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कलोल (गुजरात)@पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर तेज होगा अभियान

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अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सात अहम प्रस्ताव पारित, संगठन विस्तार से लेकर कानूनी सहायता तक बनी रणनीति

कलोल (गुजरात) 28 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक गुजरात के कलोल स्थित विश्व उमियाधाम में राष्ट्रीय अध्यक्ष जिग्नेश भाई कलावाडिया (पटेल) की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव महफूज़ खान सहित देशभर से आए राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता की रक्षा, पत्रकार सुरक्षा कानून की आवश्यकता और संगठन के राष्ट्रीय विस्तार जैसे विषयों पर विस्तृत मंथन किया गया।
बैठक के बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से सात महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए। इनमें पत्रकार सुरक्षा कानून को राष्ट्रीय स्तर पर लागू कराने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय प्रमुख रहा। समिति ने तय किया कि जिन राज्यों में अभी तक पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नहीं है, वहां मुख्यमंत्री, राज्यपाल और गृहमंत्री को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। साथ ही संसद सत्र के दौरान सांसदों एवं जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर इस कानून की आवश्यकता से अवगत कराया जाएगा।
बैठक में पत्रकारों के साथ होने वाली घटनाओं का तथ्यात्मक दस्तावेज तैयार करने के लिए राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा रिपोर्ट तैयार करने का भी निर्णय लिया गया। इस रिपोर्ट में पत्रकारों पर हमले, फर्जी मुकदमे, धमकी, हत्या, गंभीर हिंसा तथा प्रशासनिक एवं संस्थागत दबाव से जुड़े मामलों का विस्तृत संकलन किया जाएगा, ताकि पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को प्रमाणिक आंकड़ों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिल सके।
संगठन को देश के प्रत्येक जिले तक मजबूत बनाने के लिए जिला स्तर पर संगठन विस्तार का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके तहत प्रत्येक जिले में जिला संयोजकों की नियुक्ति, पत्रकारों के लिए हेल्पलाइन और कानूनी सहायता तंत्र विकसित करने तथा ग्रामीण, स्वतंत्र एवं डिजिटल पत्रकारों को संगठन से जोड़ने पर सहमति बनी।
पत्रकारों पर होने वाले उत्पीड़न और फर्जी मुकदमों में सहायता उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी सहायता प्रकोष्ठ गठित करने का भी निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत अधिवक्ताओं का पैनल तैयार किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर पत्रकारों को कानूनी सलाह एवं सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही मानवाधिकार संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करने की भी योजना बनाई गई।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पत्रकारों की सुरक्षा के साथ-साथ पत्रकारिता की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और जनहितकारी स्वरूप को भी मजबूत किया जाना आवश्यक है। समिति ने संकल्प लिया कि वह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा बनाए रखने के लिए निरंतर कार्य करेगी।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने यह भी निर्णय लिया कि पत्रकार सुरक्षा कानून को किसी राजनीतिक मुद्दे के बजाय लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े विषय के रूप में सभी दलों के समक्ष रखा जाएगा। इसके लिए सत्ता पक्ष, विपक्ष और सभी जनप्रतिनिधियों से संवाद स्थापित किया जाएगा।
बैठक में बदलते मीडिया परिदृश्य को देखते हुए यूट्यूब पत्रकारों, स्वतंत्र पत्रकारों, डिजिटल मीडिया से जुड़े पत्रकारों और सोशल मीडिया रिपोर्टरों को भी संगठन की मुख्यधारा में शामिल करने तथा उनके अधिकारों और सुरक्षा को संगठन के एजेंडे का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया गया।
बैठक के अंत में समिति ने राष्ट्रीय संकल्प दोहराते हुए कहा कि “पत्रकार सुरक्षित होगा, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा।” समिति ने पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपना संघर्ष निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।


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