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अंबिकापुर@सुपरमैन रंजीत गुप्ता की टीम का फिर शिकंजा, 21 लीटर महुआ शराब के साथ आरोपी गिरफ्तार

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मठपारा में खुलेआम बिक्री की शिकायतों के बाद कार्रवाई,यामाहा स्कूटी भी जब्त,सवाल—बार-बार जेल जाने के बाद भी अवैध कारोबार क्यों नहीं रुका?

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,12 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। शहर में अवैध महुआ शराब के कारोबार पर लगाम कसने के लिए संभागीय आबकारी उड़नदस्ता एक बार फिर मैदान में नजर आया। शनिवार को मुखबिर की सूचना पर सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई करते हुए 21 लीटर महुआ शराब के साथ राजेंद्र सिंह सरदार को गिरफ्तार किया। शराब परिवहन में इस्तेमाल की जा रही यामाहा स्कूटी क्रमांक CG 15 EL 3101 को भी जब्त किया गया है। जानकारी के मुताबिक, आबकारी विभाग को शिकायत मिल रही थी कि न्यायालय परिसर अंबिकापुर के पीछे ठेला लगाकर महुआ शराब की कथित रूप से खुलेआम बिक्री की जा रही है। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि मठपारा निवासी राजेंद्र सिंह सरदार यामाहा स्कूटी से महुआ शराब लेकर लौट रहा है। सूचना के आधार पर उड़नदस्ता टीम ने करसू तालाब के पास घेराबंदी की और संदिग्ध को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान स्कूटी से दो बोरियों में रखी 21 लीटर महुआ शराब बरामद होने का दावा किया गया। आबकारी विभाग ने आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) एवं 59(क) के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल कराया।

शिकायतें लगातार,कार्रवाई भी लगातार—फिर कारोबार क्यों नहीं थमता?

इस कार्रवाई का एक दूसरा पहलू भी है। विभाग के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले भी महुआ शराब के मामले में कार्रवाई हो चुकी है और उसे जेल भेजा जा चुका है। इसके बावजूद उसके फिर कथित रूप से उसी कारोबार में सक्रिय मिलने से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जेल की कार्रवाई के बाद भी अवैध शराब का नेटवर्क आखिर टूट क्यों नहीं रहा?
क्या छोटे विक्रेताओं की गिरफ्तारी तक ही कार्रवाई सीमित है या उन लोगों तक भी जांच पहुंचती है, जहां से अवैध शराब की आपूर्ति होती है? यदि किसी इलाके में लगातार शिकायतें मिल रही हैं तो केवल विक्रेता पकड़ना पर्याप्त है या पूरे सप्लाई नेटवर्क की पड़ताल भी जरूरी है—यह सवाल अब आबकारी विभाग की कार्रवाई के साथ जुड़ गया है। हालांकि विभाग की ओर से आरोपी को आदतन अपराधी बताया गया है, लेकिन इस तरह के मामलों में अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

च्सुपरमैनज् रंजीत गुप्ता की टीम फिर चर्चा में…

अवैध शराब के खिलाफ अंबिकापुर में सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में पहले भी कई कार्रवाई सामने आ चुकी हैं। मई २०२५ में मठपारा में तीन कथित महुआ शराब विक्रेताओं पर कार्रवाई की खबर सामने आई थी। जून २०२६ में होटल दीप में कथित अवैध शराब बिक्री के मामले में भी उनकी टीम की कार्रवाई रिपोर्ट हुई थी।
अगस्त २०२६ में पटपरिया क्षेत्र में कथित अवैध महुआ शराब निर्माण के ठिकाने पर कार्रवाई के दौरान ७० लीटर तैयार शराब और ४८० किलो महुआ लाहन जब्त किए जाने की खबर भी सामने आई थी।
ऐसे में २१ लीटर महुआ शराब की यह कार्रवाई भले मात्रा के लिहाज से छोटी दिखाई दे, लेकिन बार-बार सामने आ रहे मामलों के बीच अवैध शराब के स्थानीय नेटवर्क पर स्थायी रोक लगाने की चुनौती बड़ी है। कार्रवाई में प्रधान आबकारी आरक्षक अशोक सोनी, नगर सैनिक गणेश पाण्डेय, रणविजय सिंह एवं रोहित सोनवानी की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है।


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