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कविता @ शिव का नाम अनूठा…

ओ शिव भोले,ओ शिव भोले,जीवन में कितना रस घोले,मन के प्राण में बस गए भोले,नव-निर्माण में रम गए भोले।ओ शिव भोले….मन आकुल है दरश को तेरे,छवि दिखला दो मेरे भोले,मन विचलित ना होने पाए,सब रंग उसमें भर दो भोले।ओ शिव भोले….तपन भले कैसी हो भोले,उसमें तुम शीतलता भर दो,करुणा के हो सागर भोले,प्रीत से मन की गागर भर दो।ओ शिव …

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लेख @ दतुअन वाली बुढि़या

तड़के सुबह गली में हमेशा की तरह बेसुरा आवाज में गला फाड़ती बçुढ़या मुखारी ले ला ओ मुखारी।रोज मेरी मीठी नींद टूट जाती,मन किया की बçुढ़या को डांट डपट कर कर भगा दूं कम से कम मेरे घर के सामने डंका ना दे । यह सोचकर भन्नाया हुआ घर से बाहर आया,बçुढ़या काफी दूर जा चुकी थी उसके सिर का …

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लेख @ बेटियां:विरासत नहीं,संवेदना का सचपितृसत्ता की विरासत में बेटियों की अनदेखी

लिपट के रोये हैं बेटियों से अपनी हालत पे,जो कहते थे विरासत के लिये बेटा जरूरी है…यह शेर एक टीस है,एक कराह है उस व्यवस्था की,जिसने बेटियों को सिर्फ¸ पराया धन समझ कर हमेशा हाशिए पर रखा। आज जब समाज के कंधे झुकते हैं,आँखें नम होती हैं,तो वही बेटियाँ उस पीड़ा की ढाल बनती हैं। जिनको कभी यह कहकर पराया …

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