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संपादकीय

लेख@बदलता भारत और विश्व में हमारी नई पहचान

भारत—एक ऐसा देश जिसकी जड़ें हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता में हैं और जिसकी शाखाएँ अब 21वीं सदी के वैश्विक मंच पर लहराने लगी हैं। आज का भारत न केवल बदलाव के दौर से गुजर रहा है,बल्कि वह बदलाव का वाहक बन चुका है। विज्ञान, तकनीक,राजनीति,संस्कृति और आध्यात्म के क्षेत्र में भारत ने विश्व को अपनी एक सशक्त और आत्मनिर्भरता वाली …

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लेख@मोहन सरकार के नवाचार कृषि क्षेत्र में ला रहे हैं बदलाव

मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने अपने कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में कई नवाचारों और नीतियों को लागू करके राज्य को कृषि क्षेत्र में विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने,खेती को लाभकारी बनाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण …

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लेख@सेना में दिखने लगा महिला शक्ति का दम

भारतीय सेना में महिला शक्ति का दम दिखाई देने लगा है। पुरुषों की तरह महिलाएं भी सेना में बढ़ चढ़कर अपनी योग्यता का प्रदर्शन कर रही हैं। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर की प्रेस ब्रीफिंग में सेना की दो महिला अधिकारियों द्वारा युद्ध से संबंधित जानकारी देना एक महत्वपूर्ण कदम रहा है। विदेश …

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लेख@ ऋषितुल्य व्यक्तित्व‘श्री रामजीलाल अग्रवाल’

छत्तीसगढ़ की राजधानी में अविभाजित मध्यप्रदेश से लेकर वर्तमान काल तक जिन-जिन व्यक्तित्वों को सामाजिक सफलता का प्रतीक माना गया उनमें आदर्श उदाहरण रहे-श्री रामजीलाल अग्रवाल। जीवन पर्यंत जिन्होंने पीडि़त मानवता के कल्याण की अपनी राह नहीं छोड़ी। टीबा बसाई झुंझनू,[राजस्थान] से आकर छत्तीसगढ़ के रायपुर में रच बस गए और इस माटी के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। …

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लेख@ समय-समय पर दस्तक देता कोरोना नया जेएन-1 वेरिएंट

कोविड 19 मानव की जिंदगी का एक ऐसा अनचाहा हिस्सा बन चुका है, जिसके नए नए वेरिएंट समय समय पर दस्तक देते रहते हैं। इस दफा जेएन-1 वेरिएंट ने देश दुनिया में दस्तक दी है। सिंगापुर,हांगकांग में बढ़ते माहामारी के मरीजों के बाद अब यह भारत में भी अपने पांव पसार रहा है । मुंबई से लेकर दिल्ली में इस …

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कविता@असहजता…

संघर्ष है तो हारने के डर सेफिर विराम क्यों?राम है तो औरों से फिर काम क्यों?ज्ञान है तो फिर अज्ञानता का भार क्यों?जीत की तलब है तो फिर हार का खौफ क्यों?अजनबी हूँ तो फिर इतना अपनापन क्यों?अहम है तो फिर वहम भरी बातें क्यों?सहज हो तो फिर व्यवहार में असहजता क्यों?ज्ञात है सब तो फिर अज्ञात का बोध क्यों?जीवंत …

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कविता@बूढ़ी घोड़ी…

बूढी घोडी लाल लगाममां समझे बेटी से जवान!हराम की कमाई खाकरअफसर बना गामा पहलवान।खादी के कपड़े पहन कर नेतासमझे जैसे मार लिया मैदान।इस बेचारे को पता ही नहीं कियह है कुछ दिन की ही शान।शराब पीकर नेता दे रहा हैशराब बंदी पर ही व्याख्यान।जब तक ना पी ले पूरी बोतलउसकी जान में नहीं आती जान।आज के जेंटलमैन की पहचानउल्टा बोले …

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लेख@शायरी साहित्य और संस्कृति की धरोहर है…

डॉ. मुश्ताक अहमद शाह की शायरी और कविताएं लोगों के दिलों को इसलिए छू रही हैं क्योंकि वे गहरी भावनाओं,जीवन के अनुभवों और मानवीय संवेदनाओं को सरल,सच्चे शब्दों में व्यक्त करते हैं। ऐसी शायरी और कविताएं अकेलेपन, दिल के दर्द, प्रेम, दोस्ती और जीवन की जटिलताओं को इस तरह उजागर करती हैं कि पाठक अपनी भावनाओं को उनमें महसूस कर …

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लेख@कागज-पत्तर ढीले और पहुंच का रुतबा

अपने यहां ऐसे भी दीवाने हैं जो कलाई पर घड़ी नहीं हेलमेट बांधते हैं। भारत में ट्रैफिक नियम उस प्रेमिका की तरह हैं जिनसे सब वादा करते हैं पर निभाता कोई नहीं। ट्रैफिक सिग्नल उस बुजुर्ग की तरह होता है जिसे सब सम्मान से देखते हैं, पर जिसकी मानता कोई नहीं। यहां सड़कों पर सबसे विश्वसनीय सहारा न तो हेलमेट …

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लेख@सच को बरछी की नोक पर टांगने का जमाना

धृतराष्ट बोला-हे संजय,कलिकाल मेँ इक्कीसवी सदी के प्रारम्भ मेँ अपने राज्य हस्तिनापुर सहित इंद्रप्रस्थ अर्थात दिल्ली के बारे मेँ जानने को उत्सुक हूँ तुमने बीसवी सदी तक के हालत के जो डरावने रूह कपाने वाले दृश्य बतलाये उससे मेरी आत्मा लहूलुहान हो गई है। मैं स्वीकारता हूँ की जगदीश्वर श्रीकृष्ण के लाख प्रयास ओर शांति प्रस्ताव को मैंने अपने बेटे …

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