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कविता@ठंडी-ठंडी चीजें…

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गर्मी आई,सूरज गरम,
हर कोई बोले — हाय राम!
ऐसे में जो साथ निभाए,
ठंडी-ठंडी चीज़ें भाए।
नींबू पानी,जलजीरा प्यारा,
पीते ही मन हो जाये हारा।
छाछ,लस्सी,आम का पना,
इनसे भागे गर्मी का ग़म सारा।
तरबूज,खीरा,और खरबूजा,
थाली में दिखे जैसे कोई पूजा।
आइसक्रीम और कुल्फ़ी आई,
मीठी ठंडक साथ में लाई।
घर में दादी बनाएँ शरबत,
रंग-बिरंगे, खुशबू में भरकत।
साफ पानी खूब पिएँ,
धूप में कम ही बाहर जाएँ।
गर्मी में ये दोस्त हमारे,
ठंडी-ठंडी ख्वाहिश सारे!


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