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एमसीबी@नागपुर हाल्ट-चिरमिरी रेल विस्तार परियोजना में किसानों का उबाल

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मुआवज़े में भेदभाव का आरोप,पूर्व विधायक गुलाब कमरो को सौंपा ज्ञापन
एमसीबी,09 जनवरी 2026 (घटती-घटना)।
नागपुर हाल्ट-चिरमिरी रेल विस्तार परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर जिले में किसानों का आक्रोश लगातार तेज़ होता जा रहा है, परियोजना से प्रभावित ग्राम बंजी और चिरईपानी के किसानों ने एकजुट होकर भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपकर मुआवज़े में भारी भेदभाव का आरोप लगाया है, किसानों ने इस मामले में शासन-प्रशासन के समक्ष उनकी आवाज़ मजबूती से उठाने की मांग की है।
कम मुआवज़ा, भारी नुकसान
किसानों का कहना है कि रेल परियोजना के लिए उनकी भूमि का अधिग्रहण वर्तमान बाजार मूल्य से बहुत कम दरों पर किया जा रहा है, जिससे उन्हें गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रभावित किसानों ने मांग रखी है कि भूमि का चार गुना मुआवज़ा दिया जाए, सरकारी गाइडलाइन दरों में तत्काल संशोधन किया जाए, विस्थापितपरिवारों के लिए उचित पुनर्वास और स्थायी रोजगार की व्यवस्था की जाए,किसानों का साफ कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
ग्राम सभा में भ्रामक आश्वासन का आरोप
प्रभावित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा के दौरान प्रशासन द्वारा भ्रामक और अधूरी जानकारी देकर उनसे सहमति ली गई, किसानों के अनुसार, परियोजना के वास्तविक दुष्परिणामों और मुआवज़े की वास्तविक दरों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई,जिससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
पड़ोसी गांवों से तुलना,भेदभाव का दावा
ज्ञापन में किसानों ने उल्लेख किया कि सरभोका, सरौला, सेंधा,नागपुर और सिरियाखोह जैसे आसपास के गांवों की भूमि दरें काफी अधिक निर्धारित की गई हैं,जबकि बंजी और चिरईपानी की भौगोलिक स्थिति इन गांवों के समान या कई मामलों में बेहतर है,इसके बावजूद इन दोनों गांवों के लिए कम दरें तय करना किसानों के साथ खुला अन्याय बताया जा रहा है।
पुरानी गाइडलाइन दरें बनी विवाद की जड़-
किसानों ने कहा कि बंजी और चिरईपानी की सरकारी गाइडलाइन दरें काफी पुरानी हैं और आसपास के विकसित गांवों की तुलना में बहुत कम हैं,इन्हीं पुरानी दरों के आधार पर मुआवज़ा तय किया जाना किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार है,जिसे वे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे।
खैरबना के किसान भी पहले जता चुके हैं नाराज़गी
यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व ग्राम पंचायत खैरबना के 23 किसानों ने भी भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवज़ा न मिलने को लेकर पूर्व विधायक गुलाब कमरो को आवेदन सौंपा था। उस समय भी किसानों ने मुआवज़ा निर्धारण में पारदर्शिता की कमी और प्रशासनिक मनमानी के आरोप लगाए थे, लगातार सामने आ रहे इन मामलों से साफ है कि परियोजना को लेकर किसानों में असंतोष गहराता जा रहा है।
गुलाब कमरो का आश्वासन
ज्ञापन सौंपे जाने के बाद पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने किसानों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए कहा कि वे किसानों के साथ खड़े हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा, उनकी मांगों को शासन और प्रशासन के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा।
प्रशासन के लिए बढ़ती चुनौती-
नागपुर हाल्ट-चिरमिरी रेल विस्तार परियोजना जहां क्षेत्रीय विकास और बेहतर रेल कनेक्टिविटी का सपना दिखा रही है, वहीं मुआवज़े को लेकर उठे सवाल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं, यदि समय रहते किसानों की मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है, कुल मिलाकर, यह मामला अब केवल मुआवज़े तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि किसानों के भरोसे और न्याय की कसौटी बनता जा रहा है।


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