
रागिनी! लाओ तुम्हारे पास जितनी भी पढ़ाई लिखाई और स्पोर्ट्स वगैरह की डिग्री हैं, सभी ले आओ। रागिनी की सासू माँ आरती की थाली दिखाती हुई बोली। रागिनी चौंक गई! मम्मी जी; आप मेरी डिग्री का क्या करेंगी? भला आप का क्या लेना देना है उससे? रागिनी अपने मोबाइल में अंगूठा सरकाती हँसती हुई बोली।
आरती की थाली पूजा स्थान में रखती हुई सासू माँ बोली- रागिनी…. मैं मजाक नहीं कर रही हूँ। सासू माँ की आवाज जैसे ही तेज उड़ान भरने लगी वैसे ही सोफा में मोबाइल रखती घबराती हुई रागिनी बोली मम्मी जी, आप मेरी डिग्री क्यों माँग रही? मुझे समझ नहीं आ रहा है।
गैस खत्म हो चुका है,चूल्हे में डालकर आग जलाना है।
क्या? रागिनी चौंक गई। मम्मी जी बात को यूँ ही स्पि्रंग की तरह गोल गोल मत घुमाइए न, ये भी कोई बात है? बस…यही सुनना रह गया था। हर सवाल का उत्तर है तुम्हारे पास लेकिन ये नहीं समझना है कि मैं क्यों और क्या बोलना चाहती हूँ।
जब देखो फ्रेंड्स, रील्स, व्हाट्सएप वगैरह…वगैरह…! सारा दिन इसी में लगी रहती हो। इतने में ही जीवन व्यतीत करना है? क्या इसी के लिए इतनी पढ़ाई की है?
पाई-पाई जोड़कर तुम्हारे पेरेंट्स ने पढ़ाया लिखाया है, उसका ज़रा सा भी ख्याल नहीं है तुम्हे? ससुराल आ गई हो तो अपना फ़र्ज¸ और सपना भूल गई हो? भगवान के आशीर्वाद से हम सम्पन्न हैं लेकिन हम यूँ ही लोगों में उलझने के बजाय एक अच्छा काम करें और अपने जीवन को खुशहाल बनाएँ। ऐसा क्यों नहीं सोच सकती? रागिनी तुम बहुत होनहार लड़की हो, मैं चाहती हूँ अपने हुनर को सामने लाओ और अच्छे कार्य करो। सोशल मीडिया में रहकर ही तुम लोगों को मोटिवेट क्यों नहीं करती; आजकल ऑनलाइन वर्क हो रहा। तुम्हें कहीं भी जाना नहीं पड़ेगा। स्नेह और आत्मविश्वास के साथ सासू माँ बोली। मम्मी जी! आपने आज मेरे नयन पट खोल दिए। आपने मेरे बँधे हुए पंखों को आज़ाद कर दिया। मुझे नहीं पता था कि एक ऐसा भी ससुराल होता है जहाँ बहुओं को स्वावलंबी होने का हक मिले। ये तो मेरा सौभाग्य है कि मुझे आप जैसी प्रेरणा देने वाली सासू माँ मिली। मैं धन्य हो गई! बोलती हुई रागिनी ने सासू माँ को झट से गले लगा लिया। सासू माँ रागिनी के सर पर हाथ फेरने लगी।
प्रिया देवांगन प्रियू
राजिम,गरियाबंद,छत्तीसगढ़
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