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बैकुंठपुर/सोनहत@तालाब निर्माण विवाद पर सियासत तेज,पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने खोला मोर्चा

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पीसीसीएफ से फोन पर की चर्चा पूछा-जुलाई के भारी मानसून में आखिर किस नियम के तहत कराए गए तालाब निर्माण?
कोरिया जन सहयोग समिति की शिकायत के बाद अब राजनीतिक हस्तक्षेप,गुणवत्ता,जेसीबी,मस्टर रोल और सरकारी धन के उपयोग पर उठे नए सवाल
संवाददाता-
बैकुंठपुर/सोनहत,29 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
कोरिया वन मंडल के सोनहत वन परिक्षेत्र में तालाब निर्माण कार्यों को लेकर उठे कथित अनियमितताओं के आरोप अब लगातार तूल पकड़ते जा रहे हैं,पहले स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए, फिर दैनिक घटती-घटना ने क्रमवार खोजी समाचार प्रकाशित किए, इसके बाद कोरिया जन सहयोग समिति ने वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) के नाम शिकायत और ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की। अब इस पूरे मामले में भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो भी खुलकर सामने आ गए हैं, उनके हस्तक्षेप के बाद यह मामला केवल विभागीय शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और जनहित के मुद्दे के रूप में भी सामने आने लगा है, पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ), रायपुर से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे प्रकरण की जानकारी दी और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो दोषियों के विरुद्ध विभागीय ही नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
पीसीसीएफ से पूछा…आखिर किस नियम के तहत हुआ निर्माण?
पूर्व विधायक ने बताया कि उन्होंने पीसीसीएफ से चर्चा के दौरान यह जानना चाहा कि क्या मानसून के दौरान इस प्रकार के निर्माण कार्यों की अनुमति किसी विशेष परिस्थिति में दी गई थी, अथवा यदि कार्य कराए गए तो उनके पीछे कौन-सी तकनीकी प्रक्रिया अपनाई गई, उन्होंने कहा कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया है, तो इसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
तीन बड़े सवालों के जरिए घेरा वन विभाग पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने अपने बयान में तीन प्रमुख मुद्दे उठाए…

  1. मानसून में मिट्टी संबंधी निर्माण क्यों?-उन्होंने कहा कि वर्षाकाल में मिट्टी आधारित निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना रहती है,ऐसे समय में तालाब निर्माण कराना तकनीकी दृष्टि से भी प्रश्न खड़े करता है, यदि निर्माण कराया गया,तो उसके पीछे क्या तकनीकी औचित्य था,यह स्पष्ट होना चाहिए।
  2. क्या बजट खर्च करने की जल्दबाजी थी?-उन्होंने पूछा कि जब क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी,तब निर्माण कार्य कराने की आवश्यकता क्या थी? उन्होंने आशंका व्यक्त की कि कहीं वित्तीय वर्ष अथवा स्वीकृत राशि के व्यय की जल्दबाजी में तो कार्य नहीं कराया गया। हालांकि, इस आशंका की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी।
  3. स्थानीय मजदूरों को रोजगार क्यों नहीं मिला?- पूर्व विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर सूचना पटल नहीं लगाए गए और स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने के बजाय जेसीबी एवं ट्रैक्टर जैसी मशीनों से कार्य कराया गया,उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है,तो इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
    जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी-पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रभावित ग्रामीणों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों के साथ व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी धन से संचालित योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती।
    चंदन चोरी से तालाब निर्माण तक बढ़ते सवाल- कोरिया वन मंडल पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में रहा है, पहले सोनहत स्थित शासकीय नर्सरी से चंदन के पेड़ों की चोरी का मामला चर्चा में रहा, इसके बाद तालाब निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, पहली बारिश में संरचनाओं के क्षतिग्रस्त होने और निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे। अब इन मामलों को लेकर सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता बढ़ने से विभाग पर निष्पक्ष जांच का दबाव भी बढ़ता दिखाई दे रहा है।
    सोशल मीडिया पर साझा किए समाचार,उठाए तीखे सवाल…
    पूर्व विधायक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर इस विषय से संबंधित समाचारों की कतरनें साझा करते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्न उठाए,उन्होंने कहा कि यदि 15 जून के बाद सामान्यतः वर्षाकाल में मिट्टी से जुड़े निर्माण कार्य नहीं कराए जाते, तो फिर जुलाई माह में तालाब निर्माण किस नियम,किस प्रशासनिक अनुमति और किस तकनीकी स्वीकृति के आधार पर कराया गया? उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्माण कार्य पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए, तो यह निर्माण की गुणवत्ता,तकनीकी परीक्षण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
    शिकायतों की श्रृंखला ने बढ़ाया दबाव
    इस पूरे घटनाक्रम में पहले मीडिया के माध्यम से सवाल उठे, फिर कोरिया जन सहयोग समिति ने डीएफओ को ज्ञापन सौंपा, मुख्यमंत्री के नाम शिकायत भेजी और अब पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने पीसीसीएफ से चर्चा कर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं, इससे यह स्पष्ट है कि यह मामला अब केवल स्थानीय स्तर का नहीं रह गया है।
    अब निगाहें वन विभाग और शासन पर…
    अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या वन विभाग इन आरोपों की निष्पक्ष तकनीकी एवं वित्तीय जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा, या फिर मामला केवल शिकायतों और आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा, यदि जांच में शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं,तो संबंधित अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की उम्मीद भी बढ़ेगी।

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