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सूरजपुर@ सहकारिता विभाग में ‘वजन’ की राजनीति? बोर्ड से हटे दुर्गाचरण सिंह…बैंक अधिकारी को मिली शक्तियां

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  • सहकारिता विभाग में आखिर चल क्या रहा है? बोर्ड की शक्तियां बैंक शाखा प्रबंधक को सौंपने पर उठे सवाल
  • बोर्ड से हटे दुर्गाचरण सिंह,
  • बैंक अधिकारी बने प्रशासक…आदेश पर उठे कई गंभीर सवाल सहकारिता विभाग के फैसलेपर सवाल, जो कल योग्य था, वह आज अयोग्य कैसे?
  • क्या सहकारिता विभाग में नियम नहीं, रिश्ते तय करते हैं पात्रता?
  • अध्यक्ष हटे, अफसर बैठे…सहकारिता विभाग के आदेश पर मचा बवाल
  • बोर्ड की कुर्सी से हटे दुर्गाचरण सिंह, शाखा प्रबंधक को मिला दोहरा प्रभार
  • सहकारिता विभाग में ‘पात्र’ से ‘अपात्र’ बनने की कहानी, आखिर जिम्मेदार कौन?
  • सोनपुर सेवा सहकारी समिति में दुर्गाचरण सिंह के स्थान पर बैंक शाखा प्रबंधक को बोर्ड की शक्तियां, सवाल—क्या कार्रवाई नियमों के तहत हुई या विभागीय खींचतान का परिणाम है?
  • ओंकार पाण्डेय-
  • सूरजपुर,29 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। सहकारिता विभाग हमेशा से किसानों,धान खरीदी,सहकारी समितियों और सरकारी योजनाओं के संचालन का सबसे महत्वपूर्ण विभाग माना जाता है,लेकिन विडंबना यह है कि यही विभाग समय-समय पर विवादों,शिकायतों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सबसे अधिक सवालों के घेरे में भी रहा है,धान खरीदी में गड़बडि़यां हों,बीमा भुगतान में अनियमितताओं के आरोप हों,समितियों के संचालन को लेकर विवाद हों या फिर बोर्ड के अधिकारों का इस्तेमाल—सहकारिता विभाग लगातार चर्चाओं में रहा है,अब सूरजपुर जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित सोनपुर से जुड़ा एक नया मामला सामने आया है,जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
  • उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं,सूरजपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार दुर्गाचरण सिंह से बोर्ड की शक्तियां वापस लेकर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की भैयाथान शाखा के शाखा प्रबंधक श्यामलाल सिंह को बोर्ड की शक्तियों के प्रयोग के लिए अधिकृत कर दिया गया है,दस्तावेज तो केवल एक आदेश बताते हैं, लेकिन इस आदेश के पीछे कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब शायद विभाग को देने होंगे, दैनिक घटती-घटना इस मामले में सहकारिता विभाग, संबंधित अधिकारियों एवं दुर्गाचरण सिंह का पक्ष भी प्रकाशित करेगा, ताकि पाठकों के सामने सभी पक्षों के साथ तथ्यात्मक और संतुलित तस्वीर प्रस्तुत की जा सके।
  • क्या सहकारिता विभाग में पात्रता परिस्थितियों के अनुसार बदलती है?
  • सहकारिता विभाग को लेकर लंबे समय से एक चर्चा आम है,जब तक समिति का पदाधिकारी अधिकारियों के साथ सामंजस्य बनाकर चलता है, तब तक वह योग्य माना जाता है, लेकिन जैसे ही मतभेद सामने आते हैं, शिकायतें शुरू हो जाती हैं, इसके बाद जांच, कार्रवाई और अधिकार वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है,यदि ऐसा नहीं है तो विभाग को पारदर्शिता के साथ यह बताना चाहिए कि इस मामले में कार्रवाई किन तथ्यों के आधार पर की गई।
  • एक अधिकारी… दो बड़ी जिम्मेदारियां-
  • नए आदेश के अनुसार अब श्यामलाल सिंह अपनी बैंक शाखा के नियमित कार्यों के साथ-साथ समिति के बोर्ड की शक्तियों का भी प्रयोग करेंगे,यानी वे बैंक संचालन भी देखेंगे, समिति के बोर्ड से जुड़े निर्णय भी लेंगे,ऐसे में प्रशासनिक विशेषज्ञों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या एक अधिकारी पर दोहरी जिम्मेदारी डालना व्यावहारिक है? क्या इससे दोनों संस्थाओं के काम प्रभावित नहीं होंगे? क्या हितों के टकराव जैसी स्थिति उत्पन्न होने की संभावना नहीं बनेगी?
  • क्या नियमों के तहत हुई कार्रवाई?
  • दस्तावेज के अनुसार यह आदेश छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 49(8) के अंतर्गत जारी किया गया है, कानून विभाग को यह अधिकार अवश्य देता है कि विशेष परिस्थितियों में बोर्ड की शक्तियों के प्रयोग के लिए किसी व्यक्ति या अधिकारी को अधिकृत किया जा सके,लेकिन ऐसे मामलों में यह अपेक्षा भी रहती है कि कार्रवाई के कारण स्पष्ट हों और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी दिखाई दे।
  • पहले योग्य…अब अयोग्य…आखिर क्यों?
  • उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 18 नवंबर 2024 को जारी आदेश क्रमांक 578 के माध्यम से दुर्गाचरण सिंह को आदिम जाति सेवा सहकारी समिति सोनपुर के बोर्ड की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकृत किया गया था,यानी उस समय विभाग की नजर में वे पूरी तरह योग्य थे,अब 24 जुलाई 2026 को जारी आदेश क्रमांक 513 में उन्हीं दुर्गाचरण सिंह के स्थान पर श्यामलाल सिंह को अधिकृत कर दिया गया,सबसे बड़ा प्रश्न यही है की यदि दुर्गाचरण सिंह योग्य नहीं थे तो उन्हें 2024 में यह जिम्मेदारी क्यों दी गई? और यदि वे योग्य थे तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि दो वर्ष के भीतर उन्हें हटाने की आवश्यकता पड़ गई? क्या उनके खिलाफ कोई जांच हुई? क्या उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया? क्या उनका पक्ष सुना गया? क्या किसी सक्षम जांच में उन्हें दोषी पाया गया? आदेश में इन प्रश्नों का कोई उल्लेख नहीं है।
  • क्या बोर्ड की शक्तियां केवल प्रशासनिक औपचारिकता हैं?
  • सहकारी समिति के बोर्ड की भूमिका केवल बैठकों तक सीमित नहीं होती, बोर्ड धान खरीदी से जुड़े निर्णय लेता है,समितियों के प्रशासनिक निर्णय करता है, वित्तीय मामलों पर निर्णय लेता है,किसानों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर अधिकार रखता है,ऐसे में यदि बोर्ड की शक्तियां किसी अधिकारी को दी जाती हैं तो वह केवल अतिरिक्त प्रभार नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व होता है।
  • सहकारिता विभाग पहले भी रहा है विवादों में…
  • सूरजपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में सहकारिता विभाग पहले भी कई मामलों को लेकर चर्चा में रहा है,धान खरीदी में गड़बड़ी के आरोप,बीमा भुगतान में अनियमितताओं की शिकायतें,समितियों के संचालन पर विवाद,प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर सवाल, बोर्ड की शक्तियों के उपयोग पर विवाद,ऐसे मामलों में समय-समय पर जांच भी होती रही है,इसी कारण सोनपुर समिति का यह नया आदेश भी चर्चा का विषय बन गया है।
  • क्या यह केवल प्रशासनिक निर्णय है या विभागीय खींचतान?
  • सोनपुर समिति में हुए इस बदलाव के बाद सहकारिता विभाग के भीतर भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं,कुछ लोग इसे सामान्य प्रशासनिक निर्णय मान रहे हैं,वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह विभाग के अंदर चल रही खींचतान का परिणाम हो सकता है, हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है,ऐसे में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना विभाग की जिम्मेदारी बनती है।
  • अब विभाग के जवाब का इंतजार
  • सोनपुर समिति का यह मामला केवल एक अधिकारी के हटने या दूसरे अधिकारी के अधिकृत होने तक सीमित नहीं है, असल सवाल यह है कि पात्रता का निर्धारण किन आधारों पर होता है? यदि कोई अपात्र था तो उसे पहले जिम्मेदारी क्यों दी गई? यदि कोई पात्र था तो उसे हटाने के पीछे क्या कारण हैं? क्या पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप और पारदर्शी रही? इन सवालों के जवाब आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

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