबाई ने प्रशासन संभाला और अपने राज्य को …

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