डॉक्टरी जांच में शराब सेवन की पुष्टि, पुलिस ने जब्त किए वाहन; सड़क सुरक्षा को लेकर फिर खड़े हुए सवाल
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,16 जून 2026 (घटती-घटना)। शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सरगुजा पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की है। थाना बतौली पुलिस, उदयपुर पुलिस और यातायात पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में तीन बाइक चालकों को नशे की हालत में वाहन चलाते हुए पकड़ा गया। मेडिकल जांच में शराब सेवन की पुष्टि होने के बाद वाहनों को जब्त कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां तीनों चालकों पर कुल 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। पुलिस की यह कार्रवाई सड़क सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा कर रही है कि लगातार जागरूकता अभियान और कानूनी कार्रवाई के बावजूद आखिर लोग नशे की हालत में वाहन चलाने का जोखिम क्यों उठा रहे हैं।
तीन अलग-अलग मामलों में कार्रवाई
पुलिस के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष वाहन जांच अभियान के दौरान शराब पीकर वाहन चलाने वाले तीन चालकों को पकड़ा गया। इनमें झरगंवा निवासी लिखन राम अपनी मोटरसाइकिल क्रमांकCG -15 CK-9747, सोनतराई निवासी भूपेन्द्र पैंकरा मोटरसाइकिल क्रमांक CG-15 EB-4859 तथा खोपा निवासी भान साय मोटरसाइकिल क्रमांक CG-29 AE-4392 चलाते हुए पाए गए। संदेह होने पर तीनों चालकों की चिकित्सकीय जांच कराई गई, जिसमें उनके द्वारा शराब सेवन किए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत कार्रवाई करते हुए वाहनों को जब्त कर न्यायालय में पेश किया।
न्यायालय ने दिखाई सख्ती
प्रकरण न्यायालय पहुंचने के बाद तीनों मामलों में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रत्येक चालक पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इस तरह कुल 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। कानूनी जानकारों का कहना है कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत शराब या अन्य मादक पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाना गंभीर अपराध माना जाता है क्योंकि इससे चालक ही नहीं बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान भी खतरे में पड़ जाती है।
सिर्फ जुर्माना काफी है या सोच बदलने की जरूरत?
हर साल सड़क दुर्घटनाओं के पीछे शराब पीकर वाहन चलाना एक बड़ा कारण माना जाता है। इसके बावजूद नशे में वाहन चलाने की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं। सरगुजा में भी समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जहां चालक अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालते हुए शराब के नशे में वाहन चलाते पकड़े जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जुर्माना लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए लोगों की मानसिकता में बदलाव और सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है।
एक गलती, कई जिंदगियों पर भारी
नशे में वाहन चलाने वाला व्यक्ति केवल खुद के लिए खतरा नहीं होता। सड़क पर मौजूद पैदल यात्री, अन्य वाहन चालक और राहगीर भी उसकी लापरवाही का शिकार बन सकते हैं।
अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग शराब पीने के बाद यह मान लेते हैं कि वे वाहन नियंत्रित कर सकते हैं, जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत होती है। प्रतिक्रिया क्षमता कम होने और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने से दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
पुलिस अभियान जारी, लेकिन चुनौती बरकरार
डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल के निर्देश पर सरगुजा पुलिस लगातार तीन सवारी, बिना हेलमेट वाहन संचालन, खतरनाक ड्राइविंग और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान चला रही है। इसके बावजूद बार-बार ऐसे मामले सामने आना बताता है कि सड़क सुरक्षा नियमों को लेकर लोगों में अभी भी अपेक्षित जागरूकता नहीं है।
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