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लेख@ कथावाचक श्री अनिरुध्दाचार्य के बयान पर राजनीतिक ड्रामा क्यों?

आज के कलयुग में सच बोलना और लिखना दोनों गुनाह हो गया है। श्री अनिरुध्दाचार्य जी ने मथुरा में कथा कहने के दौरान देश के भविष्य के बारे में चिंता करते हुए समसामयिक घटना पर एक टिप्पणी की। जिसे लेकर अवसरवादी व उनके विरोधियों को एक मौका मिल गया है,आचार्य जी के बातों को तोड़-मरोड़कर उस पर उंगली उठाने का।आचार्य …

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लेख@ भारत डॉक्टरों और नर्सों का निर्यात कर रहा है जबकि देश को उनकी भी जरूरत है

देशों में स्वास्थ्य कार्यबल की मांग और आपूर्ति एक कठिन समस्या है,अधिकांश देशों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों और नर्सों की कमी है और 2030 तक 18 मिलियन स्वास्थ्य श्रमिकों की अनुमानित वैश्विक कमी है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता देशों में प्रवास करते हैं, प्रवाह आमतौर पर ग्लोबल साउथ के देशों से उत्तर में रहने वालों के लिए होता है। जिन देशों …

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लेख@ आखिर कब समझेंगे हम प्रकृति की मूक भाषा?

पेड़-पौधों की अनेक प्रजातियों के अलावा बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन और मौसम चक्र में आते बदलाव के कारण जीव-जंतुओं की अनेक प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इन प्रजातियों के लुप्त होने का सीधा असर समस्त मानव सभ्यता पर पड़ना अवश्वम्भावी है। प्रदूषित हो रहे पर्यावरण के आज जो भयावह खतरे हमारे सामने आ रहे हैं,उनसे शायद …

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