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सूरजपुर@ खुफिया सूचना पर ओड़गी-भैयाथान मार्ग में घेराबंदी कर दबोचे गए आरोपी

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वन अपराध प्रकरण दर्ज, अन्य आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू
-संवाददाता-
सूरजपुर,29 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सूरजपुर वनमंडल को एक बड़ी सफलता मिली है,वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो सेंट्रल रीजन भोपाल और सूरजपुर वन विभाग की संयुक्त टीम ने बाघ की खाल एवं पैंगोलिन (सल्लू सांप) के शल्क (स्केल) की अवैध तस्करी के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है,आरोपियों के कब्जे से बाघ की खाल (मांस सहित),पैंगोलिन के शल्क तथा घटना में प्रयुक्त एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है, मामले में वन अपराध दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। वन विभाग को आशंका है कि इस तस्करी के पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
संदेह के आधार पर रोका,तलाशी में मिला बाघ का अवशेष-घेराबंदी के दौरान भैयाथान की ओर से आ रहे तीन व्यक्तियों को रोककर पूछताछ की गई,प्रारंभिक पूछताछ में उनके जवाब और हावभाव संदिग्ध पाए गए। इसके बाद वन अधिकारियों ने उनके सामान की तलाशी ली,तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से बाघ की खाल (मांस सहित) तथा वन्यजीव पैंगोलिन (सल्लू सांप) के शल्क (स्केल) बरामद हुए, बरामदगी के बाद तीनों को मौके पर ही हिरासत में लेकर विस्तृत पूछताछ की गई।
तीनों आरोपी सूरजपुर जिले के निवासी-वन विभाग के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है, टिकेश्वर प्रसाद राजवाड़े (38 वर्ष) निवासी धरसेड़ी (नावापारा), थाना ओड़गी, जिला सूरजपुर, भुवनलाल (56 वर्ष) निवासी चंदरखोह (आमापानी), थाना ओड़गी, जिला सूरजपुर, राजेबलाल (58 वर्ष) निवासी चंदरखोह (आमापानी), थाना ओड़गी, जिला सूरजपुर, प्रारंभिक जांच में तीनों से वन्यजीव अवशेषों के स्रोत और संभावित खरीदारों के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
मोटरसाइकिल भी जब्त- कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से होंडा शाइन मोटरसाइकिल (पंजीयन क्रमांक CG-15 DN-7494) भी जब्त की गई। वन विभाग ने मौके पर पंचनामा तैयार कर वन्यजीव अवशेषों को विधिवत सीलबंद किया और सुरक्षित अभिरक्षा में रखा।
बाघ और पैंगोलिन दोनों संरक्षित वन्यजीव- बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम,1972 के अंतर्गत सर्वोच्च श्रेणी के संरक्षित वन्यजीवों में शामिल है, वहीं पैंगोलिन (सल्लू सांप) भी अत्यंत दुर्लभ एवं संरक्षित प्रजाति है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके शल्कों की अवैध मांग के कारण इसकी तस्करी लंबे समय से वन्यजीव अपराध का गंभीर विषय बनी हुई है,वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघ की खाल और पैंगोलिन के शल्कों की अंतरराष्ट्रीय काला बाजार में भारी मांग रहती है, जिसके चलते संगठित गिरोह लगातार इनकी तस्करी का प्रयास करते हैं।
भोपाल से मिली खुफिया सूचना,तत्काल गठित हुई संयुक्त टीम
वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 27 जुलाई 2026 को वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो सेंट्रल रीजन भोपाल से सूरजपुर वनमंडल को सूचना प्राप्त हुई थी कि वनमंडल क्षेत्र में बाघ की खाल एवं अन्य वन्यजीव अवशेषों की अवैध तस्करी की जा सकती है, सूचना मिलते ही वनमंडलाधिकारी सूरजपुर ने वन विभाग के अधिकारियों और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो भोपाल के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, टीम में वन विभाग के अधिकारियों के साथ वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के विशेषज्ञ अधिकारी भी शामिल रहे।
दो टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में शुरू किया सर्च ऑपरेशन
सूचना के आधार पर संयुक्त टीम को दो हिस्सों में बांटा गया,एक टीम ने वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो अधिकारियों के साथ मिलकर संदिग्ध स्थानों पर निगरानी शुरू की, जबकि दूसरी टीम को सूरजपुर एवं कुदरगढ़ वन क्षेत्र में सक्रिय किया गया, खुफिया सूचना के अनुसार संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और उनके संभावित मार्ग की पहचान की गई,इसके बाद ओड़गी-भैयाथान मार्ग पर ग्राम बैजनाथपुर के पास धरसेड़ी रोड में रणनीतिक घेराबंदी की गई।
वन अपराध प्रकरण दर्ज
वन विभाग ने आरोपियों के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण क्रमांक 809/24 दिनांक 28 जुलाई 2026 को दर्ज किया है, अब बरामद सामग्री की वैज्ञानिक जांच एवं फोरेंसिक परीक्षण सहित अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
अन्य आरोपियों की भी तलाश
वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में केवल तीन लोगों की गिरफ्तारी पर जांच समाप्त नहीं होगी, अधिकारियों का मानना है कि वन्यजीवों की तस्करी संगठित गिरोहों द्वारा की जाती है, जिनमें शिकार करने वाले, अवैध परिवहन करने वाले और खरीद-बिक्री करने वाले कई लोग शामिल हो सकते हैं, इसी कारण पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
वन विभाग ने लोगों से मांगा सहयोग
वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं वन्यजीवों के शिकार,उनके अंगों की खरीद-बिक्री या तस्करी जैसी गतिविधियों की जानकारी मिले तो तत्काल वन विभाग या संबंधित एजेंसियों को सूचना दें। विभाग का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।
जांच अभी जारी…
वन विभाग के अनुसार प्रकरण की विवेचना जारी है, आरोपियों से पूछताछ के आधार पर तस्करी से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, यदि जांच में किसी और की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


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