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संपादकीय

लेख@ सरगुजिहा बोली का प्रथम महाकाव्य

राम हनुमान गोठ,अर्थात सरगुजिहा छत्तीसगढ़ी रमायनश्री बंशीधर लाल जो सामान्यतः बी0डी0लाल के में संबोधित किये जाते हैं वैसे तो हिन्दी के व्याख्याता के रूप में शासकीय विद्यालयों में सेवा किये और हिन्दी में अनेक पुस्तकों – का लेखन किये हैं और अभी भी कर रहे हैं परन्तु पुस्तक के रूप में उनकी प्रथम कृति सन् 2010 में सरगुजा की आतुर …

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लेख@ सरगुजिहा बोली का प्रथम महाकाव्य

राम हनुमान गोठ,अर्थात सरगुजिहा छत्तीसगढ़ी रमायनश्री बंशीधर लाल जो सामान्यतः बी0डी0लाल के में संबोधित किये जाते हैं वैसे तो हिन्दी के व्याख्याता के रूप में शासकीय विद्यालयों में सेवा किये और हिन्दी में अनेक पुस्तकों – का लेखन किये हैं और अभी भी कर रहे हैं परन्तु पुस्तक के रूप में उनकी प्रथम कृति सन् 2010 में सरगुजा की आतुर …

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लेख@महिला आरक्षण-नया आयाम,क्यूँ ज़रूरी ?

आज देश में सबसे चर्चित विषय महिला आरक्षण है और इसका महत्व देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी के लेख से और अधिक हो गया है ।इसलिए यह ज़रूरी है कि इस आरक्षण के लिये हमारी तैयारी पर भी बात होना चाहिए ।बात 1993-94 की है, जब मध्य प्रदेश में ७३वें संविधान संशोधन के बाद पहली बार पंचायती राज संस्थाओं …

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जब हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा की गोपनीय बैठक

विचारधारा से प्रारम्भ हुई क्रान्ति लेवी,वसूली,लूटपाट एवं डकैती में परिवर्तित हो गई,इसलिए इसका अंत स्वाभाविक और सुनिश्चित था : बृजमोहन अग्रवाल मोदी,शाह और साय की रणनीति ने 60 साल के नासूर से देश और छत्तीसगढ़ को मुक्ति दिलाई नक्सलवाद को सामाजिक-आर्थिक समस्या बताकर संरक्षण देने वाले बेनकाब हुए सांसद बृजमोहन छत्तीसगढ़ अब आसानी से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़ बस्तर और आदिवासी …

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संपादकीय@अफीम के खेत में उगा ‘सरकारी धान’, सिस्टम बोला – सब ठीक है!

कागज में धान, जमीन पर अफीम – सिस्टम की आंखों पर किसका पर्दा?अफीम की फसल, धान की रसीद – सरकार का खजाना किसने लूटा?जिओ-टैगिंग फेल या मिलीभगत का खेल? अफीम खेत से धान खरीदी पर सवालजिस खेत में नशा उगा, वहां से निकला ‘धान का पैसा’!अफीम के खेत में उगा धान: व्यवस्था की आंखों पर पट्टी या मिलीभगत का खेल? …

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संपादकीय@ धान का कटोरा या अफीम का गमला? छत्तीसगढ़ में ‘नई फसल’ का रहस्य

धान का कटोरा या अफीम का बगीचा? छत्तीसगढ़ की खेती ने बदला ‘फसल चक्र’खेतों में अफीम लहलहाई, जिम्मेदार बोले – हमें तो बस हरियाली दिखीअफीम उगती रही, पहरेदार सोते रहे…अब जागी व्यवस्था की नींदकिसानों ने बोया अफीम, सिस्टम ने बोया सन्नाटाअफीम की फसल पकड़ी गई, जिम्मेदारी अब भी कच्चीअफीम की खेती पर खुलती परतें, जिम्मेदारों की आंखों पर अब भी …

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संपादकीय@क्या यूजीसी कानून देश को फिर भटका रहा है?

क्या सरकार देश को एकजुट करने में असफल हो चुकी है?क्या अब सत्ता का रास्ता केवल विभाजन की राजनीति से ही खोजा जा रहा है?संपादकीय | देश एक बार फिर उबाल पर है, बहस तेज है, सड़कों पर विरोध है, विश्वविद्यालयों में असंतोष है और सोशल मीडिया से लेकर संसद तक एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या सरकार ने …

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संपादकीय@कांग्रेस शासन में अपमान की राजनीति, भाजपा सरकार में सम्मान की संस्कृति

राष्ट्रीय पर्वों के मंच से बदली कोरिया जिले की प्रशासनिक कार्यशैलीकुर्सियों से सम्मान तक : कोरिया जिले में राष्ट्रीय पर्वों की बदली राजनीतिक संस्कृतिकांग्रेस शासन में अपमान का आरोप, भाजपा सरकार में समन्वय और मर्यादा की मिसाल लेख by रवि सिंह- राष्ट्रीय पर्व केवल औपचारिक आयोजन नहीं होते, बल्कि ये लोकतंत्र की आत्मा, प्रशासनिक मर्यादा और जनप्रतिनिधियों के सम्मान की …

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संपादकीय@ शिष्टाचार बनाम दिखावा: क्या सत्ता की निकटता मर्यादा से ऊपर हो गई है?

शासकीय कार्यालयों से लेकर राजनीतिक मंचों तक बदलता व्यवहार चिंता का विषयलेख by रवि सिंह-  शिष्टाचार केवल आचरण का विषय है इसे न तो थोपा जा सकता है और न ही यह किसी नियम या अधिनियम से अनिवार्य होता है, फिर भी भारतीय सामाजिक परंपरा में इसका विशेष महत्व रहा है, चाहे पारिवारिक जीवन हो, गुरु–शिष्य परंपरा हो या फिर …

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संपादकीय@क्या चैतन्य बघेल की राजनीति में एंट्री तय?

जमानत के बाद बढ़ी लोकप्रियता, सोशल मीडिया से सड़कों तक गूंजते नारेछत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया सवाल तेज़ी से उभर रहा है…क्या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल अब सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं? लेख: चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद जिस तरह से वे सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बने हैं, उसने …

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