सुरक्षित नर्सरी से बेशकीमती चंदनो के वृक्ष पार
अधिकारियों के चश्मा लगाकर गस्ती की खुली पोल !
कोरिया वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, सरकारी नर्सरी से छह चंदन वृक्ष गायब, जांच और कार्रवाई की मांग तेज
मुख्यालय की फेंसिंग के भीतर हुई वारदात ने खोली सुरक्षा दावों की पोल
-राजन पाण्डेय-
कोरिया,16 जून 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड में स्थित शासकीय स्थायी रोपणी (नर्सरी) से बेशकीमती चंदन के छह वयस्क वृक्षों की कथित अवैध कटाई और चोरी का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं,जिस नर्सरी को विभागीय स्तर पर सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है,वहीं से चंदन जैसे मूल्यवान वृक्षों का गायब हो जाना स्थानीय लोगों,सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है, स्थानीय स्तर पर यह मामला केवल वृक्ष चोरी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे वन संपदा की सुरक्षा में गंभीर चूक के रूप में देखा जा रहा है, घटना के बाद क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी व्यवस्था, गश्त और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।
भाजयुमो नेताओं ने मौके पर पहुंचकर किया निरीक्षण- भारतीय जनता युवा मोर्चा के मंडल महामंत्री मनोज साहू के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं की एक टीम ने कथित रूप से नर्सरी पहुंचकर कटे हुए वृक्षों के अवशेषों का निरीक्षण किया,निरीक्षण के बाद उन्होंने वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) कोरिया को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की, ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि नर्सरी जैसे संरक्षित क्षेत्र में चंदन वृक्षों की कटाई बिना विभागीय लापरवाही या प्रभावी निगरानी की कमी के संभव नहीं हो सकती, भाजयुमो ने चेतावनी दी है कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
वन विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार
घटना के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि वन विभाग इस मामले को किस गंभीरता से लेता है, स्थानीय लोगों की निगाहें अब डीएफओ कार्यालय पर टिकी हुई हैं। यदि विभाग तत्काल जांच टीम गठित कर तथ्य सार्वजनिक करता है,तो कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं, वहीं यदि मामला लंबे समय तक केवल फाइलों में सीमित रहा, तो जनाक्रोश और राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सवालों के घेरे में स्थानीय निगरानी व्यवस्था…
घटना के बाद स्थानीय वन अमले की भूमिका को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं,क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि मुख्यालय से जुड़े और फेंसिंग से घिरे परिसर में इस प्रकार की घटना हो सकती है,तो दूरस्थ जंगलों में वन संपदा की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ जाती हैं,स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और प्रभावी गश्त की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है,हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है,लेकिन मामले ने विभागीय निगरानी तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
बढ़ती चिंताओं के बीच नया मामला…
क्षेत्र के कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक दावा कर रहे हैं कि बीते वर्षों में वन संपदा से जुड़े कई मामले सामने आते रहे हैं, लोगों का कहना है कि पहले साल और सागौन की अवैध कटाई की शिकायतें उठती रही हैं और अब चंदन वृक्षों की कथित चोरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है,हालांकि इन सभी मामलों में विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई और किन मामलों में दोषियों की पहचान हुई, यह जांच का विषय है। लेकिन लगातार उठते आरोपों ने वन संरक्षण की प्रभावशीलता पर बहस को जरूर तेज कर दिया है।
मनोज साहू ने की तीन प्रमुख मांगें…
भाजयुमो मंडल महामंत्री मनोज साहू ने डीएफओ को सौंपे ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें रखी हैं पहली,सोनहत नर्सरी से चंदन वृक्षों की चोरी की स्वतंत्र और निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दूसरी,जांच पूरी होने तक संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को हटाया जाए ताकि जांच प्रभावित न हो,तीसरी, यदि किसी अधिकारी,कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए,मनोज साहू का कहना है कि यह मामला केवल कुछ पेड़ों की कटाई का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति और वन संपदा की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
कोरिया जन सहयोग समिति ने भी दी आंदोलन की चेतावनी
मामले में सामाजिक संगठन कोरिया जन सहयोग समिति भी खुलकर सामने आ गई है, समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र राजवाड़े ने कहा कि यदि सरकारी नर्सरी के भीतर लगे चंदन वृक्ष सुरक्षित नहीं रह पाए हैं, तो वन विभाग के सुरक्षा दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है, उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सिद्ध होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, समिति ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वन विभाग कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
भरोसे की लड़ाई बनता जा रहा मामला…
सोनहत नर्सरी से चंदन वृक्षों की कथित चोरी का मामला अब केवल वन अपराध का विषय नहीं रह गया है,यह वन विभाग की विश्वसनीयता, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही की परीक्षा बनता जा रहा है,स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राकृतिक पूंजी हैं,यदि उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं,तो उन सवालों का जवाब भी पारदर्शिता के साथ दिया जाना चाहिए,फिलहाल पूरे जिले की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है, दोषियों की पहचान होती है या नहीं,और वन विभाग अपनी साख बचाने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है,जब तक इन प्रश्नों के उत्तर नहीं मिलते,तब तक सोनहत की इस नर्सरी से गायब हुए चंदन वृक्ष वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का प्रतीक बने रहेंगे।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur