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घुमन्तु गीत सीरीज… @पुलिसिया इनकाउंटर

कल मैं एक समारोह में गयी हुई थी, वहां एक पुरानी सहेली से मिलना भी तय था, और मैं बेसब्री से उसके लिए प्रतीक्षारत थी। अचानक मैंने देखा वो ज़ोरदार ठहाके लगाते हुए अकेले ही दौड़ती हुई मेरी ओर बढ़ी आ रही है।मैंने कहा, अरे अब कौन सी लाफ्टर गैस सूंघ ली, जो इतना हंसती जा रही हो?वो कुछ कहने …

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लेख@ बच्चों में बढ़ता डिप्रेशन:क्या खराब पेरेंटिंग है जिम्मेदार?

आज की युवा पीढ़ी एक अजीब सी मानसिक उलझन में फंसी हुई है। एक ओर वे अपने करियर को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं, तो दूसरी ओर उनका झुकाव भौतिकतावादी जीवनशैली की ओर बढ़ता जा रहा है। माता-पिता और बच्चों के बीच की दूरी बढ़ रही है, जिसके चलते बच्चे सही मार्गदर्शन से वंचित रह जाते हैं। नैतिक मूल्यों में गिरावट, …

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लेख@ पच्चास साल बाद होने वाली परिसीमन को लेकर चिंताएँ

राजकोषीय संघवाद और संस्थागत ढांचे को मज़बूत करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि राजनीतिक निष्पक्षता जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के साथ मिलीजुली हो, जिससे एक सुसंगत और एकजुट भारत को बढ़ावा मिले। लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से नागरिकों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों का आकार छोटा होगा और शासन में सुधार होगा। संसदीय सीटों को 543 से …

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