अपनी कलम की आवाज से,उठा दो अपने अंदर के वीर जवानों को।कांप रही है,यह धरती कब से,मिटा दो देश में बसे अत्याचारियों को।देश में भरे पड़े हैं दुष्कर्म के दलाल,और कर रहे हैं मनमाने शासन राज।तस्करी और जुर्म का करते हैं वे भूचाल,कलम उठाके करो सच्चाई से एक-एक सवाल।अपनी जुबां की एक दहाड़ से,युवा संगठन आ रहा है देश संभालने …
Read More »संपादकीय
कविता@
डॉ. राजीव डोगराजनयानकड,कांगड़ाहिमाचलप्रदेशजो देखना चाहते हैं मेरी तबाही का मंजरउनको बता दूं मैं सर्वदा बहने वाला हूंपर तुम शाश्वत न रहने वाले हो।जो देखना चाहते हैं मेरी आंखों में आंसूउनको बता दूँ मैं इस आब-ए-चश्म मेंडूब कर ही तैरना सीखा है।जो देखना चाहते हैं गम-ए-हयात में मुझे डूबता हुआउनको बता दूँ इसी समुद्र में विजय की नौका परहर मंजिल फ़तह …
Read More »लेख@कोचिंग का क्रेडिट,स्कूल की गुमनामी:शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?
आज कोचिंग संस्थानों को छात्रों की सफलता का सारा श्रेय मिलता है, जबकि वे शिक्षक गुमनाम रह जाते हैं जिन्होंने वर्षों तक नींव रखी। यह संपादकीय उसी विस्मृति की पीड़ा को उजागर करता है। स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक सिर्फ परीक्षा नहीं, सोच, भाषा और संस्कार गढ़ते हैं। कोचिंग एक पड़ाव है, पर शिक्षकों की तपस्या पूरी यात्रा …
Read More »लेख@कॉलर ट्यून की विदाई:जनता की सुनवाई या थकान की जीत?
कॉलर ट्यून को अलविदा कहा गया6 दिन पहले प्रकाशित हुआ मेरा लेख—कॉलर ट्यून या कलेजे पर हथौड़ा-हर बार अमिताभ क्यों? जब चेतावनी बन गई चिढ़ अमिताभ बच्चन की कोविड कॉलर ट्यून ने देश को जागरूक किया,पर समय के साथ वह झुंझलाहट में बदल गई।जनभावनाओं की अनदेखी नीतियों के विरुद्ध यह लेख देशभर में पढ़ा गया और चर्चा में आया। धन्यवाद …
Read More »लेख@देश का आनेवाला कल नशे के दलदल में न समा जाए
देश का आनेवाला कल नशे के दलदल में न समा जाएनशा केवल नाश करता है, जिसे नशेड़ी बड़े शौक से सेवन करते है वो शरीर को बेहद घातक तरीके से प्रभावित करता है। नशा सर्वप्रथम मनुष्य के मस्तिष्क पर हावी होता है एवं उसके सोचने-समझने की क्षमता को नष्ट करता है और धीरे-धीरे सम्पूर्ण शरीर को कमजोर करता है। जितनी …
Read More »कविता@किस्मत के भरोसे मत बैठो…
जीवन पथ पर लड़ सकते होआगे तुम भी बढ़ सकते होत्याग कर आलस का दामनइतिहास नया गड़ सकते होकिस्मत के भरोसे मत बैठो.मिला नहीं उसे ला सकते होजो चाहो तुम पा सकते होमेहनत के बल आगे बढ़करलक्ष्य हासिल कर सकते होस्मत के भरोसे मत बैठो..रगो में साहस भर सकते होकठिनाइयों से लड़ सकते होदौड़ नहीं तो चल सकते होसूरज सा …
Read More »कविता@तारे…..
झिलमिलाता आसमां और टिमटिमाते असंख्य तारे,खुद के अंदर झांक देखो कितने खोजे और निखारे,जी रहा है ये जो जीवन कभी जीते होंगे और हारे,देखो खुद का मनन करके कितनों के बने हो तुम सहारे,छोटे तारों में खुद का प्रकाश होता है,धरती के असंख्य तारे अभावों में क्यों रोता है,चंद पैसों के खातिर तारे चमक क्यों खोने लगे,सोने का नाटक ये …
Read More »लेख@संविधान के असली हत्यारे कौन?
जब अवसरवाद शर्मको भी खा जाता हैआपातकाल:लोकतंत्र पर लगापहला आधिकारिकताला…जनता ने विरोधकिया, फिर क्षमाभी दी…बदले हुए चेहरे,वही मौकापरस्तीआज की सत्ता क्यासच में लोकतांत्रिक है?संविधान की हत्याके असलीअपराधी कौन? राजनीति में परिवर्तन स्वाभाविक है, लेकिन चरित्रहीनता नहीं। आज जो नेता इंदिरा गांधी को कोसते हुए ‘संविधान बचाओ’ का नारा लगा रहे हैं, कल को वही सत्ता में बने रहने के लिए …
Read More »लेख@बेटियों के लिये मोह बढ़ना संतुलित समाज का आधार
दुनियाभर में माता-पिता आमतौर पर अब तक बेटियों की तुलना में बेटों को ज्यादा पसंद करते आ रहे हैं, लेकिन प्राथमिकताओं को लेकर वैश्विक दृष्टिकोण में एक सूक्ष्म,महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि अब लड़के की तुलना में लड़कियों को अधिक पसंद किया जाने लगा है। ऐसा इसलिए हो …
Read More »@कविता @ज्ञान समन्दर..
लगा किताबों का मेला है, ज्ञान समन्दर जैसा।देख-देख कर सिर चकराता, है अथाह ये ऐसा।।सबसे प्यारी भाषा लगती,राजदुलारी हिन्दी।बात-बात पर मुँह लटकाती,नहीं लगे जब बिंदी।।नदी पहाड़ी जंगल घाटी,सबका नाम बताते।गोल-गोल भूगोल पढ़ें तो,चक्कर खा गिर जाते।।कभी भाग अरु गुणा करें हम,कभी घटा कर जोड़ें।अमरबेल सा उलझे दिनभर,माथा कितना फोड़ें।।अपनी धाक जमा कर बैठी,अंग्रेजों की भाषा।पढ़ ना पाओ कक्षा में तब,बनता …
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घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur