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संपादकीय

संपादकीय@अगर मैं मुख्यमंत्री का सलाहकार होता… तो सत्ता बचाने नहीं…विश्वास जीतने की सलाह देता…

लोकतंत्र में सरकारें केवल घोषणाओं से नहीं,बल्कि जनता के अनुभव से बनती और बिगड़ती हैं। चुनाव से कुछ महीने पहले सड़कें बनवाना, योजनाओं की बौछार करना और विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर देना अब उतना प्रभावी नहीं रह गया है। आज का मतदाता पहले से कहीं अधिक जागरूक है। वह देखता है कि सरकार ने पूरे कार्यकाल में क्या …

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संपादकीय@ मौन शहर,मनमाने फैसले और आने वाली पीढि़यों का सवाल

किसी भी शहर का भविष्य केवल इमारतों,सड़कों और सरकारी योजनाओं से तय नहीं होता। उसका भविष्य इस बात से तय होता है कि वहां लिए जाने वाले निर्णय कितने दूरदर्शी,पारदर्शी और जनहित पर आधारित हैं। दुर्भाग्य तब होता है,जब फैसले तो होते हैं,लेकिन जनता को उनकी जानकारी नहीं होती;योजनाएं बनती हैं,लेकिन स्थानीय लोगों से राय नहीं ली जाती; और विरोध …

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संपादकीय@ हर तीन साल में डेस्क बदलेगी, लेकिन क्या व्यवस्था भी बदलेगी?

छत्तीसगढ़ सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग के नए परिपत्र के अनुसार अब शासकीय कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारियों के कार्य-पटल (Desk Assignment) का प्रत्येक तीन वर्ष में अनिवार्य रूप से परिवर्तन किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे कार्यकुशलता बढ़ेगी,पारदर्शिता आएगी,जवाबदेही मजबूत होगी और कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार के कार्यों का अनुभव मिलेगा।सिद्धांत …

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लेख@बांकीपुर का संदेश : क्या बिहार की राजनीति में शुरू होचुका है नया अध्याय,या यह सिर्फ एक उपचुनाव का असर है?

भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ में प्रशांत किशोर की जीत ने बदले राजनीतिक विमर्श,अब सवाल 2027 के विधानसभा चुनाव काबिहार की राजनीति हमेशा अप्रत्याशित घटनाओं और नए राजनीतिक प्रयोगों की प्रयोग शाला रही है,कभी समाज वाद की राजनीति ने यहां नई दिशा दी, कभी मंडल आंदोलन ने सत्ता का चेहरा बदल दिया,तो कभी सुशासन के नाम पर नीतीश कुमार ने …

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संपादकीय@ आरक्षण पर टिप्पणी नहीं,संविधानपर आस्था की कसौटी है यह मामला

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी की सोशल मीडिया पोस्ट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संवैधानिक विषयों पर सार्वजनिक पदों पर बैठे अधिकारियों को निजी राय व्यक्त करते समय अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं निभानी चाहिए?विवाद बढ़ने के बाद संबंधित अधिकारी ने पोस्ट हटा दी और खेद भी व्यक्त किया। लेकिन अब बहस केवल एक …

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संपादकीय@ न्याय की राह में सबसे बड़ा अपराध…

अपराध को छिपाने की कोशिशबलात्कार और विशेषकर नाबालिग से दुष्कर्म जैसे अपराध केवल किसी एक व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होते,बल्कि पूरे समाज के नैतिक विवेक को चुनौती देते हैं। ऐसे मामलों में यदि अपराध सिद्ध होता है तो दोषी को कठोर दंड मिलना चाहिए। लेकिन उतना ही गंभीर प्रश्न तब खड़ा होता है,जब अपराध के बाद उसे दबाने,समझौता कराने या …

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लेख@ संस्कारों का हस्तांतरण अगली पीढ़ी को ठीक तरीके से न हो,तो उस समाज का क्षय होना निश्चित है…

अश्लीलता दबे पांव नहीं,सीना तानकर इंस्टा यूट्यूब के दरवाजे आपके घर तक आई है…इन दिनों नीट पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के हिंसक और अश्लील विरोध प्रदर्शन को लेकर पूरे सोशल मीडिया में प्रदर्शनकारी छात्र छात्राओं के अश्लील गाली-गलौज वाले वीडियो तैर रहे हैं। कुछ लोग ZEN-Z के इस शर्मनाक कृत्य को नया ट्रेंड बताकर महिमामंडित कर …

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लेख @जब अदालतें जवाब मांगती हैं,तब व्यवस्था में भरोसा बढ़ता है…

जवाबदेही तय होगी,तभी न्याय व्यवस्था मजबूत होगी… न्यायालय की सख्तीः व्यवस्था को जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम न्याय केवल फैसला नहीं,जवाबदेही भी चाहता है… न्यायपालिका का संदेशः लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी… सरकारी लापरवाही पर न्यायालय की सख्ती लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत… न्याय व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी तो जनता का भरोसा भी मजबूत होगा… समय पर न्याय …

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संपादकीय@ गाली सिखाने वाला स्कूल नहीं,हमारा समाज है…

शिक्षक सिर्फ आसान निशाना बन गयाएक स्कूल में बच्चों से सजा के तौर पर गालियां लिखवाई गईं। वीडियो सामने आया और पूरा देश मानो फैसला सुनाने बैठ गया। किसी ने कहा शिक्षिका को बर्खास्त करो,किसी ने कहा जेल भेजो, किसी ने स्कूल की मान्यता खत्म करने की मांग कर दी।लेकिन एक सवाल किसी ने नहीं पूछा…आखि़र बच्चे गालियां सीखते कहां …

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संपादकीय@ समान नागरिक संहिता : संवैधानिक संकल्प सामाजिक संवाद और राजनीतिक चुनौती

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) का प्रारूप तैयार करने के लिए समिति गठित किए जाने के बाद राज्य में इस विषय पर गंभीर बहस शुरू हो गई है। उत्तराखंड के बाद अब छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं,बल्कि सामाजिक,सांस्कृतिक और संवैधानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। …

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