बिलासपुर,11 जून 2026 (घटती-घटना)। बिलासपुर के पत्रकारों ने हाल ही में दो पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज की गई एफआईआर को लेकर गहरा विरोध दर्ज कराया है। पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने रेंज आईजी रामगोपाल गर्ग एवं कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर पत्रकार सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के पालन और निष्पक्ष जांच की मांग की। पत्रकारों ने मांग की कि जांच पूरी होने तक संबंधित पत्रकारों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए।
पत्रकारों ने अधिकारियों को सौंपे ज्ञापन में कहा कि हाल के दिनों में पत्रकारों के विरुद्ध की गई पुलिस कार्रवाई से पत्रकार समुदाय में असुरक्षा और भय का माहौल बना है। उनका आरोप है कि शासन द्वारा निर्धारित पत्रकार सुरक्षा संबंधी प्रावधानों एवं जांच प्रक्रिया का पालन किए बिना एफआईआर दर्ज की गई, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता प्रभावित होने की आशंका है।
क्या है पूरा मामला?
सिविल लाइन थाना के पुराने भवन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वर्दीधारी आरक्षक मनोज साहू एक कमरे में सोते हुए दिखाई दे रहे थे, जबकि दूसरे कमरे में बीयर एवं शराब की बोतलें रखी नजर आ रही थीं। इस वीडियो को कई समाचार पोर्टलों और मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित किया था। समाचारों में पुलिस प्रशासन का पक्ष भी शामिल किया गया था, जिसमें जांच और आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई थी।
इसके बाद आरक्षक मनोज साहू और एक चाय दुकान संचालक के बीच कथित बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ। ऑडियो में वीडियो सार्वजनिक न करने के बदले कथित रूप से धन मांगने की बात कही गई। इसी आधार पर पुलिस ने पत्रकार जिया खान, अनुज श्रीवास्तव सहित अन्य लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली।
पत्रकारों का आरोप
पत्रकार समुदाय का कहना है कि एफआईआर दर्ज करने से पहले न तो संबंधित पत्रकारों का बयान लिया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया। उनका आरोप है कि किसी स्वतंत्र साक्ष्य या निष्पक्ष जांच के बिना सीधे आपराधिक प्रकरण दर्ज करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
पत्रकारों ने यह भी दावा किया कि शासन द्वारा पत्रकारों से जुड़े मामलों में जांच के लिए समिति गठित करने तथा जांच के बाद ही एफआईआर जैसी कार्रवाई करने के निर्देश पूर्व से मौजूद हैं। उनका कहना है कि इस प्रकरण में ऐसी किसी समिति द्वारा जांच किए जाने की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
प्रमुख मांगें
पत्रकारों ने प्रशासन से मांग की है कि—
पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
पत्रकार सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के पालन की स्थिति स्पष्ट की जाए।
भविष्य में पत्रकारों के विरुद्ध किसी भी शिकायत पर पहले जांच कराई जाए, उसके बाद ही कानूनी कार्रवाई की जाए।
पत्रकारों की सुरक्षा, प्रेस की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई और पत्रकार सुरक्षा संबंधी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो पत्रकार समुदाय 15 जून 2026 से चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगा। इसमें धरना, प्रदर्शन, जनजागरण अभियान और अन्य शांतिपूर्ण कार्यक्रम शामिल होंगे।
मुलाकात के दौरान आईजी रामगोपाल गर्ग और कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पत्रकारों को आश्वस्त किया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा तथा मामले को गंभीरता से देखा जाएगा।
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