हिंदवी स्वराज प्रणेताः श्रीमंत योगी छत्रपति शिवाजी महाराज निर्विवाद रूप से 1674-1680 तक भारत के सबसे महान राजाओं में से एक हैं। उनकी युद्ध प्रणालियाँ आज भी आधुनिक युग में अपनायीं जातीं हैं। उन्होंने अकेले दम पर मुग़ल सल्तनत को चुनौती दी थी। शाश्वत, माता जीजा बाई, पिता शाहजी भोंसले के पुत्र शिवाजी भोंसले का अवतरण 19 फरवरी, 1630 को …
Read More »संपादकीय
लेख@ डॉक्टर बनने के लिए क्यों देश छोड़ रहे भारतीय छात्र?
क्या शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर है या कुछ और?घरेलू मेडिकल संस्थानों में उपलब्ध कुछ सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा और इस तथ्य के कारण कि कुछ देश बहुत कम ट्यूशन फीस देते हैं, भारतीय छात्र अक्सर विदेश में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करना चुनते हैं। इससे उन्हें अधिक किफायती लागत पर उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा मिलती …
Read More »लेख@ भूख की कड़वी सच्चाई और भोजन की बर्बादी का समीकरण’
खाने को कूड़ा करने कुसंस्कृतिसंयुक्त राष्ट्र संघ की फूड वेस्ट इंडेक्स सर्वे के अनुसार 2024 में हर एक नौ में से एक व्यक्ति पर्याप्त भोजन तथा आवश्यक पोषक तत्वों से वंचित रह जाता है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार पूरी दुनिया में एड्स, मलेरिया,टीवी और करोना 2021,23 में जितने व्यक्ति की मृत्यु हुई है उससे कहीं …
Read More »लेख@ यूपी में सस्ती शराब से पीने वालों की होली
अंग्रेजी शराब के ठेके नए सिरे से होने हैं। इसके लिए ऑनलाइन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. ऐसे में जिन दुकानदारों के पास ज्यादा स्टॉक है, वो रियायती दरों पर शराब बेचकर अपना स्टॉक क्लियर करने की कोशिशों में लगे हैं.ताकि कोटे की बची शराब से कुछ और कमाई हो जाये। यही वजह थी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला …
Read More »@18 फरवरी जयन्ती पर विशेष@धर्म अध्यात्म महान साधक थे रामकृष्ण परमहंस
रामकृष्ण परमहंस भारत के एक महान संत, आध्यात्मिक गुरु एवं विचारक थे। इन्होंने सभी धर्मों की एकता पर जोर दिया। उन्हें बचपन से ही विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं। अतः ईश्वर की प्राप्ति के लिए उन्होंने कठोर साधना और भक्ति का जीवन बिताया। स्वामी रामकृष्ण मानवता के पुजारी थे। साधना के फलस्वरूप वह इस निष्कर्ष पर …
Read More »लेख@ स्ति्रयों के प्रति रुçढ़ढ़वादी मानसिकता देश के हित में नहीं
बालिकाओं और स्ति्रयों को केवल दया का पात्र समझकर उन्हें घर की चारदीवारी में ना रखें। अब समय आ गया है कि बालिकाओं को प्रारंभ से और स्ति्रयों को उचित मार्गदर्शन,प्रोत्साहन देकर परिवार समाज और राष्ट्रीय सहभागिता की मुख्यधारा में उत्तरोत्तर सहभागी बनाना चाहिए। आज स्त्री के संदर्भ में सारी पुरातन अवधारणाओं को बदलने का समय आ गया है । …
Read More »लेख@ महाकुम्भ में स्नान से ज्यादा जरुरी है मन की पवित्रता
मान्यता है कि महाकुम्भ में प्रयागराज में संगम, गंगा नदियों के संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है, पुण्य मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक महाकुंभ मेले का आयोजन किया जा रहा है। यहां हर वर्ष माघ मेला, हर छह साल में अर्ध कुंभ और हर …
Read More »लेख@ यू.एस. इंडिया कॉम्पैक्ट चुनौतियाँ और अवसर
संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच बदलती गतिशीलता का इक्कीसवीं सदी में दुनिया के संगठित होने के तरीके पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। इस साझेदारी की क्षमता को पूरी तरह से साकार करने के लिए, दोनों सरकारों को रणनीतिक बहुपक्षीय सम्बंधों, अर्थशास्त्र और रक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। मौजूदा हालात अमेरिका-भारत सम्बंधों के दीर्घकालिक विकास के …
Read More »लेख@ बिखर रहे चूल्हे सभी,सिमटे आँगन रोज,नई सदी ये कर रही,जाने कैसी खोज
पिछले कुछ समय में पारिवारिक ढांचे में काफ़ी बदलाव हुआ है। मगर परिवारों की नींव का इस तरह से कमजोर पड़ना कई चीजों पर निर्भर हो गया है। अत्यधिक महत्त्वाकांक्षी होना ही रिश्ते टूटने की प्रमुख वज़ह है। जब परिवारों में होड लगनी शुरू हो जाये एवं एक दूसरे के सुख-दुख से ज़्यादा परस्पर प्रतिस्पर्धा का भाव जग जाये। समझना …
Read More »लेख@ त्याग और समर्पण का अर्थ प्रेम
पृथ्वी के जैव जगत के सभी जीव में अपनों के प्रति प्रेम का भाव निश्चित तौर पर एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।पर जैव जगत के सबसे विवेकवान प्राणी मानव आज कोई भी काज करता है,तो उस काज के प्रतिफल पर कुछ अपेक्षा और आशा रखता है।आज मानव संतान को जन्म देता है और अच्छे ढंग से परवरिश करता है बदले में …
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