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SIR का विरोध: चिंता लोकतंत्र की या वोट बैंक की

ललित गर्ग ‘‘ भारत का लोकतंत्र आज जिस निर्णायक मोड़ पर खड़ा है,वहां उसकी विश्वसनीयता और मजबूती का सवाल पहलेसे कहीं अधिक गंभीर हो गया है। चुनावों की पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुचिता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से मतदाता पहचानकी सत्यता को बनाए रखना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं,बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को सुरक्षित रखने का मूल तत्व है।’’विशेष गहन …

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बेलगाम होती भाषाई अराजकता, सियासी नाकामी से उपजी कुंठा

उमेश चतुर्वेदीइसे विडंबना ही कहेंगे कि जब भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है और विकसित भारत की बातें हो रही हैं, तब देश के कुछ हिस्सों में भाषाई अराजकता बेलगाम हो रही है। मान्यता है कि शिक्षा और समृद्धि के साथ असमानता और संकीर्णता का भाव तिरोहित हो जाता है, लेकिन अपेक्षाकृत …

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क्या बीजेपी आगे बढ़ाएगी नीतीश की विरासत?आलाकमान के इन फैसलों से मिल रहे संकेत

पूनम पाण्डेबिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के साथ ही यह भी अहम है कि इस बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है। दूसरे नंबर पर एनडीए है। जिस तरह मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा हुआ, उससे इस पर चर्चा होने लगी है कि क्या बिहार में सत्ता के समीकरण बदलेंगे और क्या बीजेपी ही नीतीश कुमार …

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