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कविता @ शिव का नाम अनूठा…

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ओ शिव भोले,ओ शिव भोले,
जीवन में कितना रस घोले,
मन के प्राण में बस गए भोले,
नव-निर्माण में रम गए भोले।
ओ शिव भोले….
मन आकुल है दरश को तेरे,
छवि दिखला दो मेरे भोले,
मन विचलित ना होने पाए,
सब रंग उसमें भर दो भोले।
ओ शिव भोले….
तपन भले कैसी हो भोले,
उसमें तुम शीतलता भर दो,
करुणा के हो सागर भोले,
प्रीत से मन की गागर भर दो।
ओ शिव भोले….
हर रज कण हो प्रेम में डूबा,
शिव-शिव का ले नाम अनूठा,
भोले भक्ति करने से जीवन,
मुस्कानों से रहे ना रीता।
ओ शिव भोले….
आओ भोले की दुनिया में,
कुछ ऐसा हम कर जाएं,
शिव समान दाता नहीं कोई,
आओ हम उनके हो जाएं।
ओ शिव भोले…।।


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